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जनरल राहील शरीफ ने कहा: ‘देश विभाजन का अधूरा एजंडा है कश्मीर’

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चुनावी चाल के बाद पाक ने कश्मीर को लेकर भड़काऊ बयान दिया है। पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल राहील शरीफ ने
Author June 4, 2015 10:43 am
बंटवारा अभी अधूरा : पाक आर्मी चीफ

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चुनावी चाल के बाद पाक ने कश्मीर को लेकर भड़काऊ बयान दिया है। पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल राहील शरीफ ने बुधवार को कहा कि यह 1947 में हुए देश विभाजन का ‘अधूरा एजंडा’ है और पाकिस्तान और कश्मीर ‘अविभाज्य’ हैं। दूसरी ओर पाक ने गिलगित और बालतिस्तान में आगामी चुनाव के संबंध में भारत की टिप्पणियों को बुधवार को खारिज करते हुए इन्हें देश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करार दिया।

यहां नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी (एनडीयू) में कैडटों से राहील ने कहा, ‘कश्मीर विभाजन का अधूरा रह गया एजंडा है। पाकिस्तान और कश्मीर अविभाज्य हैं’।

उन्होंने भारत के साथ शांतिपूर्ण संबंधों को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत कश्मीर मुद्दे को हल किए जाने से जोड़ते हुए कहा-जहां हम क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहते हैं, वहीं हम इस क्षेत्र में स्थायी शांति कायम करने के लिए कश्मीर मुद्दे का संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव और कश्मीरी जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप उचित समाधान के पक्षधर हैं।

राहील के भाषण के कुछ हिस्सों को सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिम सलीम बाजवा ने ट्वीट किया है। युद्धों का जिक्र करते हुए राहील ने कहा कि भविष्य में होने वाले युद्धों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। लेकिन पाकिस्तान अपना बचाव करने में सक्षम है। उन्होंने कहा-हमारे शत्रु अर्ध पारंपरिक संघर्षों को उकसाने और हमारे देश को अस्थिर करने के लिए आतंकवाद का समर्थन कर रहे हैं। हम घृणित मंसूबों को नाकाम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध और सक्षम हैं।

उन्होंने दूसरे देशों के खिलाफ छद्म युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान किसी भी अन्य देश के खिलाफ छद्म युद्ध का विरोधी है और किसी अन्य देश को भी पाकिस्तान के खिलाफ छद्म युद्ध की अनुमति नहीं देगा’।

राहील का यह बयान पाकिस्तान और भारत में बढ़ते वाकयुद्ध के बीच आया है। पाकिस्तान ने बार-बार आरोप लगाया है कि भारत की बाह्य खुफिया एजंसी रॉ पाकिस्तान में उग्रवाद को बढ़ावा दे रही है।

भारत ने हमेशा ही ऐसे आरोपों से इनकार किया है। चीन के साथ 46 अरब डालर के आर्थिक कॉरिडोर पर भारत की आपत्ति से भी पाकिस्तान खफा है। भारत ने इस परियोजना को लेकर चीन से आपत्ति जताई है क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरती है।

दूसरी ओर पाकिस्तान ने गिलगित और बालतिस्तान में आगामी चुनाव के संबंध में भारत की टिप्पणियों को बुधवार को खारिज करते हुए इन्हें देश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करार दिया। गिलगित और बालतिस्तान में आठ जून को होने वाले चुनाव पर कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने मंगलवार को कहा था कि यह पाकिस्तान का क्षेत्र पर अपने गैरकानूनी और जबरन कब्जे पर पर्दा डालने की कोशिश है जो देश का अभिन्न हिस्सा है।

पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के कार्यालय ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह के जरिए अंतिम समाधान तक कश्मीर मुद्दा एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का विवाद है, जिसे संयुक्त राष्ट्र के कई प्रस्तावों में भी उल्लिखित किया गया है। कार्यालय ने बयान जारी किया-इन प्रस्तावों के तहत किसी भौतिक बदलाव की इजाजत नहीं है। लेकिन भारत इन प्रस्तावों के घोर उल्लंघन में इसे संघ का राज्य बताता है।

बयान में कहा गया है कि गिलगित बालतिस्तान में आठ जून को होने वाले चुनाव की भारत की व्याख्या पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है। भारत इस क्षेत्र के लोगों को पाकिस्तान के लगातार उनके राजनीतिक अधिकारों से वंचित करने और इन क्षेत्रों को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने पर चिंता जाहिर कर चुका है। स्वरूप ने नई दिल्ली में कहा था, ‘भारत की स्थिति सबको पता है।

पूरा जम्मू कश्मीर प्रदेश जिसमें गिलगित और बालतिस्तान भी शामिल है, भारत का अभिन्न अंग है। आठ जून को तथाकथित ‘गिलगिट बालतिस्तान सशक्तीकरण व स्व सरकार व्यवस्था के तहत गिलगित और बालतिस्तान में होने वाला चुनाव पाकिस्तान द्वारा इन क्षेत्रों पर अपने जबरन व अवैध कब्जे पर पर्दा डालने का प्रयास है।

स्वरूप ने कहा था-हम पाकिस्तान के लोगों को उनके राजनीतिक अधिकारों से वंचित करने और इन क्षेत्रों को अपने में मिलाने के प्रयासों पर चिंतित हैं। यह तथ्य इतना बताने के लिए काफी है कि पाकिस्तान के संघीय मंत्री गिलगित बालतिस्तान के गवर्नर हैं।

लेकिन इसके जवाब में पाकिस्तान ने कहा कि वास्तव में यह भारत है जो गैरकानूनी तरीके से जम्मू कश्मीर के क्षेत्रों पर कब्जा जमाए हुए है। बयान में कहा गया-इस विवादित क्षेत्र पर अपने गैरकानूनी कब्जे को बनाए रखने के लिए भारत ने अपने बलों में से सात लाख से अधिक को तैनात किया है, कश्मीरी मुसलिमों की बहुसंख्यक आवाज को दबाने का अत्यधिक प्रयास किया और बंदूक के जोर पर चुनाव का ढकोसला किया।

पाकिस्तान ने कहा, ‘कश्मीर पर भारत की स्थिति संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों की घोर अवमानना, लगातार जबरन कब्जा और जम्मू कश्मीर के लोगों के आत्म निर्णय के उनके अधिकार से इनकार करना है’।

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