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तनाव के बीच अमेरिका ने भारत-चीन से की अपील, कहा- बिना जोर-जबरदस्‍ती के सामने आकर बात करें

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इस महीने के अंत में ब्रिक्स की बैठक में भाग लेने के लिए बीजिंग जाएंगे।
Author July 22, 2017 16:03 pm
वॉशिंगटन में अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन का एरियल व्यू। (AP Photo/Charles Dharapak, File)

पेंटागन ने भारत एवं चीन से सीधी वार्ता करने की अपील की है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता गैरी रोस ने कहा, ‘‘हम भारत एवं चीन को तनाव घटाने की खातिर प्रत्यक्ष वार्ता करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं जिसमें किसी प्रकार की जोर जबरदस्ती नहीं हो।’’ अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने भी पिछले सप्ताह इसी प्रकार के बयान दिए थे। पेंटागन ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब पिछले कुछ वर्षों में चीन के लगभग सभी पड़ोसी बीजिंग पर सीमा विवादों के समाधान के लिए बल प्रयोग करने की रणनीति अपनाने का आरोप लगा रहे हैं। सिक्किम सेक्टर में महीने भर से चल रहे भारत-चीन सीमा गतिरोध को यथास्थिति बदलने के लिए चीन की बल प्रयोग करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। भारत ने चीन के ऐसे कदम के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इस महीने के अंत में ब्रिक्स की बैठक में भाग लेने के लिए बीजिंग जाएंगे। इस यात्रा के दौरान डोभाल इस मामले पर चीनी समकक्ष के साथ संभवत: वार्ता करेंगे। पेंटागन ने इस मामले में किसी का पक्ष लेने से इनकार कर दिया।

यह पूछे जाने पर कि क्या पेंटागन भारत एवं चीन के बीच तनाव बढ़ने को लेकर चिंतित है, रोस ने कहा, ‘‘हम इस संबंध में और सूचना लेने के लिए आपसे भारत एवं चीन की सरकारों से बात करने को कहेंगे। हम भारत एवं चीन को तनाव कम घटाने की खातिर प्रत्यक्ष वार्ता करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। हम इन मामलों पर किसी प्रकार की अटकलें नहीं लगाएंगे।’’

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा संचालित अखबार ग्लोबल टाइम्स में कहा गया है कि चीन के साथ भारतीय सेना की तुलना हास्यास्पद है। यदि युद्ध होता है तो भारत तबाह हो जाएगा। अखबार ने कहा कि चीनी सेना द्वारा तिब्बत में युद्धाभ्यास और क्षेत्र में भारी सैन्य आपूर्ति करना दिखावे के लिए नहीं है। सुषमा का जिक्र करते हुए लेख में कहा गया है, “वह संसद में झूठ बोल रही थीं।”

लेख में कहा गया है, “पहला सच्चाई यह है कि भारत ने चीनी क्षेत्र में घुसपैठ की है। भारत की अविवेकपूर्ण कार्रवाई से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय सन्न है। कोई अन्य देश भारत की आक्रामता का समर्थन नहीं करेगा।” लेख में कहा गया है, “दूसरी बात भारत की सैन्य मजबूती चीन से बहुत पीछे है। यदि भारत और चीन के बीच संघर्ष तेज होता है तो इस विवाद को सेना के जरिए सुलझाया जाएगा, और भारत की हरहाल में हार होगी।”

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