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हाथ से निकल रहा नेपाल: नए प्रधानमंत्री ओली ने भारत को सुनाई खरी-खोटी, चीन की जमकर तारीफ की

अपने पहले राष्‍ट्र के नाम संबोधन में ओली ने ईंधन और अन्‍य जरूरी सामान नेपाल को मुहैया कराने के लिए चीन की जमकर तारीफ की। उन्‍होंने कहा, भविष्‍य में हम ट्रेड के लिए किसी एक राष्‍ट्र पर निर्भर नहीं रहेंगे। मौजूदा समस्‍या से हमें यही सबक मिला है।
Author काठमांडू | November 16, 2015 09:29 am
नेपाल के नए प्रधानमंत्री केपी ओली। (फाइल फोटो)

नेपाल के नए प्रधानमंत्री केपी ओली ने कहा कि कोई भी उनके आतंरिक मामलों में हस्‍तक्षेप नहीं कर सकता है। संविधान का मसौदा तैयार करना उसका आतंरिक मामला है और वह इस मामले से खुद निपटना जानता है। नेपाली पीएम की यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन के 13 नवंबर को दिए संयुक्‍त बयान के जवाब में आई है। संयुक्‍त बयान में भारत-ब्रिटेन ने कहा था कि नेपाल में संविधन स्‍थायी और समावेशी होना चाहिए।

नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने राष्‍ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में सिर्फ इस बयान पर ही प्रतिक्रिया नहीं दी है, बल्कि ईंधन, दवा और अन्‍य सामग्री की सप्‍लाई अघोषित तौर पर रोके जाने को लेकर भी भारत की आलोचना की है। उन्‍होंने कहा कि इंडिया की ओर से जो ब्‍लॉकेज की गई है, उससे यहां संकट पैदा हो रहा है। स्‍कूल के छात्रों से लेकर गर्भवती महिलाओं तक सभी परेशान हैं। किसी को दवा नहीं मिल पा रही है, तो किसी को खाद्य सामग्री। केपी ओली ने कहा कि भारत की ओर से की गई ब्‍लॉकेज ने दोनों देशों के संबंधों पर नेगेटिव इम्‍पैक्‍ट डाला है। उन्‍होंने कहा कि इस समय देश में युद्ध जैसे हालात हैं। इसकी वजह से विकास का हर कार्य प्रभावित हो रहा है।

चीन की जमकर तारीफ की

केपी ओली ने ईंधन और अन्‍य जरूरी सामान नेपाल को मुहैया कराने के लिए चीन की जमकर तारीफ की। उन्‍होंने कहा,’ भविष्‍य में हम ट्रेड के लिए किसी एक राष्‍ट्र पर निर्भर नहीं रहेंगे। मौजूदा समस्‍या से हमें यही सबक मिला है। अब समय आ गया है कि हम आत्‍मनिर्भर बनें।’ ओली वादा किया कि उनकी सरकार साल में सोलर एनर्जी से 200 मेगावॉट बिजली पैदा करेगी। गौरतलब है कि नेपाल में इन दिनों मधेशी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि नए संविधान में उनके साथ न्‍याय नहीं किया है। इसी वजह से उन्‍होंने भारत-नेपाल सीमा को ब्‍लॉक कर दिया है। विरोध प्रदर्शनों के कारण भारत के ट्रक नेपाल नहीं जा पा रहे हैं, जिससे वहां ईंधन और अन्‍य जरूरी सामग्री की किल्‍ल्‍त हो रही है। हालांकि, भारत अपना रुख कई बार स्‍पष्‍ट कर चुका है, लेकिन नेपाल बार-बार यही आरोप लगा रहा है कि भारत सरकार जानबूझकर ऐसा कर रही है।

