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लोग गिनने पर 14 अरब रुपये खर्च करेगी नवाज शरीफ सरकार, डॉन अखबार ने बताया देश का सबसे बड़ा नुकसान

आमतौर पर इस जनगणना के लिए 2 हफ्ते का समय दिया जाता है, लेकिन इस बार जनगणना 31 मई को खत्म होगी।

9 साल की देरी के बाद पाकिस्तान में 15 मार्च से राष्ट्रीय जनगणना शुरू होगी। हैरानी की बात यह है कि 2 लाख सुरक्षा बलों और जनगणना करने वाले 91 हजार लोगों के काम करने के बावजूद इस काम मे 14 बिलियन रुपये की लागत आएगी, जिसमें गंभीर गलतियां होने का भी अनुमान है। जिस स्वरूप में पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो (पीबीएस) ने इसे डिजाइन किया है, उससे लगता है कि यह देश के लिए सबसे बड़े नुकसान के तौर पर सामने आएगा। यह अनुमान पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने लगाया है।

इसका कारण है कि 1998 के उलट इस बार जनगणना करने वाले सिर्फ लोगों को गिनेंगे। यानी वह फॉर्म 2ए नहीं भरेंगे, जिसमें लिंग, उम्र, वैवाहिक स्थिति और धर्म की जानकारी देनी होती है। यह संकेत मिलता है विकलांग, आंतरिक प्रवास, मृत्यु दर, प्रजनन और अन्य सामाजिक संकेतकों से जुड़े अहम आंकड़ों को छोड़ दिया जाएगा। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि पीबीएस ने इतने अहम संकेतकों को छोड़ने का फैसला क्यों किया। अहम बात यह है कि सेना इस काम के लिए 70 दिनों तक उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा जनगणना करने वालों के बाद बहुत समय है कि वह घर-घर जाकर लोगों से अतिरिक्त जानकारी हासिल कर सकते थे। आमतौर पर इस जनगणना के लिए 2 हफ्ते का समय दिया जाता है, लेकिन इस बार जनगणना 31 मई को खत्म होगी।

पीबीएस में मुख्य सांख्यिकीविद् आसिफ बाजवा कहते हैं कि हमारे पास इस जनगणना के लिए फॉर्म 2ए इस्तेमाल करने का वक्त नहीं है। यह 18 मार्च तक की आबादी की जनगणना का एक स्नैपशॉट है। इसके बाद हम नहीं देखेंगे कि कौन पैदा हुआ और कौन मर गया। अब सवाल उठता है कि इतनी आर्मी, पैसा और लोग लगाने के बावजूद क्या सिर्फ लोगों को ही गिनना जायज है। क्या ये जनगणना के उद्देश्य के साथ खिलवाड़ और अमूल्य राष्ट्रीय संपदा की बर्बादी नहीं है। जनगणना की पूरी जानकारी में पाकिस्तान की शिक्षा, कुपोषण, पानी की और मूलभूल स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को दर्शाना चाहिए। सोशल साइंटिस्ट हैरिस गजदार का कहना है कि जनसंख्या जनगणना का इस्तेमाल संवैधानिक कार्यों के लिए किया जाता है। उनके मुताबिक अगर एक देश विश्वसनीय जनगणना का आयोजन नहीं कर पाता तो यह दर्शाता है कि वहां अनसुलझे राजनीतिक मुद्दे हैं, जो विकास की राह में रोड़ा हैं।

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