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पाक ने भारत के ख़िलाफ संराष्ट्र को सौंपा डोजियर, कहा: कश्मीर ‘मुख्य’ मुद्दा

‘‘आतंकवाद छोड़कर’’वार्ता करने की भारत की नसीहत के जवाब में पाकिस्तान ने कहा कि किसी भी द्विपक्षीय वार्ता में जम्मू कश्मीर का मुद्दा शीर्ष एजेंडे पर रहेगा..
Author संयुक्त राष्ट्र | October 2, 2015 15:21 pm
पाकिस्तान ने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर के प्रमुख मुद्दे को केवल बयानबाजी से दरकिनार नहीं किया जा सकता। यह भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी वार्ता में हमेशा शीर्ष एजेंडे पर रहा है और रहेगा।’’ (फाइल फोटो)

‘‘आतंकवाद छोड़कर’’वार्ता करने की भारत की नसीहत के जवाब में पाकिस्तान ने कहा कि किसी भी द्विपक्षीय वार्ता में जम्मू कश्मीर का मुद्दा शीर्ष एजेंडे पर रहेगा।

इसने आरोप लगाया कि भारत वार्ता को बाधित करने के लिए ‘‘आतंकवाद के शैतान’’ का इस्तेमाल कर रहा है। पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया कि उसके यहां अशांति और आतंकवाद के लिए भारत जिम्मेदार है तथा कहा कि उसने इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून को डोजियर सौंपे हैं।

पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संबोधन के बाद जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया। सुषमा ने अपने संबोधन में कहा था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा प्रस्तावित चार सूत्री शांति पहल की जगह इस्लामाबाद आतंकवाद छोड़कर केवल ‘‘एक ही सूत्र’’ का समाधान कर दे।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थाई मिशन में वाणिज्य दूत बिलाल अहमद ने आरोप लगाया, ‘‘दहशतगर्दी के शैतान का इस्तेमाल करते हुए भारत ने न सिर्फ द्विपक्षीय वार्ता को बाधित किया है, बल्कि दोनों देशों के बीच समूचे माहौल को भी खराब किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर के प्रमुख मुद्दे को केवल बयानबाजी से दरकिनार नहीं किया जा सकता। यह भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी वार्ता में हमेशा शीर्ष एजेंडे पर रहा है और रहेगा।’’

अहमद ने कहा, ‘‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा इस सर्वोच्च मंच से प्रस्तावित गंभीर शांति पहल की अनदेखी करके भारत ढोंग कर रहा है।’’ उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा को सूचित किया कि पाकिस्तान ने कल संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून को डोजियर सौंपे हैं जिसे अहमद ने कथित भारतीय संलिप्तता का ‘‘सबूत’’ कहा।

अहमद ने कहा कि ‘‘डोजियरों में भारतीय हस्तक्षेप और बलूचिस्तान तथा कराची में आतंकवाद को समर्थन तथा खासकर फाटा में तहरीक ए तालिबान से भारत की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के सपंर्क का ब्यौरा है।’’

संयुक्त राष्ट्र में शरीफ द्वारा कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के एक दिन बाद सुषमा ने इसी मंच का इस्तेमाल ‘‘भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर के हिस्सों पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे’’ का मुद्दा उठाने के लिए किया और कहा कि इस कब्जे को वैध ठहराने के लिए वहां से आतंकवादी हमले किए जाते हैं।

सुषमा ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से पैदा हो रहा आतंकवाद द्विपक्षीय संबंधों के सामान्य होने में बाधक है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ‘‘बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते।’’

विदेश मंत्री ने 193 सदस्यीय शीर्ष ईकाई में दिये अपने संबोधन में कहा, ‘‘कल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने एक प्रस्ताव दिया था जिसे उन्होंने चार सूत्री नयी शांति पहल कहा था। मैं जवाब देना चाहूंगी। हमें चार सूत्रों की जरूरत नहीं है। हमें सिर्फ एक ही चाहिए….. आतंकवाद को त्याग दें और बैठकर बातचीत करें।’’

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में खासकर अगस्त में एनएसए स्तर की वार्ता रद्द होने के बाद ठहराव आ गया है। यह वार्ता इस्लामाबाद द्वारा प्रस्तावित एजेंडे पर मतभेदों और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज की कश्मीरी अलगावादियों से मुलाकात की योजना के चलते रद्द हो गई थी। नयी दिल्ली ने जोर देकर कहा था कि बातचीत आतंकवाद के मुद्दे पर होगी।

अहमद ने बातचीत के प्रति पाकिस्तान की इच्छा प्रकट करते हुए कहा कि भारत ने यह जानते हुए पूर्व शर्तें थोप दी हैं कि ये पाकिस्तान को स्वीकार्य नहीं होंगी। अहमद ने कहा, ‘‘बातचीत को एक सूत्री एजेंडे तक सीमित करने की भारत की बार-बार की जिद यह साबित करती है कि वास्तविक वार्ता में न तो उसकी रुचि है और न ही वह इसके प्रति गंभीर है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत यह कहता प्रतीत होता है कि पाकिस्तान में आतंकवाद के कृत्य स्वीकार्य हैं ।’’
शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने भी जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया था और पाकिस्तानी नेता की इन टिप्पणियों से असहमति जताई थी कि वह आतंकवाद का ‘‘प्रमुख पीड़ित’’ है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन में प्रथम सचिव अभिषेक सिंह ने कहा था कि पाकिस्तान असल में आतंकवादियों को पालने-पोसने और प्रायोजित करने की अपनी ही नीतियों का शिकार हो गया है। उन्होंने कहा था, ‘‘मामले के केंद्र में एक ऐसा देश है जो आतंकवाद को शासन नीति के वैध हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है।’’

शरीफ की इस टिप्पणी पर कि जम्मू कश्मीर विदेशी आधिपत्य में है, सिंह ने कहा था कि शरीफ ने जम्मू कश्मीर के विदेशी कब्जे में होने की बात सही कही है, लेकिन कब्जा करने वाले की पहचान गलत बताई है। उन्होंने कहा था, ‘‘सवालों के घेरे में कब्जा करने वाला पाकिस्तान है।’’

अहमद ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की शांति पहल मित्रवत पड़ोसी होने के उनके विजन के अनुरूप है जो उन्होंने दो साल पहले सत्ता संभालने के तत्काल बाद कार्यान्वित की। उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता का समर्थन करता है। भारत के शत्रुतापूर्ण रुख के बावजूद हमारी इच्छा एक खुले और रचनात्मक माहौल में आगे बढ़ने की है। हम उम्मीद करते हैं कि शांति और समृद्धि के हित में भारत सकारात्मक रूप से जवाब देगा।’’

अहमद ने कहा कि भारत को चाहिए कि वह ‘‘कश्मीरियों को संयुक्त राष्ट्र समर्थित जनमत संग्रह में स्वतंत्र रूप से उनका भविष्य तय करने दे जिसका वायदा उनसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्तावों द्वारा किया गया था।’’

उन्होंने सुरक्षा परिषद के विभिन्न प्रस्तावों का भी उल्लेख किया और कहा कि इनमें कश्मीरियों की इच्छा के अनुरूप संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में एक निष्पक्ष जनमत संग्रह कराने का आह्वान किया गया है।

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