December 10, 2016

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200 देशों ने संयुक्त राष्ट्र से कहा, जलवायु परिवर्तन से तुरंत प्राथमिकता के आधार पर निपटें

घोषणा में कहा गया है, ‘हमारी जलवायु चेताने वाली एवं अभूतपूर्व दर से गर्म हो रही है और इस संबंध में तत्काल कदम उठाना हमारा दायित्व बनता है।'

Author माराकेश | November 18, 2016 17:50 pm
संयुक्त राष्ट्र (फाइल फोटो)

विश्व के करीब 200 देशों ने यहां संयुक्त राष्ट्र की एक सभा में जलवायु परिवर्तन से ‘तत्काल प्राथमिकता’ के आधार पर निपटने के लिए शुक्रवार (18 नवंबर) को ‘सर्वाधिक राजनीतिक प्रतिबद्धता’ की अपील की और रेखांकित किया कि वैश्विक जलवायु ‘चेताने वाली एवं अभूतपूर्व’ दर से गर्म हो रही है। कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी) के पूर्ण सत्र में ‘माराकेश कार्य घोषणा’ पढ़ी गई जिस पर शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे सभी पक्षों यानी 196 देशों एवं ईयू समूह ने सहमति जताई। इसमें कहा गया कि ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने पर ‘तत्काल कार्रवाई करना दायित्व’ है। इसे जलवायु परिवर्तन पर जारी अहम शिखर सम्मेलन के अहम परिणामों में से एक माना जा सकता है। घोषणा में कहा गया है, ‘हमारी जलवायु चेताने वाली एवं अभूतपूर्व दर से गर्म हो रही है और इस संबंध में तत्काल कदम उठाना हमारा दायित्व बनता है। हम जलवायु परिवर्तन से तत्काल प्राथमिकता के आधार पर निपटने के लिए सर्वाधिक राजनीतिक प्रतिबद्धता की अपील करते हैं।’ घोषणा में कहा गया है, ‘हम जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले देशों के साथ मजबूत एकजुटता दिखाने की अपील करते हैं और उनकी अनुकूलन क्षमता बढ़ाने एवं उनके जोखिम को कम करने के प्रयासों को समर्थन देने की आवश्यकता रेखांकित करते हैं।’

इसमें कहा गया है, ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन प्रारूप सम्मेलन की कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज के 22वें सत्र के उच्च स्तरीय अनुभाग के लिए माराकेश में एकत्र हुए हम, राष्ट्र प्रमुख, सरकार एवं प्रतिनिधि मंडल जलवायु परिवर्तन से निपटने एवं सतत विकास पर कार्य एवं क्रियान्वयन के नए दौर की ओर स्थानांतरण का संकेत देने के लिए यह घोषणा जारी करते हैं।’ देशों ने पेरिस समझौते, इसके तेजी से लागू होने, महत्वाकांक्षी लक्ष्यों, समावेशी प्रकृति और समान एवं साझी लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों एवं अपनी-अपनी क्षमताओं की इसकी भावना का स्वागत किया। उन्होंने इसके पूर्ण क्रियान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। भारत ने पहले की गई राजनीतिक घोषणा के मसौदे में धन के प्रवाह के स्पष्ट जिक्र करने और न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन के साथ स्थायी जीवनशैली के समावेश पर जोर दिया था। घोषणा में कहा गया, ‘हम, विकसित देश पक्ष, 100 अरब डॉलर जुटाने के हमारे लक्ष्य की फिर से पुष्टि करते हैं।’ इसमें क्षमता एवं तकनीक सुधार के साथ जलवायु परियोजनाओं के लिए धन की ‘मात्रा, प्रवाह एवं पहुंच’ बढ़ाने की भी अपील की है।

पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने शिखर सम्मेलन के एक उच्चस्तरीय अनुभाग में अपने हालिया बयान में कहा था कि पर्याप्त वित्तीय मदद तक पहुंच भारत के लिए ‘सबसे बड़ी चिंता’ बनी हुई है। उन्होंने कहा था कि यह ‘अहम’ है कि विकसित देश विकासशील देशों को वित्तीय एवं तकनीक हस्तांतरण समर्थन मुहैया कराएं। देशों ने घोषणा में कहा कि उनका काम अब लय को तेजी से आगे बढ़ाना, मिलकर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना और अनुकूलन प्रयासों को तेज करना है ताकि सतत विकास के 2030 एजेंडे और इसके सतत विकास लक्ष्यों को समर्थन एवं लाभ पहुंचाया जा सके। इसमें कहा गया है, ‘हम पेरिस समझौते के दीर्घकालिक तापमान लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक स्तर एवं मौजूदा उत्सर्जन स्तर के बीच अंतर को पाटने के लिए हमारे बीच सहयोग को मजबूत करने और महत्वाकांक्षा को तत्काल बढ़ाने की अपील करते हैं।’

घोषणा में देशों से गरीबी उन्मूलन के प्रयासों को मजबूती एवं समर्थन देने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और कृषि में जलवायु परिवर्तन चुनौतियों के साथ निपटने के लिए कड़े कदम उठाने की भी अपील की गई है। सदस्य देशों ने विकासशील देशों, अल्पविकसित देशों और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले की विशेष जरूरतों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 2020 से पहले जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आगे कार्रवाई करने एवं समर्थन देने को लेकर भी सर्वसम्मति से अपील की। उन्होंने कहा, ‘हम, क्योटो प्रोटोकॉल के पक्ष दोहा संशोधन के अनुमोदन को प्रोत्साहित करते हैं।’ घोषणा का यह बिंदु खासकर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने विकसित देशों से अपील की थी कि वे 2020 के पहले की अवधि में जलवायु कार्रवाई की महत्वाकांक्षा को बढ़ाने के लिए अगले साल अप्रैल तक क्योटो प्रोटोकॉल के दोहा संशोधन का अनुमोदन करें।

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First Published on November 18, 2016 5:50 pm

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