December 07, 2016

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पड़ोसी क्षेत्र पर नजरें गड़ाने के बजाए अपने नागरिकों पर ध्यान दे पाकिस्तान: भारत

संरा में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर मयंक जोशी ने कहा, ‘पाकिस्तान भारतीय इलाके पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए भारत के खिलाफ आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है।

Author संयुक्त राष्ट्र | November 3, 2016 16:56 pm
संयुक्त राष्ट्र। (फोटो-रॉयटर्स)

भारत ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि उसके नागरिकों को पाकिस्तान के ‘छद्म तत्वों’ की ओर से लगातार अमानवीय आतंकी हमलों का सामना करना पड़ा है जो भारत के खिलाफ क्षेत्र में अपना आधिपत्य जमाने की खातिर आत्मनिर्णय की अवधारणा का दुरूपयोग कर रहा है। ‘जनता को आत्मनिर्धारण का अधिकार’ विषय पर आयोजित संरा महासभा के सत्र में संरा में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर मयंक जोशी ने कहा, ‘पाकिस्तान, जिसके खुद के लोगों को इस देश के इतिहास में ज्यादातर वक्त उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखा गया, जो भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य के एक हिस्से पर अवैध कब्जा जमाए हुए है और उस पर इस तरह शासन करता है जैसे वह इसका उपनिवेश हो। वह इलाके पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए भारत के खिलाफ आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है और आत्मनिर्णय की अवधारणा का दुरूपयोग कर रहा है।’

पाकिस्तान के आधारहीन आरोपों और स्व-निर्धारण के अधिकार पर उसके ‘परंपरागत प्रचार’ को सिरे से खारिज करते हुए जोशी ने कल कहा था कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और जनता की आकांक्षाओं के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर में नियमित तौर पर निष्पक्ष चुनाव करवाता है। जोशी ने कहा, ‘सचाई यह है कि पाकिस्तान के छद्म तत्व हमारे इलाकों में लगातार अमानवीय आतंकी हमलों को अंजाम दे रहे हैं जिसके शिकार महिलाओं और बच्चों समेत भारत के हजारों निर्दोष नागरिक बन रहे हैं।’

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जोशी के मुताबिक भारत ने बार-बार यह कहा है कि पाकिस्तान ‘व्यवहार्यता के सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए अपने पड़ोसियों के क्षेत्र पर निगाहें गड़ाने के बजाए’ अगर अपने समाज के समक्ष पेश चुनौतियों की ओर ध्यान देगा तभी वह अपने नागरिकों की बेहतरी के लिए काम कर सकेगा। संरा में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर मयंक जोशी ने कहा, ‘अब तक अंतरराष्ट्रीय बिरादरी पाकिस्तान के भ्रमित करने के प्रयासों से अच्छी तरह वाकिफ हो चुकी है । ऐसे में इस मुद्दे पर हम ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते।’

जोशी ने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्णय का अधिकार लंबे समय से गैर-स्वशासित उपनिवेशों और ट्रस्ट टेरिटरीज :गैर-स्वशासित इलाका जिसे संरा की ट्रस्टशिप काउंसिल ने प्रशासनिक अधिकार में रखा है: के लोगों पर लागू होता आया है। उन्होंने कहा, ‘इस अवधारणा का इस्तेमाल संरा के सदस्य देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय एकता, राजनीतिक एकजुटता को खत्म करने और तबाही लाने के लिए नहीं किया जा सकता।’ जोशी ने कहा कि फलस्तीन में आत्मनिर्णय के अधिकार को वास्तविकता में बदलने का काम अभी तक अधूरा है। उन्होंने दोहराया कि भारत फलस्तीन के लोगों के साथ डटकर खड़ा है और चाहता है कि उन्हें आत्मनिर्णय के अधिकार समेत उनके सभी अविच्छेद अधिकार प्राप्त हों।

उन्होंने कहा, ‘शांति प्रक्रिया और क्वार्टेट रोडमेप के प्रति मेरे प्रतिनिधिमंडल ने अपना पूरा समर्थन जताया है। इसके बल पर फलस्तीन और इस्राइल के लोगों के अमन के माहौल में रहने का स्वप्न पूरा हो सकेगा, वह भी निर्धारित और सुरक्षित सीमाओं के भीतर रहते हुए।’ उन्होंने कहा कि ‘नस्लवाद के बढ़ने और अनजान लोगों से भय से जुड़ी असहिष्णुता के कारण विभिन्न नागरिकता, जाति प्रजाति, संस्कृति, धार्मिक तौर पर अल्पसंख्यकों, शरणार्थियों और प्रवासियों के मानवाधिकारों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन हो रहा है।’ इससे पहले संरा में पाकिस्तान की दूत मलीहा लोधी ने कश्मीर मुद्दा उठाते हुए कहा था कि कश्मीर विवाद के अविलंब निबटारे के बगैर दक्षिण एशिया में अमन कायम नहीं हो सकता है।’

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First Published on November 3, 2016 4:56 pm

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