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अफ़ग़ानिस्तान पर भारत में ‘हार्ट ऑफ़ एशिया’ सम्मेलन में शरीक होगा पाकिस्तान

भारत ने इस बैठक में भाग लेने के पाक के फैसले का स्वागत किया है।
Author इस्लामाबाद | October 29, 2016 13:36 pm
सार्क सम्मेलन के आयोजन पर पाक मीडिया को संबोधित करते पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफ़ीस ज़कारिया। (AP/PTI/29 Sep, 2016/File)

पाकिस्तान ने शुक्रवार (28 अक्टूबर) को कहा कि यह दिसंबर में अमृतसर में अफगानिस्तान पर होने वाले ‘हार्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन में शरीक होगा। लेकिन भागीदारी के तरीके और स्तर पर फैसला नहीं किया है। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही भारत ने इस बैठक में भाग लेने के पाक के फैसले का स्वागत किया है। विदेश विभाग प्रवक्ता नफीस जकारिया ने यहां साप्ताहिक ब्रीफिंग में कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य अन्य क्षेत्रीय देशों के सहयोग के साथ अफगानिस्तान का विकास करना है जो अफगानिस्तान में शांति एवं स्थिरता की हर कोशिश का समर्थन का पाकिस्तान की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। हालांकि प्रवक्ता ने इसके तरीके और बैठक में पाकिस्तान की भागीदारी के स्तर के बारे में नहीं बताया जो नियंत्रण रेखा पर भारी गोलीबारी के चलते जानें जाने और बढ़ते तनाव के मद्देनजर हो रही है। उन्होंने कहा, ‘हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में भागीदारी के तरीके और स्तर पर फैसला नहीं हुआ है।’

एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारतीय उच्चायोग में निष्कासित भारतीय कर्मचारी ऐसी गतिविधियों में शामिल था जो पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के सीधे तौर पर खिलाफ था। उन्होंने कहा कि भारत के पास कोई सबूत नहीं है लेकिन यह पाक के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाता रहा है। इसके ठीक उलट हमारे पास पाकिस्तानी सरजमीं की अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ भारत की संलिप्त्ता के बारे में अकाट्य सबूत हैं। भाजपा नेता सुब्रहमण्यम स्वामी की कथित टिप्पणी पर जकारिया ने कहा कि भारतीय नेता पाकिस्तान पर आक्षेप लगाते हैं और उन्होंने इसका इस्तेमाल घरेलू राजनीति के औजार के रूप में किया है। दरअसल, स्वामी ने कथित तौर पर कहा था कि यदि पाक ने आतंकवाद का समर्थन करना जारी रखा तो भारत पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की ओर बढ़ सकता है।

जकारिया ने यह भी कहा कि 2008 की एनएसजी छूट ने भारत को परमाणु हथियार बनाने में मदद की है और इसके सैन्य परमाणु कार्यक्रम को बढ़ाया है। भारत के अधिकतम 356 से 492 परमाणु हथियार बना सकने की क्षमता पर एक पाकिस्तानी थिंक टैंक की रिपोर्ट पर टिप्पणी करने को कहे जाने पर जकारिया ने कहा कि पाकिस्तान काफी समय से कहता रहा है कि भारत के तेजी से विस्तारित होते सैन्य परमाणु कार्यक्रम ने क्षेत्र और इसके आगे शांति एवं स्थिरता को एक गंभीर खतरा पैदा किया है।

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