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पाकिस्तानी परिवार को बच्ची के इलाज के लिए अमेरिकी वीजा का इंतज़ार

मारिया आनुवांशिक बीमारी से पीड़ित है और इसके कारण उसके नाजुक शरीर में दर्द रहता है और उसका विकास अवरुद्ध हो गया है।
Author कोलंबो | October 21, 2016 14:35 pm
महज छह साल की मारिया (बीच में) एक दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी से पीड़ित है। (एपी फोटो)

पाकिस्तान का एक परिवार अपनी बच्ची मारिया के इलाज के लिए बैचैनी के साथ अमेरिकी वीजा मिलने का इंतजार कर रहा है। महज छह साल की मारिया एक दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी से पीड़ित है और इसके कारण उसके नाजुक शरीर में दर्द रहता है और उसका विकास अवरुद्ध हो गया है। कुछ ही समय में वह चलने फिरने से भी लाचार हो जाएगी क्योंकि यह बीमारी उसकी रीढ़ की हड्डी को प्रभावित कर रही है। मारिया के पिता शाहिदुल्ला ने रावलपिंडी से फोन पर बताया कि अमेरिका के एक अस्पताल ने मारिया के मुफ्त इलाज का प्रस्ताव दिया है, जिससे उसके जीवन की गुणवत्ता सुधर सकती है। लेकिन इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने दो बार उसके परिवार को अमेरिकी वीजा देने से इंकार कर दिया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने जब फिर से वीजा का आवेदन किया, तो उनसे कहा गया कि ‘इसमें समय लगेगा।’

निराश और डरे हुए पिता ने अब अमेरिकी वकील और मीडिया से मदद मांगी है। इसके साथ ही उन्होंने फेसबुक पर भी मदद की गुहार लगाते हुए पूरा एक अभियान शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि बेटी को बचाने का यही अंतिम तरीका है। अमेरिकी में दो नवंबर 2016 को लड़की के इलाज किया जाना है। वह हर संभव व्यक्ति के सामने गुहार लगा रहे हैं कि मारिया का मामला अलग है। रावलपिंडी में कंबलों की छोटी सी दुकान चलाने वाले शाहिद ने कहा, ‘यदि मारिया के इलाज में देरी होती है, तो बहुत सी समस्याएं पैदा हो जाएंगी।’ उन्होंने कहा कि ऑपरेशन से पहले के परीक्षणों के लिए मारिया का अगले बुधवार को अमेरिका में होना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि मारिया के लिए मदद जुटाने के लिए उन्होंने करीब चार साल पहले बेहद कठिन खोज-बीन चालू की थी। इसमें मारिया की स्थिति के बारे में अध्ययन करना, भारत और जर्मनी की प्रयोगशालाओं में उसके रक्त और मूत्र के नमूने भेजना, इसी प्रकार की बीमारी से ग्रस्त बच्चों के परिवारों से संपर्क करना शामिल था। इस बीमारी को मोरक्यूओ सिंड्रोम कहते हैं। इंटरनेट की मदद से उन्होंने मारिया की बीमारी के विशेषज्ञ डाक्टरों और ऐसी बीमारी से पीड़ित बच्चों के परिवारों को खोज निकाला। ये लोग चिली, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे सुदूर देशों के थे। इसी क्रम में उन्हें डेलावरे के विलमिंग्टन स्थित नेमोरस:अल्फ्रेड आई डुपोंट हॉस्पिटल फॉर चिल्ड्रेन के बारे में पता चला।

शाहिद ने बताया कि इस बार उन्होंने केवल मारिया, अपने और अपनी पत्नी के वीजा का आवेदन ही किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका जाने के दौरान वह अपने दो बच्चों को अपने रिश्तेदारों के पास छोड़ जाएंगे। हालांकि अमेरिकी दूतावास की प्रवक्ता फ्लेउर एस कोवान ने इसके बारे में कोई प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। उन्होंने निजता के कानूनों का हवाला दिया, लेकिन कहा कि वह इस मामले को देखेंगी। वॉशिंगटन में विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिकी कानून के तहत वीजा रिकॉर्ड गोपनीय रखा जाता है और वह किसी विशेष वीजा के मामले में टिप्पणी नहीं कर सकता।

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