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लोकतांत्रिक सरकारों ने उम्मीदें पूरी नहीं कीं: पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ

सेना ने पाकिस्तान के शासन में बहुत अहम भूमिका निभाई है। इसका मुख्य कारण तथाकथित लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारों का कुशासन रहा है।
Author वाशिंगटन | October 2, 2016 05:52 am
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल (सेवानिवृत्त) परवेज मुशर्रफ। (एपी फाइल फोटो)

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने कहा कि सेना ने पाकिस्तान के शासन में अक्सर अहम भूमिका निभाई है, क्योंकि लोकतंत्र को इसके माहौल के अनुसार नहीं ढाला गया है। मुशर्रफ ने गुरुवार को ‘वाशिंगटन आइडियाज फोरम’ में एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि हमारी आजादी के बाद से सेना की हमेशा भूमिका रही है। सेना ने पाकिस्तान के शासन में बहुत अहम भूमिका निभाई है। इसका मुख्य कारण तथाकथित लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारों का कुशासन रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मूल कमजोरी यह रही है कि इस देश में माहौल के अनुसार लोकतंत्र को नहीं ढाला गया।

मुशर्रफ ने देश में बार-बार हुए सैन्य तख्तापलट को सही बताते हुए कहा कि इसलिए सेना को राजनीतिक माहौल में जबरन घुसाया, खींचा जाता है, खासकर तब जब कुशासन जारी है और पाकिस्तान सामाजिक-आर्थिक रूप से नीचे की ओर जा रहा है। लोग और जनता सैन्य प्रमुख की ओर भागती है और इस तरह सेना संलिप्त हो जाती है। इस वजह से पाकिस्तान में सैन्य सरकारें रही हैं और सेना का कद ऊंचा है। मुशर्रफ ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि पाकिस्तान के लोग सेना को प्यार करते हैं और उससे बहुत उम्मीदें रखते हैं। इसलिए मुझे इस बात पर गर्व है कि सेना ने मुझे समर्थन दिया है, क्योंकि मैं 40 साल तक उसके साथ रहा हूं। मैंने उनके साथ युद्ध लड़े। मैंने दो युद्ध लड़े और मैं कई कार्रवाइयों में उनके साथ रहा। इसलिए मुझे पता है कि उन लोगों ने ही मुझे चुना है। इसलिए हमें पाकिस्तान जो कहता है, उसके हिसाब से राजनीतिक संरचना को ढालना होगा, नियंत्रण व संतुलन लागू करना होगा, ताकि कुशासन नहीं हो सके और सेना को राजनीति में न आना पड़े।

मुशर्रफ ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अपनी सुविधानुसार उनके देश का इस्तेमाल किया और उसे धोखा दिया। वह अपने देश वापस लौटने की योजना बना रहे हैं, मुझे पता है कि यह मुकदमा पूरी तरह से राजनीतिक है। लेकिन मुझे इसका सामना करना होगा। और जैसा कि वह कहते हैं कि इसमें कोई खतरा या फायदा नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान की सरकार ठीक से काम करती है तो वह वापस नहीं जाएंगे। वास्तव में मुझे वापस जाने और फिर से शासन करने की कोई महत्त्वाकांक्षा नहीं है। मैं केवल यह चाहता हूं कि लोग पाकिस्तान को ठीक से चलाएं, क्योंकि पाकिस्तान मेरा जुनून है। हालांकि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी वापसी के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। मुशर्रफ ने कहा कि मुझे लगता है कि मैं मूर्ख नहीं हूं। इसलिए मैं वहां सही माहौल देखना चाहता हूं, जिसमें राजनीतिक परिवर्तन के लिए तीसरी राजनीतिक शक्ति की संभावना हो। मैं मामलों को उस स्तर पर देखना चाहता हूं, जहां मेरी गतिविधियां प्रतिबंधित नहीं हों, भले ही मेरे ऊपर मामले चलते रहें। उन्होंने तर्क दिया, मैं चाहता हूं कि मेरी गतिविधियां प्रतिबंधित नहीं की जाएं, क्योंकि मुझे अहसास है कि मैं जन-समर्थन जुटाने में सक्षम रहूंगा, क्योंकि मुझे राजनीतिक तौर पर तीसरा मोर्चा बनाने की जरूरत है। उन्होंने दावे के साथ कहा कि उन्हें उसामा बिन लादेन की पाकिस्तान में मौजूदगी का पता नहीं था। उन्होंने उस स्थान को महल कहे जाने पर भी आपत्ति जाहिर की जहां उसामा छिपा हुआ था।

उसामा जिस मकान में छिपा था, उसके बाहर एक दीवार बनाए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान के उस इलाके के लिए ‘बहुत सामान्य’ बात है, इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। उन्हें इस बात में भी संदेह है कि लादेन वास्तव में पांच साल तक एबटाबाद वाले मकान में रहा होगा। हो सकता है वह वहां आता-जाता रहा हो। मुझे अभी भी ऐसा ही लगता है और यदि वह वहां रहता था, तो जैसा कि मैंने एक सभा में कहा था कि एक व्यक्ति अगर पांच साल तक अपनी तीन पत्नियों और 18 बच्चों के साथ एक ही कमरे में रह रहा था, तो मुझे लगता है कि उसने सीआइए को भी खुद ही फोन कर बताया होगा कि वह वहां रह रहा है। इस पर उपस्थित जन समुदाय ने जोरदार ठहाके लगाए थे।

 

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