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  1. E
    eksanghi
    Nov 16, 2015 at 1:44 pm
    ये नेपाली बोका को सबकुछ मुफ्त में चाहये
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    Reply
    1. H
      Himal
      Nov 30, 2015 at 7:24 am
      धोती. .वीक मांगना काम है गुलामी...
      (0)(0)
      Reply
      1. S
        shulpani mishra
        Nov 16, 2015 at 1:42 pm
        नेपाल से संबंध बिगड़ने का मतलब है आतंकवाद का एक बड़ा पनाहगाह तैयार होना...अत: प्रधानमंत्री जी नेपाल पर ध्यान दीजिए.
        (1)(1)
        Reply
        1. S
          shulpani mishra
          Nov 16, 2015 at 1:42 pm
          नेपाल से संबंध बिगड़ने का मतलब है आतंकवाद का एक बड़ा पनाहगाह तैयार होना...अत: प्रधानमंत्री जी नेपाल पर ध्यान दीजिए.
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          Reply
          1. A
            atul anjan
            Nov 17, 2015 at 4:21 pm
            मोदी जी रहते तो विदेश में ही लेकिन फिर भी विदेश niti चौपट ho रही है
            (1)(0)
            Reply
            1. A
              amit upadhyay
              Nov 30, 2015 at 8:13 am
              नेपाल आतंकवाद का घर है नेपाल पाकिस्तान और चीन के साथ मिल कर बोहोत साडी आतंकारी घाना को अंजाम देने क फ़िराक मैं हैं . भारतीयों के साथ नेपाल में बोहोत ही ज्यादा दुर्वयवहार किया जाता है . नेपाल को अगर भारत सरकार ने अड़े हटो नहीं लिया तोह नेपाल कल क दिन में पाकिस्तान से भी खतरनाक साबित हो सकता है ..
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              Reply
              1. P
                pankaj
                Nov 30, 2015 at 11:28 am
                भारत न कभी नेपाल का बिरोधी रहा है न कभी रहेगा. कुछ लोग जान बुझ कर ये दिखाने की कोशिस कर रहे है की भारत नेपाल के बिरोध स्वरुप अपने यहाँ ट्रको की आवा जाही पर रोक लगा रहा है. पर ट्रक नेपाल में चल रहे गृह युद्ध के कारण वहा दाखिल नहीं हो पा रहे है. नेपाल की एकता और अखंडता में ही भारत का हित है. भारत इस मसले पर अपना पक्ष रख चूका है पर नेपाल का सत्ता प्रतिष्ठान इस बात को समझने की कोशिस नहीं कर रहे है और भारत बिरोधी व्यान दे रहे है. नेपाल जब जब संकट में फसा है भारत ने हमेशा उसकी मदद ही की है.
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                Reply
                1. K
                  keshav
                  Nov 30, 2015 at 6:12 am
                  मुफदमे सामान महि मागाहै । पैंसे देकर खरिदरहा था लेकिन हात्तिका दिखाना ओ चपाना दात कि तरह भारतने आपना असलियत देखाया पत्रकार महोदयनेभि अपना धर्म अच्छेसे नहि निभाया बल्की यलो जर्नलिजम करनेमे लगें यहि है हिन्दुस्तानका असलीयत ..............
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                  Reply
                  1. S
                    surya prbhu
                    Nov 29, 2015 at 8:23 am
                    मुख सम्हालकर बोल !!! हम अबी तक किसीको गुलामी नै हुवाथा जब की तुम लोक ब्रिटिश का धोती सम्हालता
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                    Reply
                    1. B
                      Balram bk
                      Dec 1, 2015 at 2:47 am
                      Bharat ko madesiyo ko samjhauuta nahi dena chahi ya q ki y Nepal ka personal mamla hai ham jante hai ki bharat ne hamri kafi madat ki hai lekin abki baar kuch accha nahi kar raha hai bharat nepal k satha bharat hamra padosi muluk hai hame milakar rahena chahi ya
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                      Reply
                      1. R
                        rk
                        Nov 17, 2015 at 12:34 pm
                        Nepal's new consution has existed after approval of 91 % of CA members. It was implemented by president himself who is a madhesi himself, witnessed by another madesi vice president. This blockade has been imposed not by India but only by Modi government. All Nepalese are now in difficulties but still we will not surrender to Indian government's evil motif to interfere water resources of Nepal in only India's favor. Nepal is NOT India's colony. It is a sovereign Nation Nepal !!
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                        Reply
                        1. सुनील
                          Nov 16, 2015 at 3:08 pm
                          ईन्डिया नेपाल को क्या क्या चिज मुफ्त मे देति है ?
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                          1. T
                            taranath rimal
                            Nov 29, 2015 at 5:29 pm
                            india ko hum udadenge
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