June 24, 2017

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मुखर्जी ने भारत नेपाल संबंध में मतभेदों को तवज्जो नहीं दिया

नेपाल के मधेसी समुदाय का भारतीयों के साथ रोटी बेटी का संबंध है। एक प्रमुख मधेसी नेता महेन्द्र प्रसाद यादव ने इस मुद्दे पर पीटीआई से कहा, ‘‘संसद में प्रतिनिधित्व आनुपातिक होना चाहिए।’

Author पोखरा | November 4, 2016 22:53 pm

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज भारत…नेपाल संबंधों को एक ‘परिवार’ जैसा बताया, जिसमें कभी…कभी मतभेद उभरते हैं लेकिन यह भी कहा कि बातचीत के जरिए उन्हें दूर करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने नये संविधान को लेकर उपजे राजनीतिक संकट का जिक्र करते हुए यह कहा, जिसके चलते द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। पिछले 18 साल में नेपाल की यात्रा कोेरने वाले प्रथम भारतीय राष्ट्रपति ने अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा बहुत सफल बतायी। यह यात्रा आज संपन्न हो गई। अपनी यात्रा के दौरान मुखर्जी ने अपनी नेपाली समकक्ष विद्या देवी भंडारी, उपराष्ट्रपति नंद बहादुर पुन, प्रधानमंत्री प्रचंड और देश के समूचे राजनीतिक नेतृत्व तथा सिविल सोसाइटी के सदस्यों के साथ सार्थक बैठकें की। यात्रा के दौरान मुखर्जी ने मधेसी आंदोलन के प्रमुख केंद्र रहे जनकपुर गए और गोरखा रेजीमेंट के पूर्व सैनिकों से पोखरा में मुलाकात की। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं कहना चाहूंगा कि मेरी नेपाल की बहुत सफल यात्रा रही। मैं यहां परसो (बुधवार को) आया था और तब से मैं नेपाल के लोगों और सरकार के आतिथ्य सत्कार से अभिभूत हूं। बेशक, नेपाल मेरे लिए अनजान देश नहीं है। मुझे कई बार नेपाल आने का विशेषाधिकार मिला है।’

 

भारत नेपाल संबंधों में कभी कभी उतार चढ़ाव आने और दोनों देशों के बीच संबंधों में फिर से गर्माहट आने के बारे में पूछे जाने पर राष्ट्रपति ने एक परिवार का उदाहरण दिया जिसमें कभी कभी मतभेद उभर जाया करते हैं। हमेशा ही हम मतभेदों को दूर करने और बातचीत तथा समझदारी से उन्हें हल करने की कोशिश करते हैं। जैसा कि हम परिवार के मामले में करते हैं, व्यापक परिप्रेक्ष्य में भारत…नेपाल संबंध भी उसी तरह के हैं। बीती रात मधेसी नेताओं के साथ उनकी बातचीत होने के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने उनसे एकजुट होकर काम करने को कहा। ‘‘आखिरकार संविधान एक मूल दस्तावेज है और इसका मसौदा व्यापक आमराय पर बनाया जाना चाहिए ताकि यह सभी तबके की समस्याओं का हल कर सके और संविधान का मसौदा तैयार करने में व्यापक आमराय होनी चाहिए।’’

नेपाल के मधेसी समुदाय का भारतीयों के साथ रोटी बेटी का संबंध है। एक प्रमुख मधेसी नेता महेन्द्र प्रसाद यादव ने इस मुद्दे पर पीटीआई से कहा, ‘‘संसद में प्रतिनिधित्व आनुपातिक होना चाहिए।’ खुली सीमा पर मुखर्जी ने कहा कि इससे भारी फायदा उठाया गया है और इसने एक सीमा रहित क्षेत्र बनाया है। हालांकि उन्होंने कहा कि इसका उन लोगों ने दुरूपयोग किया है जो दोनों देशों के मित्र नहीं हैं। दोनों देश इस बात से वाकिफ हैं और वे सीमा प्रबंधन को प्रभावी और उपयुक्त बनाने के लिए काम करेंगे। बाद में उन्होंने एक बयान में कहा कि भारत शांति एवं स्थिरता की नेपाल की कोशिश का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपनी यात्रा को ‘दोस्ती का मिशन’ बताया, जो अनोखे द्विपक्षीय संबंध को और मजबूत करने से जुड़ी वरीयता को जाहिर करता है। मुखर्जी ने अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा की समाप्ति के बाद कहा कि दो संप्रभु राष्ट्र होने के नाते हम अपने संबंधों को विश्वास, सदभावना और परस्पर फायदे के आधार पर आगे बढ़ाने की इच्छा जाहिर करते हैं। मैंने एक संघीय लोकतांत्रिक राजनीति के दायरे में शांति, स्थिरता और विकास हासिल करने में नेपाल के लोगों को भारत के लोगों और सरकार की ओर से शुभकामनाओं से अवगत कराया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा भविष्य एक दूसरे से जुड़ा हुआ है और साझा समृद्धि को बढ़ाने की जरूरत को दोनों देशों ने मान्यता दी है।’ उन्होंने कहा कि भारत शांति, स्थिरता और विकास की कोशिश में नेपाल का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि अब जारी द्विपक्षीय विकास एवं संपर्क परियोजनाओं तथा भूकंप बाद के पुनर्निर्माण के लिए परियोजनाओं को लागू करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस बात से अवगत कराया है कि भारत नेपाल की जनता और सरकार के लिए वरीयता के सभी क्षेत्रों में अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।’ बयान के मुताबिक मुखर्जी ने राष्ट्रपति भंडारी को भारत आने का न्योता दिया। उन्होंने खुशी खुशी यह न्योता स्वीकार कर लिया।

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First Published on November 4, 2016 10:52 pm

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