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पाकिस्तान के बम निरोधक दस्ते में शामिल हुई पहली महिला

राफिया ने हाल ही में 31 पुरुष साथियों के साथ नौशेरा के स्कूल ऑफ पुलिस हैंडलिंग में 15 दिन की ट्रेनिंग पूरी की है।

कहते हैं कि अगर हौसला और जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं लगता, भले ही उसमें जोखिम कितना भी हो। इसी को सच कर दिखाया है पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की रहने वाली राफिया कासिम बेग ने। वह पाकिस्तान के बॉम डिस्पोजल यूनिट में शामिल होने वाली पहली महिला बन गईं हैं। सात साल पहले रफिया बतौर कॉन्सटेबल पुलिस बल में शामिल हुई थीं। उन्होंने हाल ही में 31 पुरुष साथियों के साथ नौशेरा के स्कूल ऑफ पुलिस हैंडलिंग में 15 दिन की ट्रेनिंग पूरी की है।

29 साल की राफिया जिस इलाके से आती हैं, वो हमेशा से आतंकियों के निशाने पर रहा है। देश में बढ़ रही आतंकी हमलों ने राफिया को फोर्स जॉइन करने के लिए इंस्पायर किया। यूं तो उन्हें जॉब के कई ऑफर आएं, लेकिन उन्होंने तो पुलिस फोर्स में  ही जाने की ठान रखी थी। राफिया का यह कदम पाकिस्तान में महिलाओं के प्रति बदलते नजरिए को भी दिखाता है।

IR में मास्टर्स हैं राफिया
ट्रेनिंग के इस दौरान रफिया को बम के बारे में हर तरह की जानकारी दी गई जैसे कैसे उसे पहचाना जाए और उसे डिफ्यूज किया जाए। अब वह बीडीयू में काम करेंगी। वह एक पढ़े-लिखे परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने खुद इंटरनेशनल रिलेशंस में मास्टर्स किया है। राफिया ने इकनॉमिक्स में मास्टर्स डिग्री लेने के बाद में इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी में भी काम किया है। फिलहाल वह एलएलबी कर रही हैं। राफिया की एजुकेशन क्वॉलिफिकेशन के कारण उन्हें कई सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों ने नौकरी की पेशकश की गई। मगर, उन्होंने पुलिस फोर्स में शामिल होने का फैसला किया।

एक ब्लास्ट ने बदली सोच

सात साल पहले एक सेशन कोर्ट के सामने हुए ब्लास्ट के बाद रफिया ने फोर्स में शामिल होने का फैसला किया था। पुलिस बल में जॉइनिंग के बाद राफिया को पेशावर के अदेजई, मिचनी और सलमान खेल जैसे इलाकों में ट्रेनिंग की। ये इलाके रेड जोन घोषित हैं, जहां आतंकवादी अक्सर सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर हमले करते हैं। वहां उन्होंने बड़ी संख्या में पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ 10 दिनों तक गश्त की। राफिया उस जांच में भी रह चुकी हैं, जो साल 2010 में लेडी रीडिंग अस्पताल के डॉक्टर इंतिखाब आलम के अपहरण के बाद 48 घंटे में उन्हें बचाने वाली थी। इस टीम में वह एकमात्र महिला सदस्य थीं।

 

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