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PAK ने की भारत को घेरनेे की कोशिश, क्वेटा अटैक में विदेशी ताकतों का हाथ होने दावा

पाक की ओर से कहा गया है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान (खासकर ब्लूचिस्तान और कराची) में विध्वंसक गतिविधियों में शामिल रही हैंं।
Author इस्लामाबाद | August 12, 2016 00:34 am
आत्मघाती हमलों में घायलों को अस्पताल ले जाते स्थानीय नागिरक। (AP Photo/Arshad Butt)

ब्लूचिस्तान के क्वेटा में हुए बम धमाके के पीछे पाकिस्तान ने विदेशी ताकतों का हाथ होने का आरोप लगाया है। पाकिस्तान ने दावा किया है कि भारत उसके यहां अस्थिरता भड़का रहा है। यह बयान पाकिस्तान केे विदेश कार्यालय केे प्रवक्ता नफीस जकारिया की ओर से आया है। पाक की ओर से कहा गया है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान (खासकर ब्लूचिस्तान और कराची) में विध्वंसक गतिविधियों में शामिल रही हैंं। बता दें कि पाकिस्तान के अशांत दक्षिण पश्चिम बलूचिस्तान प्रांत के एक सरकारी अस्पताल में सोमवार (8 अगस्त) को तालिबान के एक आत्मघाती बम विस्फोट में 74 लोगों की मौत हो गई थी और 115 अन्य घायल हो गए। इनमें से ज्यादातर वकील हैं। यह हमला इस साल के सबसे भीषण आतंकी हमलों में एक है।

विदेश कार्यालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने कहा, ‘ पाकिस्तानी सरजमीं में आतंकवाद में भारत का हाथ होने के पाकिस्तानी रूख की पुष्टि इंडियन नेवी के अधिकारी कुलभूषण जादव के इकबालिया बयान से हुई, जिसे आतंकवाद फैलाने का कथित तौर पर नेटवर्क चलाने के लिए इस साल बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया था।

भारत में आतंकी घुसपैठ में पाकिस्तान के हाथ होने के दावे का जकारिया ने खंडन किया है। जकारिया ने कहा कि पाकिस्तान अपनी सरजमीं का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ नहीं करने देगा। जकारिया ने इन भारतीय आरोपों को भी खारिज कर दिया कि एलओसी के करीब आतंकियों के घुसपैठ को पाकिस्तानी सेना की सहायता प्राप्त थी। उन्होंने कहा, ‘हमारा इस पर साफ रूख है और किसी भी देश के खिलाफ हम अपनी सरजमीं का इस्तेमाल नहीं होने देंगे।’ पाकिस्तानी आतंकी बहादुर अली की भारत में घुसपैठ के मामले में पाकिस्तानी सेना और लश्कर का हाथ होने की बात सामने आई थी। एनआईए ने बु धवार को प्रेस कॉन्फ्रेंंस की थी, जिसमें आतंकी का कबूलनामा भी पेश किया गया था।

जकारिया ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवदी गुटों के बीच कोई भेदभाव नहीं करता और लगातार सैन्य प्रयासों के जरिए उनको निशाना बनाता है। प्रवक्ता ने, ‘कश्मीर में लगातार मानवाधिकार उल्लंघन’ पर भी चिंता प्रकट की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसके खिलाफ आवाज उठाने को कहा।’

 

 

 

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