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हिंद महासागर में पीएलए (चीन की सेना) की पनडुब्बियों का आवागमन जायज: चीन

चीन ने कहा कि उसने विवादास्पद दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना के पोतों की मौजूदगी का कभी विरोध नहीं किया
Author बीजिंग | July 7, 2016 21:36 pm
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की अरुणाचल प्रदेश के दौरे से चीन परेशान है।

चीन ने हिंद महासागर में अपनी पनडुब्बियों के आवागमन का बचाव करते हुए गुरुवार (7 जुलाई) को उसे ‘वैध’ और ‘अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं’ के अनुरूप बताया और कहा कि उसने विवादास्पद दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना के पोतों की मौजूदगी का कभी विरोध नहीं किया जब तक कि उन्होंने नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों का पालन किया। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता यांग यूजुन ने यहां मीडिया से कहा, ‘पनडुब्बियों की बात करें तो चीन की पनडुब्बियां कुछ सागर क्षेत्र को पार करती हैं और उक्त पारगमन वैध हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं का पालन करते हैं।’

प्रवक्ता ने यह बात चीन की पनडुब्बियों के हिंद महासागर में आवागमन के बारे में पूछे जाने पर कही जिससे भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बियों का आवागमन वैध है तो चीन भारतीय नौसेना के पोतों की मौजूदगी को ‘गलत’ क्यों मानता है, यांग ने कहा कि चीन ने कभी भी ऐसा रुख नहीं अपनाया है।

उन्होंने कहा, ‘मैं एक बात कहना चाहूंगा। आपने कहा कि जब भारतीय पोत दक्षिण चीन सागर में प्रवेश करते हैं, (हम कह रहे हैं) यह गलत है। आपने यह कहां सुना। मैं रक्षा मंत्रालय से हूं और मैंने कभी ऐसी बात नहीं कही।’ उन्होंने कहा, ‘यदि वह अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की स्वतंत्रता के अनुरूप किया जाता है, वह वैध होना चाहिए। ऐसे आवागमन किसी देश के देश से संबंधों और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए मददगार होने चाहिए। उन सभी आवागमनों का स्वागत होना चाहिए।’

चीन दक्षिण चीन सागर के अधिकतर हिस्सों पर दावा करता हैं जिससे फिलीपिन, वियतनाम, मलेशिया, ब्रूनेई और ताईवान असहमति जताते हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक न्यायाधिकरण को फिलीपिन की उस अर्जी पर 12 जुलाई को फैसला सुनाना है जिसमें उसने चीन के दावों को चुनौती दी है। इसकी सुनवायी का बहिष्कार करने वाले चीन ने कहा कि वह फैसले का सम्मान नहीं करेगा।

दक्षिण चीन सागर पर अपने दावे पर जोर देते हुए चीन कहता रहा है कि उसने नौवहन की स्वतंत्रता को कभी भी बाधित नहीं किया जिस पर भारत, अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय जोर देते रहे हैं क्योंकि यह व्यस्ततम वाणिज्यिक नौपरिवहन मार्ग है। यद्यपि साथ ही चीन ने क्षेत्र, विशेष तौर पर उसके द्वारा निर्मित कृत्रिम द्वीपों के नजदीक जलक्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के पोतों पर जोरदार आपत्ति जतायी है।

दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी नौसेना के पोतों की तैनाती पर यांग ने कहा कि कुछ बाहरी क्षेत्र के देश अपने स्वयं के हितों के ‘विभिन्न बहाने’ और उकसावे एवं क्लेश उत्पन्न करने के एक प्रयास के तहत दक्षिण चीन सागर में आए। उन्होंने कहा, ‘इससे क्षेत्र की शांति एवं स्थिरता को खतरा उत्पन्न हुआ है। चीन उसने डरता नहीं।’ उन्होंने कहा कि चीन की सेना को ‘खतरों का भय नहीं।’

उन्होंने कहा, ‘सैन्य बेड़े का दक्षिण चीन सागर में आने का क्या उद्देश्य है? क्या उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण है? क्या वे मैत्रीय यात्रा के लिए आ रहे हैं? या बंदरगाह पर रूकने के लिए? उनका स्वागत है, लेकिन यदि वे परेशानी उत्पन्न करने के लिए आ रहे हैं हमारे पास जवाबी उपाय हैं।’ इस वर्ष मई में भारतीय नौसेना के चार पोत दक्षिण चीन सागर और उत्तर पश्चिम प्रशांत में ढाई महीने के परिचालन तैनाती के लिए रवाना हुए। भारतीय नौसेना के पोतों ने हाल में जापान और अमेरिकी नौसेना के पोतों के साथ पश्चिम प्रशांत में हुए मालाबार अभ्यास में हिस्सा लिया था।

चीन ने यद्यपि वियतनाम के निमंत्रण पर भारत के तेल की खोज में हिस्सा लेने पर यह कहते हुए आपत्ति जतायी कि यह विवादित क्षेत्र है। हाल के वर्षों में चीन अदन की खाड़ी और सोमाली तट में जलदस्यु विरोधी अभियानों में हिस्सा लेने के लिए पनडुब्बियों को नौसेना अनुरक्षण अभियान में तैनात किया है। इस बारे में कई सवाल उठे कि चीन को ऐसे अभियानों में पनडुब्बियां क्यों तैनात करनी पड़ीं। यांग ने कहा कि भारत और चीन हिंद महासागर क्षेत्र में साथ मिलकर अच्छा काम कर रहे हैं। यह इससे प्रत्यक्ष होता है कि दोनों देशों ने अदन की खाड़ी में जलदस्यु विरोधी अभियान में नजदीकी रूप से समन्वय किया है।

उन्होंने कहा, ‘2008 के बाद से चीन की नौसेना ने अदन की खाड़ी और सोमालिया में अनुरक्षण अभियान के लिए 23 से अधिक बेड़े भेजे हैं और छह हजार से अधिक सेवाएं मुहैया करायी हैं। हमने भारतीय नौसेना के साथ अच्छा समन्वय किया है।’ ‘इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ऑफ द मिनिस्ट्री आफ नेशनल डिफेंस’ के महानिदेशक यांग ने भारत..चीन संबंधों पर कहा, ‘हमारे नेताओं के प्रयासों को धन्यवाद कि हमारे द्विपक्षीय संबंध बहुत तेजी से विकसित हो रहे हैं और हमारी दोनों सेनाओं के बीच उच्च स्तरीय रणनीतिक संवाद है।’

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