January 25, 2017

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कश्मीर पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर अमल नहीं करना संराष्ट्र की बड़ी नाकामी: पाकिस्तान

मलीहा लोधी ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग ‘कभी नहीं था और कभी नहीं हो सकता’, बल्कि वह एक विवादित क्षेत्र है।

Author संयुक्त राष्ट्र | October 8, 2016 21:16 pm
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी। (फाइल फोटो)

एक बार फिर कश्मीर का राग अलापते हुए पाकिस्तान ने कहा है कि घाटी में जनमत-संग्रह कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्तावों पर अमल नहीं किया जाना संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी नाकामी है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने शुक्रवार (7 अक्टूबर) को महासभा में ‘स्पेशल पॉलिटिकल एंड डीकोलोनाइजेशन कमिटी’ की एक बहस के दौरान कहा, ‘जम्मू-कश्मीर विवाद के समाधान के बगैर संयुक्त राष्ट्र का अनौपनिवेशकरण का एजेंडा अधूरा रहेगा।’

लोधी ने कहा कि कश्मीरी लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार देने के लिए संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में एक जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पारित किए जाने के छह दशक बीत जाने के बाद भी इसे अमल में नहीं लाया जा सका है। उन्होंने कहा, ‘यह संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी नाकामी है।’ उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीरियों ने पीढ़ी दर पीढ़ी सिर्फ टूटे वादे और कू्रर दमन देखे हैं। लोधी ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग ‘कभी नहीं था और कभी नहीं हो सकता’, बल्कि वह एक विवादित क्षेत्र है जिसकी अंतिम स्थिति यूएनएससी के कई प्रस्तावों के मुताबिक तय की जानी है।

पाकिस्तानी राजनयिक ने कहा कि औपनिवेशिक वर्चस्व और विदेशी कब्जे से जूझ रहे लोगों के प्रति संयुक्त राष्ट्र की एक नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ‘अधूरे एजेंडे को पूरा करने के लिए काम करने और उपनिवेशवाद के आखिरी निशान को खत्म करने की सख्त जरूरत है। हमें उम्मीद है कि देर-सवेर हम इस साझा लक्ष्य को हासिल कर लेंगे।’

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First Published on October 8, 2016 9:16 pm

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