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ब्रिटेन के यह कैसे छात्र जो बनना चाहते हैं ‘सेक्स वर्कर’!

ब्रिटेन में विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान अपना खर्च निकालने के लिये हर 20 में से एक छात्र-छात्रा देह व्यापार से किसी न किसी तरह जुडे रहे हैं। एक नए सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आयी है जिसके अनुसार बहुत सारे छात्र गुप्त रूप से इस पेशे का हिस्सा बन रहे हैं। ‘स्टूडेंट सेक्स वर्क […]
Author March 29, 2015 15:12 pm
ये क्या! सेक्स वर्कर बनना चाहते हैं 20 फीसदी छात्र! (फोटो: स्रोत: Pascal Mannaerts’s collection)

ब्रिटेन में विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान अपना खर्च निकालने के लिये हर 20 में से एक छात्र-छात्रा देह व्यापार से किसी न किसी तरह जुडे रहे हैं। एक नए सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आयी है जिसके अनुसार बहुत सारे छात्र गुप्त रूप से इस पेशे का हिस्सा बन रहे हैं।

‘स्टूडेंट सेक्स वर्क प्रोजेक्ट’ रिपोर्ट के अनुसार देह व्यापार में महिलाओं से अधिक पुरुषों के शामिल होने की सूचना है। देह व्यापार में वेश्यावृति, स्ट्रिपिंग, एस्कॉर्टिंग आदि शामिल हैं।

स्वानसी यूनिवर्सिटी के आपराधिक न्याय एवं अपराध विज्ञान केंद्र के इस ऑनलाइन अध्ययन में पाया गया कि हर 20 में से एक कॉलेज छात्र-छात्रा पढ़ाई के दौरान देह व्यापार का हिस्सा रहे हैं।

अध्ययनकर्ताओं का नेतृत्व करने वाली डॉ ट्रेसी सैगर ने कहा, ‘‘हमारे पास अब पुख्ता सबूत हैं कि ब्रिटेन में छात्र देह व्यापार में लिप्त हैं। इनमें से ज्यादातर छात्र इस बात को छिपाकर रखते हैं क्योंकि इसे समाज में गलत नजर से देखा जाता है।’’

उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी को छात्रों के देह व्यापार के मुद्दों को बेहतर तरीके से समझना चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए। अध्ययन में 6,750 छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया था जिनमें से पांच प्रतिशत पुरुषों और 3.5 प्रतिशत महिलाओं ने देह व्यापार में लिप्त होने की बात मानी जबकि करीब 22 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में सोचा था।

देह व्यापार में शामिल लोगों में से करीब दो तिहाई ने कहा कि उन्होंने एक खास जीवनशैली के लिए ऐसा किया जबकि 56 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें अपने बुनियादी खर्चें निकालने थे। इसके अलावा दो तिहाई ने कहा कि वह अपने पाठ्यक्रम के खत्म होने के बाद अपना कर्ज कम करना चाहते थे।

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  1. Jatish Dubey
    Mar 29, 2015 at 3:29 pm
    जन जन अर्थात
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    Reply
    1. Jatish Dubey
      Mar 29, 2015 at 3:28 pm
      जनतांत्रिक समाज और राज्य व्यवस्थाओं वाले समाजों में जान जान आर्थर वोटर द्वारा की जाने वाली तमाम गतिविधियाँ उसकी स्वैच्छिक होती हैं. वो उन गतिविधियों को अवश्य करता है जो उसे करनी हैं. यदि उसकी किसी क्रिया के बदले मौद्रिक लेन देन होता है तो वह आर्थिक गतिविधि बन जाती है. यदि वोटर धरती को तबाह करने की क्रियाएँ करके मुद्रा का लेन देन करता है तो विध्वंशक है यदि स्वयं का सौदा कर लेता है तो उसमे व्यवस्था और सरकार क्या कर सकती है. यहाँ तक की माता पिता भी कुछ नहीं कर सकते. जिसे जो करना है करेगा.
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      सबरंग