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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के लिए रेस में भारतीय-अमेरिकी जज, ओबामा पर टिकी नज़रें

चंडीगढ़ में पैदा हुए श्रीनिवास (48) देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था के संभावित न्यायाधीशों की सूची में शीर्ष स्थान पाया है।
Author वाशिंगटन | February 14, 2016 18:53 pm
चंडीगढ़ में पैदा हुए श्रीनिवास (48) देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था के संभावित न्यायाधीशों की सूची में शीर्ष स्थान पाया है।

श्री श्रीनिवासन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की पीठ में शामिल होने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी हो सकते हैं क्योंकि राष्ट्रपति बराक ओबामा उनको नामांकित कर सकते हैं और उन्हें द्विदलीय समर्थन भी हासिल है। चंडीगढ़ में पैदा हुए श्रीनिवास (48) देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था के संभावित न्यायाधीशों की सूची में शीर्ष स्थान पाया है।

हाईकोर्ट में सबसे लंबे समय तक सेवारत रहे न्यायमूर्ति एंटोनिन स्कैलिया के निधन के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा किसी ‘उदार’ न्यायाधीश को नामांकित कर सकते हैं।

सीएनएन ने रविवार को कहा कि संभावित न्यायाधीशों की पहले से ही एक सूची रहती है और ओबामा चाहेंगे कि वह किसी ऐसे व्यक्ति को नामांकित करें जिसे कांग्रेस में रिपब्लिकन का भी समर्थन मिल सके। इसने कहा कि सूची में सबसे ऊपर श्री श्रीनिवासन (48) का नाम है जो डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट के लिए यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स के सदस्य हैं।

ओबामा ने श्रीनिवासन को पहली बार पद के लिए 2012 में नामांकित किया था और सीनेट ने मई 2013 में उनके नाम की पुष्टि की। यहां तक कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ में शामिल रिपब्लिकन टेड क्रूज और मार्को रूबियो ने भी उनका समर्थन किया था। वह ओबामा के प्रधान उप सॉलिसिटर जनरल थे। उन्होंने रक्षा विवाह कानून के खिलाफ सफल लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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  1. sunder Lohia
    May 25, 2014 at 8:15 pm
    मैं लेखक के इस विचार से मत हूँ की नई सरकार के आने से कुछ तो बदलेगा . वह कुछ क्या होगा इसे जानने के लिए वक़्त लगेगा.बदलाव ऐसा ही होगा जैसा उदयन सोचते हैं या इसके उलट होगा यानि तब सोवियत भूमंडलीकरण के स्थान पर अमेरिकी भूमंडिलकरण उपस्थित हो जाये और हमें उसके खिलाफ मोर्चा खोलना पड़े .यह स्थिति भी ी नहीं होगी आखिर हमें अपने दुश्मन की पहचान तो हो जाएगी. साहित्य और संस्कृति को सोवियत नज़रिये से देखने के कारण हमारे देश मैं इसकी उपेक्षा हुई है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता लेकिन मार्क्सवाद मैं
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    सबरंग