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पाकिस्तान को राजनाथ का कड़ा संदेश, कहा- आतंकियों का महिमामंडन, आतंकी समूहों को प्रोत्साहन देना बंद हो

राजनाथ ने कहा कि आतंकियों या संगठनों के खिलाफ सिर्फ कड़ी से कड़ी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए बल्कि वैसे लोगों, संगठनों और देशों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए, जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं।
Author इस्लामाबाद | August 4, 2016 21:15 pm
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह। (एएनआई फोटो)

भारत ने गुरुवार (4 अगस्त) को पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वह आतंकवादी समूहों को प्रोत्साहन देना और आतंकवादियों का महिमामंडन बंद करे और आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों के खिलाफ ‘सख्त से सख्त कार्रवाई’ और उन्हें अलग-थलग करने का आह्वान किया। गृह मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि सिर्फ आतंकवाद और आतंकवादियों की निंदा पर्याप्त नहीं है और ‘अच्छा आतंकवादी या बुरा आतंकवादी’ नहीं होता। दक्षेस देशों के गृह मंत्रियों के सातवें सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि आतंकवाद अब भी क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती और खतरा बना हुआ है।

भारत-पाक संबंधों में मौजूदा तनाव साफ तौर पर दिखा जब सिंह का अपने पाकिस्तानी समकक्ष चौधरी निसार अली खान के साथ आज पहली बार आमना-सामना हुआ और दोनों नेताओं ने बमुश्किल हाथ मिलाया। दोनों नेताओं ने बमुश्किल एक-दूसरे के हाथ को छुआ और औपचारिक तौर पर हाथ नहीं मिलाया। यह सिंह के सम्मेलन कक्ष में प्रवेश से पहले हुआ। नयी दिल्ली से सम्मेलन की खबर देने के लिए पहुंचे भारतीय मीडिया को उस क्षण को कैद करने या सम्मेलन को रिपोर्ट करने की अनुमति नहीं दी गई और पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें दूर ही रखा। इसको लेकर भारत के एक वरिष्ठ अधिकारी और एक पाकिस्तानी अधिकारी के बीच कहासुनी हुई।

सिंह ने बैठक के बाद खान द्वारा दी जा रही दावत में भी हिस्सा नहीं लिया क्योंकि मेजबान आयोजन स्थल से चला गया था। सम्मेलन को हिंदी में संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि आतंकवादियों या संगठनों के खिलाफ सिर्फ कड़ी से कड़ी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए बल्कि वैसे लोगों, संगठनों और देशों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए, जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर परोक्ष तौर पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा, ‘इस बात को भी सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है कि आतंकवाद का कोई भी देश महिमामंडन नहीं करे और कोई देश समर्थन नहीं करे।’

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सिंह का बयान शरीफ द्वारा बुरहान वानी को शहीद बताकर उसकी प्रशंसा किए जाने की पृष्ठभूमि में आया। हिज्बुल मुजाहिदीन का कमांडर वानी आठ जुलाई को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। उन्होंने कहा, ‘एक देश का आतंकवादी किसी दूसरे के लिए शहीद या स्वतंत्रता सेनानी नहीं हो सकता। मैं सिर्फ भारत या दक्षेस के अन्य सदस्यों की तरफ से नहीं बल्कि समूची मानवता की तरफ से बोल रहा हूं। मैं अनुरोध कर रहा हूं कि किसी भी सूरत में आतंकवादियों की शहीद के तौर पर प्रशंसा नहीं की जानी चाहिए।’

सिंह ने वैसे देशों या लोगों को अलग-थलग करने का आह्वान किया जो आतंकवादियों को किसी भी तरह का समर्थन देते हैं, प्रोत्साहन देते हैं, उन्हें सुरक्षित पनाह या किसी तरह की सहायता देते हैं। उन्होंने कहा, ‘न सिर्फ आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों बल्कि वैसे लोगों, संस्थानों, संगठनों या राष्ट्रों के खिलाफ भी सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए जो उनका समर्थन करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ यह सुनिश्चित करेगा कि मानवता के खिलाफ आतंकवाद के जघन्य अपराध को प्रोत्साहन देने में शामिल ताकतों का प्रभावी तरीके से मुकाबला किया जा सके।’’

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गृह मंत्री ने आतंकवाद को दबाने और इसके अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर दक्षेस क्षेत्रीय अभिसमय को लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई में यह महत्वपूर्ण है। अभिसमय में प्रभावी कदम उठाना सुनिश्चित किया जाना शामिल है ताकि जो लोग आतंकवादी कृत्य कर रहे हैं वे मुकदमे और सजा से नहीं बच सकें और उनका प्रत्यर्पण किया जाए या मुकदमा चलाया जाए। सिंह ने आतंकवादी समूहों द्वारा आधुनिक उपकरण के तौर पर सोशल और डिजिटल मीडिया के दुरुपयोग के मुद्दे पर भी बात की। सिंह ने कहा, ‘आतंकवाद से निपटने के हमारे प्रयास में हमें साइबर अपराध के सभी संभावित रास्तों, आतंकवादी दुनिया के साथ उसके संबंधों और उससे कैसे निपटा जा सकता है उन सबको देखना चाहिए।’

उन्होंने कहा, ‘ध्यान और प्रयास इस बात को सुनिश्चित करने पर दिया जाना चाहिए कि सोशल मीडिया और अन्य आधुनिक प्रौद्योगिकी का खासतौर पर युवाओं को गुमराह करने या किसी भी तरीके से आतंकवाद को प्रोत्साहन देने के लिए दुरुपयोग नहीं हो।’ उन्होंने आपराधिक मामलों में पारस्परिक सहायता पर दक्षेस अभिसमय के अनुमोदन की ओर भी प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा, ‘हम अभिसमय का फायदा लेने में सक्षम नहीं हैं क्योंकि कुछ सदस्यों ने अब तक इसका अनुमोदन नहीं किया है। मैं शेष सदस्य देशों से अनुरोध करूंगा कि वे यथाशीघ्र अभिसमय का अनुमोदन करने पर विचार करें।’ उन्होंने दिल्ली में 22 और 23 सितंबर से दक्षेस आतंकवाद निरोधी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए जाने-माने विशेषज्ञों के उच्चस्तरीय समूह की दूसरी बैठक का मेजबान होने के भारत के प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए प्रतिभागियों का शुक्रिया अदा किया।

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