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सिक्किम विवाद: चीन ने भारतीय सेना पर लगाया धोखा देने का आरोप, कहा- वापस बुलाए जाएं सैनिक

चीन और भारत ‘दोका ला’ क्षेत्र में तकरीबन एक महीने से तनातनी की स्थिति में फंसे हैं।
Author July 4, 2017 08:53 am
भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा है। (Source: PTI)

चीन और भारत के बीच जारी वाक्-युद्ध आज उस समय और बढ़ गया जब चीन ने सिक्किम के निकट के क्षेत्र में चीनी सेना को सड़क निर्माण करने से रोकने की भारतीय सेना की कार्रवाई को पूर्ववर्ती सरकारों के रूख का ‘‘उल्लंघन’’ करार देते हुए कहा कि भारत को अपनी सेना को अवश्य ही पीछे हटा लेना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा सिक्किम सेक्टर में भारत-चीन की सीमा सुस्पष्ट रूप से सीमांकित है। शुआंग ने मीडिया ब्रींिफग में पत्रकारों से कहा, ‘‘चीनी सरजमीन में प्रवेश कर और चीनी सैनिकों की सामान्य गतिविधियों को बाधित कर, भारत ने सीमा पर स्थापित कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी उसूल का उल्लंघन किया है और सीमा क्षेत्र की शांति एवं स्थिरता बाधित की है।’’ चीनी प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम भारतीय पक्ष से चाहते हैं कि वे अपने सैनिकों को सीमा के भारतीय हिस्से में लौटाए और संबंधित क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बहाली की स्थितियां पैदा करे।’’

चीन और भारत ‘दोका ला’ क्षेत्र में तकरीबन एक महीने से तनातनी की स्थिति में फंसे हैं जो 1962 के बाद से दोनों देशों की सेनाओं के बीच सर्वाधिक लंबा प्रतिरोध है। 1962 में दोनों देशों के बीच जंग हो चुकी है। सिक्किम मई 1976 में भारत का हिस्सा बना। यह एकमात्र प्रदेश है जहां चीन के साथ सीमा सीमांकित है। यहां रेखा चीन के साथ 1898 में हुई संधि पर आधारित है। दोका ला उस क्षेत्र का नाम है जिसकी भूटान दोकलाम के रूप में पहचान करता है जबकि चीन उसे अपना दोंगलांग क्षेत्र होने का दावा करता है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शुआंग ने कहा कि भारत को इस संधि का सम्मान करना चाहिए और तुरंत अपनी सेना को वापस कर लेना चाहिए। उन्होंने रक्षामंत्री अरूण जेटली की उस टिप्पणी को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि 2017 का भारत 1962 के भारत से अलग है। उन्होंने कहा कि 2017 का चीन भी 1962 के चीन से भिन्न है और अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए ‘‘हर जरूरी उपाय’’ करेगा।

शुआंग ने कहा, ‘‘भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1959 में चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री चाऊ एनलाई को लिखे पत्र में सिक्किम पर 1890 की चीन-ब्रिटिश संधि का अनुमोदन किया था। परवर्ती भारत सरकारों ने भी इसका अनुमोदन किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सिक्किम में भारत-चीन सीमा सुस्पष्ट रूप से सीमांकित है। भारत ने जो कार्रवाई की वह (पूर्ववर्ती) भारतीय सरकारों के रूख का उल्लंघन है।’’ शुआंग ने कहा, ‘‘जो कुछ हुआ वह बहुत साफ है, सीमा का सिक्किम का हिस्सा ब्रिटेन और चीन के बीच के 1890 कन्वेंशन से पहले ही परिभाषित है। डोकलाम चीन का है।’’ जब चीनी प्रवक्ता से जर्मनी के हैमबर्ग में होने वाले जी20 सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी चिनंिफग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मिलने की संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ‘‘फिलहाल उनके पास इसकी कोई सूचना नहीं है’’ कि अन्य देशों के नेताओं के साथ शी की कोई द्विपक्षीय बैठक होनी है या नहीं। बहरहाल, चीनी प्रवक्ता ने कहा कि भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संवाद के लिए रास्ता ‘‘खुला हुआ और सुगम है।’’

दोनों देशों के बीच तनातनी तब उजागर हुई जब चीन ने भारत से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जाने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए सिक्किम से नाथूला दर्रा होकर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया। पहले उसने कहा कि उसने बारिश और भूस्खलन के चलते तिब्बत में रास्ता खराब होने के कारण यात्रा रोक दी है। बाद में उसने इशारा किया कि मामला सिक्किम में दोनों देशों की सेनाओं के बीच के गतिरोध से जुड़ा है। आज चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मध्य क्षेत्र में स्थित लिपूलेक दर्रा से होकर तिब्बत के लिए जाने वाला दूसरा रास्ता खुला हुआ है क्योंकि वह ऐसी जगह स्थित है जहां कोई विवाद नहीं है।

शुक्रवार को जारी भारतीय विदेश मंत्रालय के इस बयान पर कि विवादित डोका ला क्षेत्र में चीनी सेना की ओर से सड़क निर्माण यथास्थिति में उल्लेखनीय बदलाव होता और भारत के लिए इसके ‘‘गंभीर’’ सुरक्षा निहितार्थ होते, चीनी विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि उन्होंने भारत के बयान पर गौर किया है। उन्होंने कहा, इसमें सिक्किम तथा तिब्बत से जुड़े ब्रिटेन और चीन के बीच के 1890 के कन्वेंशन से परहेज किया गया है। लेकिन यह वह कन्वेंशन है जिसने सिक्किम सेक्शन में दोनों पक्षों के बीच के सीमा विन्यास की पुष्टि की है। इस कन्वेंशन को चीन और भारत की उत्तरोत्तर सरकारों ने मान्यता दी है और भारत की सरकारों ने लिखित रूप में इसकी पुष्टि की है।’’ प्रवक्ता ने भारत पर भूटान को आड़ के तौर पर उपयोग करने का आरोप लगाया। शुआंग ने कहा, ‘‘भारतीय सीमा सैनिकों के अवैध प्रवेश को ढकने के लिए, तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने और यहां तक भूटान की स्वतंत्रता एवं संप्रभुता की कीमत पर वे सही और गलत के बीच घाल-मेल कर रहे हैं जो गलत है।’’

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  1. M
    manish agrawal
    Jul 3, 2017 at 10:41 pm
    बहुत प्रोपे हो रहा था बीजेपी सरकार की विदेश-नीती का ! निकल गयी सारी शेखी ? कांग्रेस के राज्य में 2004 से 2014 तक चीन से रिलेशन्स नार् ही रहे ! लेकिन बीजेपी ने सेंट्रल गवर्नमेंट में आने के 3 बर्षों में ही हिन्दोस्तान और चीन को युद्ध के मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया ! BJP Govt यदि अमेरिका की ताक़त पर उछल रही है , तो उसको ये समझ लेना चाहिए की न्यूक्लिअर अटैक का वार हमें ही झेलना होगा ! अमेरिका को नहीं ! तबाही हिन्दोस्तान की होगी , अमेरिका की नहीं !
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