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अमेरिकी अखबार में पीएम नरेंद्र मोदी का लेख: चीन को लेकर तेवर सख्‍त, ट्रंप से गर्मजोशी की आकांक्षा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली अपनी मुलाकात से पूर्व मोदी ने यह लेख लिखा है।
Author June 26, 2017 20:21 pm
यूनाइटेड स्‍टेट्स कम्‍युनिटी रिसेप्‍शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (PTI Photo)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंध ‘‘अकाट्य तर्क’’ पर आधारित हैं और दुनिया को आतंकवाद , कट्टरपंथी विचारधारा और गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से सुरक्षित बनाने में दोनों देशों के हित जुड़े हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक संपादकीय में प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा है कि भारत और अमेरिका एक ऐसी गहरी और मजबूत साझेदारी बना रहे हैं जो कि बेल्टवे और रायसीना हिल से कहीं आगे तक जाती है। बेल्टवे अंतरराज्यीय 495 नामक राजमार्ग है जो वाशिंगटन डीसी के चारों ओर से गुजरता है जबकि रायसीना हिल नयी दिल्ली में भारत सरकार की सत्ता का केंद्र है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अनिश्चित नजर आ रहे वैश्विक परिदृश्य में भारत और अमेरिका विकास और नवोन्मेष के साझा मजबूत इंजनों की तरह खड़े हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली अपनी मुलाकात से पूर्व मोदी ने यह बातें कही हैं। मोदी ने पिछले जून में वाशिंगटन की अपनी यात्रा और अमेरिकी कांग्रेस के साझा सत्र के अपने संबोधन को याद किया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध ‘‘इतिहास की झिझक ’’ पर काबू पा चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘‘एक साल बाद, मैं अमेरिका लौटा हूं और हमारे दोनों देशों के बीच मेलजोल बढ़ने का मुझे विश्वास है।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,‘‘यह विश्वास हमारे साझा मूल्यों और हमारी व्यवस्थाओं की स्थिरता से उपजता है। हमारे लोगों और संस्थानों ने तेजी से लोकतांत्रिक बदलावों को नवीकरण और पुनरूत्थान के कारकों के रूप में देखा है।’’ उन्होंने कहा कि एक दूसरे के राजनीतिक मूल्यों में भरोसा और एक दूसरे की समृद्धि में मजबूत भरोसा दोनों देशों के बीच वृह्द साझेदारी का वाहक बना है। मोदी ने कहा, ‘‘हमारी साझेदारी में एक नया आयाम जुड़ा है और वह आयाम वैश्विक भलाई के लिए है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ जब भी भारत और अमेरिका मिल कर काम करते हैं जो विश्व को उससे फायदा मिलता है।’’डेंगू के लिए सस्ता टीका विकसित करने जैसे क्षेत्रों में साझा प्रयासों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि साइबर स्पेस के लिए स्थापित नियम, मानवीय सहायता उपलब्ध कराना, भारत-प्रशांत क्षेत्र में आपदा राहत तथा अफ्रीका में शांतिरक्षकों का प्रशिक्षण इसी से जुड़े पहलू हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ हमारी कूटनीतिक भागीदारी का तर्क अकाट्य है।’’ उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि रक्षा क्षेत्र साझा लाभ सहयोग का क्षेत्र रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के समाज और पूरे विश्व को आतंकवाद, कट्टरपंथी विचारधारा और गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से बचाने में भारत और अमेरिका, दोनों के साझा हित हैं । प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत जिसका आतंकवाद से लड़ने में चार दशकों का अनुभव है, वह इस कलंक को परास्त करने में ट्रंप प्रशासन के मजबूत इरादों को साझा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ हम हमारे दोनों राष्ट्र- अफगानिस्तान, पश्चिम एशिया, भारत-प्रशांत नौवहन क्षेत्र तथा साइबर स्पेस में नयी और अनुमानित चुनौतियों के समाधान के लिए पहले से ही मिलकर काम कर रहे हैं।’’ दक्षिण चीन सागर में चीन द्वारा अपनी दादागिरी दिखाए जाने का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘कारोबार और ऊर्जा की महत्वपूर्ण जीवनरेखा माने जाने वाले समुद्री रास्तों को सभी के लिए सुरक्षित और खुला सुनिश्चित करने में भी हमारे साझा हित हैं ।’’

चीन कहता है कि करीब करीब पूरा दक्षिण चीन सागर उसके अधिकार क्षेत्र में आता है जबकि ब्रुनेई, मलेशिया, फिलिपींस , ताइवान और वियतनाम जैसे देश चीन के दावे पर प्रति दावा करते हैं। चीन ने अपने दावे को मजबूती प्रदान करने के लिए इस क्षेत्र में कई कृत्रिम द्वीप बना लिए हैं जहां सैन्य क्षमता की हवाई पट्टियां और विमान भेदी उपकरण भी तैनात हैं। दक्षिण चीन सागर सामरिक दृष्टि के साथ ही ऊर्जा भंडारों, मत्स्य संसाधनों से भरपूर होने के साथ ही व्यस्त जहाजरानी मार्ग है। मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच कारोबार पहले ही सालाना 115 अरब डालर तक पहुंच चुका है और यह कई गुणा बढ़ने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी एक ही झटके में भारत को 1.3 अरब लोगों के एकीकृत बाजार में बदल देगा।

मोदी ने कहा कि 100 स्मार्ट शहरों की योजना, बंदरगाहों, हवाईअड्डों और रेल तथा सड़क नेटवर्क का आधुनिकीकरण तथा वर्ष 2020 तक सभी के लिए सस्ते घरों का निर्माण केवल भारत के भीतर वृह्द शहरी नवीकरण का वादा मात्र नहीं है बल्कि इससे दोनों देशों के समाजों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती विमानन जरूरतें और गैस, परमाणु , स्वच्छ कोयला तथा नवीकरणीय ऊर्जा की जरूरतें ऐसे दो प्रमुख क्षेत्र हैं जिनमें साझेदारी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले सालों में भारतीय कंपनियां अमेरिका से 40 अरब डालर से अधिक ऊर्जा का आयात करेंगी और 200 से अधिक अमेरिका निर्मित विमान भारत के निजी विमानन बेड़े में शामिल होंगे।

मोदी ने साथ ही कहा कि 30 लाख की आबादी वाले मजबूत भारतीय अमेरिकी समुदाय ने दोनों समाजों को जोड़ने और एक दूसरे के समाज में योगदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है और ये वो लोग हैं जो दोनों समाज के प्रतिभाशाली वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। मोदी ने कहा कि भारत . अमेरिकी साझेदारी ‘‘हमारे लोगों तथा हमारी दुनिया के लिए हमारा विशेषाधिकार बन चुकी है।’’

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  1. A
    Abhimanyou
    Jun 27, 2017 at 5:22 am
    Once I read somewhere that India has more than 1300 islands outside the mainland, then I read total number of our islands is 950, and that the farthest island is 1000 miles away from the mainland. I wonder weather our govt. is taking care of its territories and our citizens living there? Instead of criticizing China we should try to control protect over territories, develope them.
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