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खाते में गलती से आए साढ़े 6 करोड़ तो स्‍टूडेंट दिखाने लगा रईसी, खर्च कर डाले 40 लाख रुपये

इस मामले की पुष्टि 28 अगस्त को तब हुई जब किसी अन्य छात्र ने हमें मामले की सूचना दी थी।
दक्षिण अफ्रीकी छात्रों ने पिछले दो वर्षों में फ्री यूनिवर्सिटी एजुकेशन की मांग में हिंसक विरोध प्रदर्शन किया है।

साउथ अफ्रीका की एक यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट ने अचानक महंगे कपड़ों, स्मार्टफोन और पार्टी में पैसा उड़ाना शुरू कर दिया। इस स्टूडेंट के अकाउंट में गलती से 1400 रैंड (6,800 रुपये) की जगह 14 मिलियन रैंड (6.8 करोड़ रुपये) ट्रांसफर हो गए थे। यह गलती उस कंपनी की वजह से हुई जो स्टूडेंट्स के लिए हर महीने खाने के लिए पैसे ट्रांसफर करती है। पूर्वी केप क्षेत्र की वाल्टर सिसुलु यूनिवर्सिटी ने कहा कि राज्य द्वारा जारी छात्र ऋण के मासिक वितरण के दौरान जून में यह बड़ी गलती हुई थी। यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता योनेला तुकवेओ ने कहा की इस मामले की पुष्टि सोमवार (28 अगस्त)  को हुई, जब किसी अन्य छात्र ने हमें मामले की सूचना दी थी। तुकवेओ ने कहा कि जिस स्टूडेंट के खाते में गलती से मनी ट्रांसफर हो गई थी वह 800,000 रैंड (करीब 40 लाख रुपये) खर्च कर चुका था।

टुकवेओ ने कहा कि खर्च किए गए रैंड उस छात्र को वापस करने होंगे। यह लोन लेने वाले स्टूडेंट्स के साथ हमारे एग्रीमेंट में पहले से ही कहा गया है। बाकी बची हुई राशि को उस स्टूडेंट के खाते से वापस ले लिया गया है। अब यूनिवर्सिटी इस बात की जांच कर रही है कि यह इतनी बड़ी गलती हुई कैसे। स्थानीय मीडिया के मुताबिक स्टूडेंट ने महंगे कपड़ों, एक स्मार्टफोन और पार्टी करने पर यह मनी खर्च की थी। दक्षिण अफ्रीका की राष्ट्रीय छात्र वित्तीय सहायता योजना के तहत गरीब पृष्ठभूमि से वाले छात्रों को लोन की सुविधा दी जाती है। दक्षिण अफ्रीकी छात्रों ने पिछले दो वर्षों में फ्री यूनिवर्सिटी एजुकेशन की मांग में हिंसक विरोध प्रदर्शन किया है।

दक्षिण अफ्रीका के जोहानेसबर्ग में द फोरम फॉर सर्विस डिलीवरी ((F4SD) नामक संस्था ने सभी के लिए अच्छी निजी शिक्षा मुहैया कराने की मांग की थी। इस मांग के पीछे का कारण था निजी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले तकरीबन 99 फीसदी छात्रों का पास होना। इन पास होने वाले छात्रों में से 87 फीसदी का चयन बैचलर डिग्री के लिए और तकरीबन 9.83 का चयन डिप्लोमा कोर्सेस के लिए हुआ था। इस संगठन की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया था, “हमारी शिक्षा व्यवस्था जॉब मार्केट के हिसाब से योग्य छात्रों की मांग पूरी करने में विफल हो रही है, दक्षिण अफ्रीका में पहले से युवा बेरोजगारी की दर बहुत ज्यादा है जिसमें विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने वाले छात्र शामिल हैं।”

 

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