January 22, 2017

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बान की मून ने कहा, 4 नवंबर को प्रभाव में आएगा पेरिस जलवायु समझौता

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के 195 पक्षों ने पेरिस में पिछले साल दिसंबर में सीओपी21 सम्मेलन के दौरान इसे पारित किया था।

Author संयुक्त राष्ट्र | October 6, 2016 13:24 pm
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून। (पीटीआई फाइल फोटो)

संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख बान की मून ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता चार नवंबर को प्रभाव में आएगा। इस समझौते को लागू करने के लिए 55 प्रतिशत वैश्विक ग्रीनहाउस उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार कम से कम 55 देशों के हस्ताक्षर आवश्यक थे और यह आंकड़ा पार करने के साथ ही इस समझौते को लागू किए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया। कुल 72 देशों ने इस समझौते का अनुमोदन किया है जो 56 प्रतिशत वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। पूर्वशर्त पूरी होने के बाद महासचिव ने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण क्षण है।’

उन्होंने कहा, ‘पेरिस समझौते को वर्ष 2016 में लागू किए जाने संबंधी वैश्विक गति उल्लेखनीय रही है। जो एक समय असंभव सा लग रहा है, उसे अब कोई नहीं रोक सकता। लागू किए जा रहे पेरिस समझौते के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय समर्थन इस दिशा में कार्रवाई किए जाने की जरूरत का प्रमाण है और यह इस बात को लेकर सरकारों की आम सहमति को दर्शाता है कि जलवायु परिवर्तन संबंधी चुनौती से निपटने के लिए राष्ट्रीय कार्य पर आधारित मजबूत वैश्विक सहयोग आवश्यक है।’

विश्व में ग्रीनहाउस गैसों के तीसरे सबसे बड़े उत्सर्जक देश भारत ने गांधी जयंती के अवसर पर दो अक्तूबर को पेरिस जलवायु समझौते का अनुमोदन किया। इसके साथ ही वह जलवायु परिवर्तन पर अनुमोदन संबंधी अपना दस्तावेज जमा कराने वाला 62वां देश बन गया और इस समझौते को प्रभावी होने के बेहद निकट ले आया। बान ने पेरिस समझौते का अनुमोदन और इसे औपचारिक रूप से स्वीकार करने को लेकर भारत को ‘हार्दिक’ बधाई दी थी और कहा था कि भारत के नेतृत्व ने इस ऐतिहासिक समझौते को इस वर्ष लागू करने के लिए आवश्यक 55 प्रतिशत की सीमा के निकट ले जाने में अहम कदम उठाया।

भारत विश्व के 4.1 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है और भारत के अनुमोदन के बाद इसे लागू करने के लिए आवश्यक 55 प्रतिशत उत्सर्जन का आंकड़ा छूने के लिए तीन प्रतिशत अंकों से कुछ ही अधिक की आवश्यकता थी। ऑस्ट्रिया, बोलीविया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, हंगरी, माल्टा, नेपाल, पुर्तगाल और स्लोवाकिया के साथ साथ यूरोपीय संघ ने महासचिव को बुधवार (5 अक्टूबर) को अपने अनुमोदन संबंधी दस्तावेज सौंप दिए जिसके बाद इसे लागू किए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया। यह समझौता अब नवंबर में मोरक्को में होने वाले जलवायु सम्मेलन (सीओपी 22) से पहले लागू हो जाएगा। इस सम्मेलन में समझौते के पक्षों की पहली बैठक होगी। अभी तक अनुमोदन नहीं करने वाले देश पर्यवेक्षकों के रूप में शामिल हो सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने चेताया कि समझौता लागू किए जाने का काम अभी बाकी है। उन्होंने कहा, ‘अब हमें शब्दों को हकीकत में बदलना है और पेरिस समझौते को क्रियान्वित करना है। हमें सभी के समर्थन की आवश्यकता है। उत्सर्जन कम करने के लिए समाज के हर हिस्से को संगठित करने और समुदायों को अपरिहार्य जलवायु प्रभावों के अनुकूल ढलने में मदद करने की आवश्यकता है।’ मून ने कहा, ‘मैं सभी सरकारों और समाज के सभी हिस्सों से अपील करता हूं कि वे पेरिस समझौता पूरी तरह लागू करें और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने, पारिस्थितिकीय रूप से जलवायु प्रणाली को बेहतर बनाने और कमजोर देशों को अपरिहार्य जलवायु प्रभावों के अनुकूल ढलने में मदद करने के लिए तत्काल कदम उठाएं।’

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के 195 पक्षों ने पेरिस में पिछले साल दिसंबर में सीओपी21 सम्मेलन के दौरान इसे पारित किया था। इस समझौते में देशों से जलवायु परिवर्तन से निपटने और स्थायी कम कार्बन उत्सर्जन वाले भविष्य के लिए आवश्यक निवेश एवं कार्यों में तेजी लाने के साथ साथ जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के अनुसार खुद को ढालने की अपील की गई है। समझौते में तापमान में वैश्विक वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस से कम तक सीमित करने और 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा का लक्ष्य हासिल करने की बात की गई है। इस समझौते पर अप्रैल को 175 देशों ने न्यूयार्क में हस्ताक्षर किए थे।

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First Published on October 6, 2016 1:24 pm

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