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सुषमा ने चीन के विदेश मंत्री के सामने उठाया मसूद अजहर का मुद्दा

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2001 में जैश-ए-मुहम्मद को प्रतिबंधित कर दिया था लेकिन वर्ष 2008 के मुंबई हमलों के बाद अजहर पर प्रतिबंध लगवाने के भारत के प्रयास फलीभूत नहीं हो सके
Author मॉस्को | April 18, 2016 20:40 pm
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मास्को में अपने चीनी समकक्ष वांग यी से हाथ मिलाते हुए। (पीटीआई फोटो)

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जैश-ए-मुहम्मद के सरगना और पठानकोट आतंकी हमले के मास्टमाइंड मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित करवाने के भारत के प्रयास को चीन की ओर से बाधित किए जाने का मुद्दा सोमवार (18 अप्रैल) को अपने चीनी समकक्ष वांग यी के समक्ष पुरजोर ढंग से उठाया। सुषमा ने रूस-भारत-चीन (आरआईसी) के विदेश मंत्रियों की त्रिपक्षीय बैठक से इतर वांग के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में यह मुद्दा उठाया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, ‘‘विदेश मंत्री ने मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की 1267 समिति में सूचीबद्ध करने का मुद्दा उठाया और इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद का साझा शिकार होने के तौर पर चीन और भारत को इस चुनौती का मुकाबला करने में सहयोग करना चाहिए। इस पर सहमति बनी थी कि दोनों पक्ष इस मामले पर एक दूसरे से संपर्क में रहेंगे।’’

इस माह की शुरुआत में चीन ने संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति को अजहर को आतंकी घोषित करने से यह कहते हुए रोक दिया था कि यह मामला सुरक्षा परिषद की ‘‘अनिवार्यताओं को पूरा नहीं करता’’। यह पहली बार नहीं है, जब चीन ने पाकिस्तान आधारित आतंकी समूहों और नेताओं को संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित करवाने के भारत के प्रयास को अवरुद्ध किया है।

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2001 में जैश-ए-मुहम्मद को प्रतिबंधित कर दिया था लेकिन वर्ष 2008 के मुंबई हमलों के बाद अजहर पर प्रतिबंध लगवाने के भारत के प्रयास फलीभूत नहीं हो सके क्योंकि चीन ने स्पष्ट तौर पर पाकिस्तान के कहने पर ऐसा होने नहीं दिया था। चीन के पास वीटो अधिकार है।

पिछले साल जुलाई में, चीन ने भारत के उस कदम को भी अवरुद्ध कर दिया था, जिसके तहत उसने मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी की रिहाई के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र को कार्रवाई करने के लिए कहा था। तब चीन ने कहा था कि उसका यह रूख ‘‘तथ्यों पर आधारित था और वास्तविकता एवं निष्पक्षता के अनुरूप था।’’ इसके साथ ही बीजिंग ने एक बार फिर यह दावा किया था कि वह नयी दिल्ली के संपर्क में है।

विदेश सचिव एस जयशंकर ने पिछले सप्ताह नयी दिल्ली में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा अजहर को आतंकी घोषित करवाने की भारत की कोशिश को बीजिंग द्वारा बाधित किए जाने का मुद्दा भारत ने चीन के साथ ‘‘काफी उच्च स्तर’’ तक उठाया है लेकिन यह मुद्दा द्विपक्षीय संबंधों के अन्य क्षेत्रों पर ‘‘हावी’’ नहीं होगा।

चीन ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि वह ऐसे मुद्दों पर तथ्यों एवं नियमों के आधार पर ‘‘निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके’’ से काम करता है। दो जनवरी को पठानकोट स्थित एयरबेस पर हुए हमले के बाद भारत ने फरवरी में संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर अजहर को तत्काल ही संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध करने की अपील की थी।

भारत के इस अनुरोध के तकनीकी पक्षों और उपलब्ध करवाए गए साक्ष्यों पर गौर करने के लिए आतंकवाद रोधी कार्यकारी निदेशालय ने इसपर गौर किया था। तब अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की मदद से तकनीकी दल ने इसे सभी सदस्यों को भेज दिया था। सबसे कहा गया था कि यदि इसपर कोई आपत्ति नहीं होती है तो समयसीमा खत्म होने के बाद उसे आतंकी का दर्जा दिए जाने की घोषणा कर दी जाएगी। लेकिन समय सीमा पूरी होने के कुछ ही घंटे पहले चीन ने संयुक्त राष्ट्र की समिति से ऐसा किए जाने पर रोक लगाने का अनुरोध कर दिया।

इस सप्ताह की शुरुआत में, भारत ने ‘गुप्त वीटो’ के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए जवाबदेही की मांग की थी और कहा था कि वैश्विक संस्था के आम सदस्यों को यह कभी नहीं बताया जाता कि आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने के उनके अनुरोधों को न माने जाने की वजह क्या है?

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने सुरक्षा परिषद को ‘आतंकी कृत्यों से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर मंडराने वाले खतरों’ के मुद्दे पर एक खुली बहस में कहा था, ‘‘अलकायदा, तालिबान और आईएसआईएस से संबंधित प्रतिबंध समितियों की प्रक्रियाओं को लेकर सर्वसम्मति और गोपनीयता की समीक्षा की जरूरत है। सर्वसम्मति और गोपनीयता की प्रक्रियाओं का नतीजा जवाबदेही की कमी के रूप में सामने आता है।’’

सुषमा ने वांग के साथ आपसी हितों के कई मुद्दों पर चर्चा की। अपने संबोधन की शुरूआत में सुषमा ने कहा कि पिछले एक साल में संबंधों में काफी सुधार आया है। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच वार्ताओं को बढ़ाने के लिए जल्दी-जल्दी बैठकों की वकालत की। उन्होंने कहा, ‘‘हम एक लंबे समय के बाद मिल रहे हैं और मुझे लगता है कि हमें थोड़ा जल्दी-जल्दी मिलना चाहिए क्योंकि दुनिया में चीजें तेजी से आगे बढ़ रही हैं और यदि हम जल्दी-जल्दी मिलते है। तो हम उनपर विचार कर पाएंगे।’’

चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों को संबंधों के विस्तार पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए और ‘हमारी रणनीतियों’ के अनुरूप रहना चाहिए ताकि एशिया और दुनिया के विकास में अहम योगदान दिया जा सके। उन्होंने कहा, ‘‘चीन और भारत दो बड़े देश हैं और दो बड़े पड़ोसी हैं। हमारे लिए यह अहम है कि हम बेहद करीबी सहयोग बनाकर रखें। हम दो विकासशील देश हैं और उभरते हुए बाजार हैं। हम दोनों ही आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय कायाकल्प की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम रणनीतिक साझेदार हैं और चूंकि विश्व का आर्थिक एवं राजनीतिक केंद्र एशिया-प्रशांत की ओर स्थानांतरित हो रहा है, ऐसे में दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है कि वे हाथ मिला लें क्योंकि हमारे सहयोग के क्षेत्र और दुनिया के लिए व्यापक एवं सकारात्मक प्रभाव होंगे।’’

वांग ने कहा, ‘‘इसलिए हमें अपने संबंध को विकसित करने पर, अपनी रणनीतियों को अनुरूप बनाने पर और अपनी साझेदारी को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि हम एशिया और विश्व के विकास में संयुक्त रूप से योगदान दे सकें।’’ सुषमा और वांग रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए यहां आए हैं। विदेश मंत्री रविवार (17 अप्रैल) रात को तेहरान से यहां पहुंची थीं। तेहरान का उनका दौरा दो दिन का था।

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