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कनाडा की संसद को संबोधित करेंगी नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई

कनाडा के प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई देश की संसद को संबोधित करेंगी।
Author टोरंटो | April 4, 2017 09:46 am
नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई

कनाडा के प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई देश की संसद को संबोधित करेंगी। मलाला को यहां कनाडा की मानद नागरिकता प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि 19 वर्षीय पाकिस्तानी कार्यकर्ता संसद को संबोधित करने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति होंगी। मलाला यहां 12 अप्रैल को आने वाली हैंं। ट्रूडो ने कल बताया कि वह और मलाला शिक्षा के जरिए लड़कियों के सशक्तीकरण पर भी चर्चा करेंगे। मलाला को उस समय तालिबान के आतंकवादियों ने गोली मार दी थी जब वह स्कूल से लौट रहीं थी। उन्हें महिलाओं की शिक्षा की वकालत करने के कारण निशाना बनाया गया था। उस समय मलाला की उम्र महज 15 साल थी। मलाला का प्रारंभिक इलाज पाकिस्तान में हुआ लेकिन उसके बाद इलाज के लिए उन्हें ब्रिटेन भेजा गया। उन्हें उनके अभियान के लिए दुनियाभर से तारीफ मिली और उन्हें साल 2014 के नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया। कनाडा की मानद नागरिकता पाने वाली वह दुनिया की छह लोगों में से एक हैं।

इससे पहले मलाला ने शरणार्थियों पर दिए गए ट्रंप के आदेश को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि ट्रंप द्वारा दिए बयान से उनका दिल टूट गया है। मलाला ने कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन बच्चों और माता पिता के अंदर पल रही उम्मीदों के दरवाजे बंद कर दिए हैं जो अपने यहां फैली हिंसा से परेशान हैं। मलाला ने कहा कि में डोनाल्ड ट्रंप से पूछना चाहती हूं कि इस समय दुनिया में फैली अशांति और अनिश्चितता के बीच वह उन बच्चों और उनके परिवार पर कैसे अपना रुख बदल सकते हैं। जो हिंसा से इस समय जूझ रहे हैं।

मलाला ने कहा कि मुझे दुख है कि अमेरिका अपनी पुरानी नीति को बदल रहा है जो कि शरणार्थियों और अप्रवासियों के लिए थी। जिन लोगों ने अमेरिका को बनाने में उसकी मदद की और अपनी कड़ी मेहनत के बाद उसे इस लायक बनाया कि वह और लोगों को नई जिंदगी दे सके। यूसुफजई ने कहा कि सीरिया के शरणार्थी बच्चों का इसमें क्या दोष है जिन्हें पिछले छह साल से इस युद्ध की से उनका कितना नुकसान हुआ है। मलाला ने अपने एक दोस्त का जिक्र करते हुए बताया कि वह सोमालिया, यमन और इजिप्ट में युद्ध के कारण अमेरिका में पढ़ने के लिए अपनी बहन के पास है। उसे उम्मीद थी कि यहां उसके लिए कुछ अच्छा होगा।

ट्रंप ने एक शासकीय आदेश पर दस्तखत किए थे। यह अादेश ‘‘चरमपंथी इस्लामी आतंकियों को अमेरिका से बाहर रखने के लिए’’ नाम से है और सघन जांच के नए नियम तय करता है। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले पेंटागन दौरे में ट्रंप ने इस शासकीय आदेश पर दस्तखत किए। दस्तखत करने के बाद ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं चरमपंथी इस्लामी आतंकियों को अमेरिका से बाहर रखने के लिए सघन जांच के नए नियम स्थापित कर रहा हूं। हम उन्हें यहां देखना नहीं चाहते।’’ ट्रंप ने कहा, ‘‘हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हम उन खतरों को अपने देश में न आने दें, जिनसे हमारे सैनिक विदेशों में लड़ रहे हैं। हम सिर्फ उन्हीं को अपने देश में आने देना चाहते हैं, जो हमारे देश को सहयोग देंगे और हमारी जनता से गहरा प्रेम करेंगे।’’

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