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रिपोर्ट: गाय की मदद से होगा एचआईवी का इलाज, वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने के बहुत करीब पहुंचे

रिसर्च में कहा गया कि प्रतिरक्षा सिस्टम से बनी इस वैक्सीन से भविष्य में एचआईवी को रोका जा सकता है।
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है। (Express Photo)

एचआईवी वैक्सीन पर रिसर्च कर रही एक टीम ने ही हाल ही में दावा किया है कि गायों के प्रतिरक्षा सिस्टम (immune system) के जरिए भविष्य में एचआईवी से निपटने के लिए वैक्सीन बनाने में ये काफी मददगार साबित हो सकती हैं। रिसर्च में कहा गया कि प्रतिरक्षा सिस्टम से बनी इस वैक्सीन से भविष्य में एचआईवी को रोका जा सकता है। जनरल ‘नेचर’ में प्रकाशित हुई रिपोर्ट के अनुसार टेक्सास एंड एम यूनिर्वसिटी के वैज्ञानिकों ने परीक्षण के दौरान गायों में एचआर्इवी का इंजेक्शन लगाया, जिससे 35 दिनों के भीतर उनकी प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गर्इ। इसके बाद जब गायों की प्रतिरक्षा कोशिकाओं की पड़ताल की गर्इ तो पाया गया कि इनमें से एक में एचआर्इवी को फैलने से रोकने के गुण मौजूद थे। रिपोर्ट के अनुसार इसके बाद वैज्ञानिकों ने ऐसी प्रतिरक्षा कोशिकाओं का एक इंजेक्शन तैयार किया, जिसे एचआईवी पीड़ित को लगाया गया। इससे मरीज में मौजूद एचआईवी के प्रभाव को बेअसर कर दिया। हालांकि ये इंजेक्शन वैक्सीन के रूप में कब आएगा इस बारे में रिपोर्ट में कुछ नहीं कहा गया।

वहीं रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने प्रयोग के लिए चार गायों को चुना, जिसके बाद एचआईवी के उन्हें दो-दो इंजेक्शन लगाए गए। करीब 30 दिनों बाद उनमें प्रतिरक्षा कोशिकाएं विकसित होने लगी। गाय को चुनने के सवाल पर वैज्ञानिकों कहा कि गाय एचआर्इवी या उसके जैसे वायरस से आमतोर पर संक्रमित नहीं होती हैं। उनकी प्रतिरोधक क्षमता बहुत खास किस्म की होती है। गाय जब ऐसे किसी वायरस के संपर्क में आती है तो उनके शरीर में प्रतिरक्षा कोशिकाएं तेजी से विकसित होने लगती हैं। इंटरनेशनल एड्स वैक्सीन इनीशिएटिव से जुड़े शोध के प्रमुख डेविड सोक का कहना है कि एचआर्इवी मानव को प्रभावित करने वाला वायरस है, मगर इससे लड़ने की क्षमता जीवों में है। जानकारी के लिए बता दें कि मौजूदा समय में एचआर्इवी का कोई सटीक इलाज नहीं है। इससे पीड़ित मरीजों को पूरी जिंदगी जी मिचलाने, उल्टी-दस्त, अनिद्रा की दवाइयां लेनी पड़ती है। आकंड़ों के अनुसार एचआर्इवी से साल 2005 में 19 लाख लोगों की मौत हुई, वहीं साल 2016 में ये आंकड़ा 10 लाख रहा। 3.67 करोड़ एचआर्इवी ग्रस्त लोगों में से 1.95 करोड़ लोग इलाज करा रहे हैं। साल 1980 में इस महामारी के बाद से अब तक 3.5 करोड़ लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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