December 07, 2016

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सऊदी अरब: एक्टिविस्ट को ट्वीट के लिए हुई 2 साल की जेल, सत्ताधारी अल सऊद परिवार और शाह सलमान की आलोचना का आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता पर जेल से रिहा होने के बाद दो साल तक विदेश जाने और सोशल मीडिया वेबसाइटों पर पोस्ट करने की पाबंदी होगी।

सऊदी अरब में ट्विटर का प्रयोग करती एक महिला एक्टिविस्ट की फाइल फोटो। (तस्वीर-एपी)

सऊद अरब ने एक मानवाधिकार कार्यकर्ता को ट्विटर पर देश में सत्ताधारी अल सऊद परिवार के खिलाफ बगावत को बढ़ावा देने और राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग करने के लिए दो साल की सजा सुनाई है। ईरान के सरकारी टीवी के अनुसार इस अज्ञात व्यक्ति को बुधवार (16 दिसंबर) को रियाद स्थित विशेष अपराध अदालत में सजा सुनाई गई। रिपोर्ट के अनुसार इस व्यक्ति पर दूसरे आरोप भी थे। मानवाधिकार कार्यकर्ता पर ट्विटर पर अकाउंट बनाने और ट्वीट का इस्तेमाल कर सऊदी शासन के खिलाफ लोगों को लामबंद करने का आरोप है। कार्यकर्ता पर राजनीतिक बंदियों को रिहा करने के लिए “दंगा” भड़काने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है।  सऊदी शासन के अनुसार मानवाधिकार कार्यकर्ता ने ट्विटर का इस्तेमाल सऊदी अरब के शाह सलमान और सुरक्षा बलों पर अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए भी किया। सऊदी अरब में इससे पहले भी सोशल मीडिया पर शासन की आलोचना के लिए कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जेल की सजा दी जा चुकी है।

सऊदी अरब मीडिया के अनुसार इस कार्यकर्ता का मोबाइल जब्त कर लिया गया है और उसका ट्विटर अकाउंट बंद करवा दिया गया है। कार्यकर्ता पर जेल से रिहा होने के बाद दो साल तक विदेश जाने और सोशल मीडिया वेबसाइटों पर पोस्ट करने की पाबंदी होगी। सऊदी शासन पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगातार लगते रहे हैं। अमेरिकी मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट वाच और ब्रिटेन स्थित मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी ने राजनीतिक विरोधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के दमन के लिए सऊदी प्रशासन की आलोचना की है।

पिछले साल मार्च में एमनेस्टी ने एक बयान जारी करके सऊदी शासन के आतंकवाद-निरोधक कानून को “शोषणकारी” बताया था। इस कानून के अनुसार शांतिपूर्ण विरोध रैली निकालने को भी आतंकवाद की श्रेणी में रखा गया है। दोषी पाए जाने पर इसके लिए लंबी सजा का प्रावधान है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार सऊदी प्रशासन की न्यायप्रक्रिया भी भेदभावपूर्ण है। सऊदी कानून के अनुसार सऊदी के शाह का अपमान करने और सामाजिक शांति भंग करने के लिए 10 साल तक की सजा दी जा सकती है।

जुलाई 2014 में सऊदी अदालत ने प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता वालिद अबु अल-खैर को 15 साल जेल की सजा सुनाई थी। उन पर सजा पूरी होने के पांच साल बाद तक विदेश जाने पर पाबंदी भी रहेगी। इसके अलावा उन्हें दो लाख सऊदी रियाल (करीब 36 लाख रुपये) जुर्माना भी चुकाना पड़ा। अल-खैर ने सऊदी अरब स्थित मानवाधिकार संस्था मॉनिटर ऑफ ह्यूमन के संस्थापक हैं। इससे पहले महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता अल-शामरी को भी ट्विटर सऊदी शासन की आलोचना के लिए जेल हो चुकी है।

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वीडियो: देखें कैसे पाकिस्तानियों ने ट्विटर पर किया था हाफिज सईद का समर्थन- 

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First Published on November 16, 2016 4:33 pm

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