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पेरिस हमला: फ्रांस में हथियार रखना मना है, फिर आतंकी AK-47 कहां से लाए?, जानिए इस Inside Story में

चश्‍मदीदों ने बताया कि उनके पास Kalashnikov जैसा हथियार था। इसी ऑटोमेटिक राइफल से आतंकियों ने थिएटर में 87 लोगों का कत्‍लेआम कर दिया।
आतंकी हमले के दौरान नागरिकों को सुरक्षित स्‍थान पर पहुंचाती पुलिस।

फ्रांस की राजधानी पेरिस में शुक्रवार रात हुए हमले में आतंकियों के पास सुसाइड जैकेट और एके-47 राइफल होने की बात सामने आई है। कई चश्‍मदीदों ने बताया कि उनके पास Kalashnikov जैसा हथियार था। इसी ऑटोमेटिक राइफल से आतंकियों ने थिएटर में 87 लोगों का कत्‍लेआम कर दिया। इसके अलावा उन्‍होंने दो रेस्‍टोरेंट्स और पेरिस के अलग-अलग स्‍थानों पर फायरिंग कर 40 निर्दोष लोगों को भी मौत के घाट उतार दिया। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब फ्रांस में हर प्रकार की गन पर बैन है, तो आतंकियों के पास इतने आधुनिक हथियार कहां से आए और इन्‍हें हासिल करने में उनकी मदद किसने की? इस बात में रत्‍तीभर भी शक नहीं कि फ्रांस में लीगली कोई AK-47 हासिल कर सकता है, फिर राइफल आई कहां से? तो इसका जवाब है- पूर्वी यूरोप, जहां खतरनाक हथियारों की तस्‍करी आम बात है। पूर्वी यूरोप में अवैध हथियारों का काला कारोबार इस हद तक बढ़ चुका है कि लोकल अथॉरिटी चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही हैं। फ्रांस के साथ यूरोपियन यूनियन भी इस सचाई से अच्‍छी तरह वाकिफ है, लेकिन ये दोनों कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, फ्रेंच पुलिस ने 2009 में 1,500 अवैध हथियार जब्‍त किए थे। 2010 में यह आंकड़ा 2,700 तक पहुंच गया और वक्‍त के साथ बढ़ता जा रहा है। अक्‍टूबर 2014 में फ्रेंच पुलिस ने कई घरों पर छापे मारकर इंटरनेट के सहारे चल रहे तस्‍करी के नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश की थी। उस वक्‍त 48 संदिग्‍ध तस्‍कर गिरफ्तार किए गए थे, जिनके पास से सैकड़ों अवैध बंदूकें बरामद की गई थीं। इसी रेड के 3 महीने बाद 7 जनवरी 2015 को आतंकियों ने ‘शार्ली एब्‍दो’ के दफ्तर हमला कर दिया था। उस वक्‍त भी फ्रांस की सड़कों पर AK-47 लहराई गई थी। ‘शार्ली एब्‍दो’ पर हुए हमले में 12 लोगों की मौत हो गई थी।

अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप में Kalashnikov जैसी राइफल और रॉकेट लॉन्‍चर 300 से 700 यूरो (25,000 से 50,000 रुपये) में आसानी से मिल जाते हैं। पूर्वी यूरोप में बिकने वाले अधिकतर हथियार मेड इन रशिया हैं और वाया बाल्‍कन लाए जाते हैं। फ्रांस भी उन देशों में एक है, जहां अवैध हथियारों की सप्‍लाई की जा रही है। ये हथियार रूसी फर्मों के द्वारा बनाए गए थे। स्विट्जरलैंड के संगठन ‘स्‍मॉल आर्म्‍स सर्वे’ की मानें तो 1990 में बोस्निया, कोसोवो तथा सर्बिया के बीच जब विवाद चल रहा था, तब रशियन फर्मों ने इस क्षेत्र में करीब 60 लाख हथियारों की सप्‍लाई की थी। इन देशों में विवाद तो शांत हो गया, लेकिन लाखों हथियारों का क्‍या होगा? जाहिर है, ब्‍लैक मार्केट में बेचा जाएगा और ऐसा ही हो रहा है। फ्रांस में अवैध हथियारों की बड़ी खेप आ रही हैं, जिन्‍हें हासिल करना आतंकियों के लिए मुश्किल काम नहीं है। शुक्रवार रात आतंकियों ने इन्‍हीं अवैध हथियारों से खून की होली खेली, एक ऐसे देश में जहां अमेरिका की तरह गन कल्‍चर नहीं है, बल्कि गन बैन लगा हुआ है।

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