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वीजा धोखाधड़ी मामले में दो भारतीय अमेरिकी भाइयों को 7 साल जेल की सजा

एच1बी वीजा कार्यक्रम में धोखाधड़ी के लिए दो भारतीय अमेरिकी भाइयों को सात साल से ज्यादा की जेल की सजा सुनाई गई है।
Author वाशिंगटन | June 6, 2016 02:12 am
(चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है।)

एच1बी वीजा कार्यक्रम में धोखाधड़ी के लिए दो भारतीय अमेरिकी भाइयों को सात साल से ज्यादा की जेल की सजा सुनाई गई है। एच1बी वीजा आइटी और साफ्टवेयर पेशेवरों में लोकप्रिय है। यह अमेरिका में कम लागत वाले कार्यबल के निर्माण के लिए दिया जाता है।अमेरिकी मुख्य डिस्ट्रिक्ट जज बारबरा एमजी लिन ने टैक्सास में अतुल नंदा (46) और जितेन नंदा (45) दोनों को संघीय कारागार में 87 महीने की जेल की सजा सुनाई।

दोनों को वीजा धोखाधड़ी, अवैध तरीके से विदेशियों को पनाह देने और दूरसंचार व सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से जुड़ी वित्तीय धोखाधड़ी के चार मामलों में दोषी करार दिया गया। मुचलके पर रिहा दोनों भाइयों को अमेरिकी मार्शल सेवा की हिरासत में भेज दिया गया। अमेरिकी एटार्नी जॉन पार्कर ने कहा, ‘एच1बी वीजा कार्यक्रम सही तरह से इस्तेमाल किए जाने पर व्यापारों और विदेशी कर्मियों के लिए समान रूप से सकारात्मक औजार है।

जब कर्मचारी कार्यक्रम का दुरुपयोग करते हैं, विदेशी कर्मी सस्ते श्रम के दुरूपयोग का साधन बन जाते हैं, जबकि कंपनियां वित्तीय लाभ हासिल करती हैं।’ टेक्सास स्थित आइटी परामर्शदाता कंपनी डिबॉन सोल्यूशंस के मालिक नंदा बंधुओं ने अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले विशेषज्ञ विदेशी कर्मियों की भर्ती की।

उन्होंने कंपनी मुख्यालय में काम करने का उद्देश्य बताकर कर्मियों का एच1बी वीजा प्रायोजित किया लेकिन कर्मचारियों के तत्काल पदों का खुलासा नहीं किया क्योंकि वे जानते थे कि कर्मचारी आखिरकार अमेरिका में काम कर रही दूसरी कंपनियों के लिए परामर्श संबंधी सुविधाएं देंगे। उन्होंने वीजा हासिल करने के लिए गलत तरीके से दिखाया कि कर्मचारी का पद पूर्णकालिक है और उन्हें वार्षिक वेतन दिया जाएगा जो कि वीजा की शर्तें होती हैं।

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