March 25, 2017

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अमेरिका में पाक का शीर्षासन : धमकियों व शिकायतों के बाद मिन्नतें

मेरिका पहुंचे नवाज शरीफ के विशेष दूत मुशाहिद हुसैन सैयद व एक अन्य दूत शजरा मंसब का पांच दिवसीय दौरा खतम हो गया है।

Author वाशिंगटन | October 9, 2016 03:20 am
अमेरिका ने पाकिस्तान को दिया अल्टीमेटम (फोटो: रॉयटर्स)

उड़ी सैन्य शिविर पर आतंकी हमले और इसके जवाब में भारत की पाकिस्तान स्थित जिहादी शिविरों पर लक्षित हमले के बाद दोनों देशों में जारी तनाव के बीच कश्मीर पर अपना पक्ष रखने अमेरिका पहुंचे नवाज शरीफ के विशेष दूत मुशाहिद हुसैन सैयद व एक अन्य दूत शजरा मंसब का पांच दिवसीय दौरा खतम हो गया है।  इस दौरे अमेरिका से तमाम शिकायतें करने, परमाणु हथियारों का खतरा दिखाने, अफगानिस्तान को अशांत बनाए रखने और चीन व रूस से संबंध बढ़ाने की अमेरिका को दी गई धमकियों के बाद वे आखिर में मिन्नतों पर उतर आए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ वार्ता शुरू करने और तनाव कम करने के लिए अमेरिका ‘भारत पर दबाव बनाने में सकारात्मक भूमिका’ निभा रहा है। हमें लगता है कि तनाव कम करने और पाकिस्तान पर बात करने के बजाय उसके साथ बातचीत शुरू करने के लिए भारत पर दबाव बनाने में अमेरिका की एक सकारात्मक भूमिका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को भरोसा दिलाया है कि वह कश्मीर मामले पर मोदी पर दबाव बनाएगा।

इन दोनों दूतों को लगता है कि उनका अमेरिका दौरा बेहद सफल रहा है। सैयद ने कहा- मुझे लगता है कि हमने अमेरिका को झकझोर दिया है। मुझे लगता है कि यही बताना मकसद था कि देखो, (कश्मीर में) लोकप्रिय, देशज और व्यापक विद्रोह है। इसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं है। भारत दबाव बनाने और माहौल गरम करने का प्रयास कर रहा है, जो दक्षिण एशिया की शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए हानिकारक है, क्योंकि यह परमाणु युद्ध को हवा दे सकता है। हम यह नहीं चाहते। कोई लक्ष्मण रेखा पार नहीं होनी चाहिए।
सैयद ने कहा कि मुझे लगता है कि दक्षेस सम्मेलन इस्लामाबाद में होगा। मोदी वहां जाएंगे और नवाज शरीफ से गले मिलेंगे। मुझे लगता है कि, कि मोदी को एहसास होगा कि यही आगे जाने का ठीक रास्ता है। उन्होंने कहा कि मोदी में अचंभित करने की क्षमता है। उनके बारे में एक अच्छी बात यह है कि वह यू-टर्न लेने के मामले में बहुत लचीले हैं। इसलिए मुझे हमारे संबंधों में शायद आने वाले महीनों में एक अच्छे यू-टर्न की उम्मीद है। हम दक्षिण एशिया के साथ संबंधों में सुखद आश्चर्य देख सकते हैं क्योंकि मोदी और शरीफ के बीच अच्छे संबंध हैं और मुझे लगता है कि मोदी अपने लोगों को इस यू-टर्न के लिए तैयार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मोदी महसूस करते हैं कि इससे दो महत्त्वपूर्ण बुनियादी हित जुड़े हैं। पहला यह है कि पाकिस्तान के साथ संबंध और कश्मीर विवाद भारत की प्रगति में सबसे बड़ी रुकावट हैं। भारत आगे बढ़ना चाहता है, परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शामिल होना चाहता है। आप तब तक शामिल नहीं हो सकते, जब तक पाकिस्तान के साथ आपके संबंध बेहतर नहीं हो जाते। सैयद ने आगाह किया कि पाकिस्तान के साथ युद्ध भारत की अर्थव्यवस्था को 10 साल पीछे धकेल देगा, जो मोदी नहीं चाहते। उनकी साथी मंसब ने भी सुर मिलाया और कहा कि मोदी यह (युद्ध) नहीं चाहेंगे। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ना भारत के लिए विनाशकारी, उसे कमजोर बनाने वाला और हानिकारक होगा। हम भारत की युद्ध संबंधी बयानबाजी का जवाब युद्ध संबंधी बयानबाजी से नहीं देना चाहते। हम भारत को उसके लहजे में जवाब नहीं दे रहे। हम अब भी शांति चाहते हैं। मंसब का मानना है कि मोदी उस भारतीय दिल्ली प्रतिष्ठान से नहीं है, जहां आपको हमेशा नाराज रहने वाले और शीत युद्ध वाली पुरानी मानसिकता वाले ऐसे वृद्धजन मिलते हैं जिनके चेहरे पर कोई मुस्कराहट नहीं होती, मोदी इस लिहाज से बाहर के व्यक्ति हैं।

बहरहाल अमेरिका को झकझोर देने के दावों के बावजूद तवज्जो नहीं मिलने का दर्द सैयद की अपनी स्वीकारोक्तियों से ही उजागर हो गया। उन्होंने कहा- हमें लगता है कि ओबामा प्रशासन हमारे क्षेत्र को समझने में असफल रहा है। उन्हें पाकिस्तान और अफगानिस्तान की नीतियों का बिल्कुल पता नहीं था। वे भ्रमित भी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका का नया प्रशासन ओबामा प्रशासन से अलग होगा। उम्मीद है कि उसकी अधिक संतुलित, रणनीतिक, स्थायी और सुसंगत नीति होगी। दोनों दूतों ने राष्ट्रपति बराक ओबामा के विशेष सहायक पीटर लावोय से मुलाकात की थी पर वाइट हाउस ने बैठक का कोई ‘रीडआउट’ जारी करने से इनकार कर दिया था।

सैयद ने आरोप लगाया कि अमेरिका ‘राजनीतिक लाभ’ के लिए भारत के साथ संबंधों को मजबूत कर रहा है। सैयद ने थिंक टैंक ‘अटलांटिक काउंसिल’ के कार्यक्रम में कहा कि हम (पाकिस्तान) पाकिस्तान की कूटनीतिक नीति में एक बदलाव महसूस कर रहे हैं। हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है और राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत की दो यात्राओं के बाद पाकिस्तान को रूस के साथ करीबी संबंध विकसित करने की जरूरत महसूस हुई। डॉन न्यूज की खबर के अनुसार सैयद ने कहा कि यह पाकिस्तान-रूस संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नीति में आए इस यू-टर्न की शुरुआत (जॉर्ज डब्लू) बुश प्रशासन के समय में हो गई थी जब अमेरिका-भारत परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किया गया था जो परमाणु हथियारों के अप्रसार कानून के खिलाफ था।

 

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First Published on October 9, 2016 3:19 am

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