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डोकलाम विवाद में अटका माउंट एवरेस्ट को मापने का अभियान, नेपाल सरकार सर्वे ऑफ इंडिया के काम से झाड़ा पल्ला

विदेश मंत्रालय के जरिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया और जमीनी स्तर का काम शुरू किया गया। इस बीच, डोकलाम विवाद शुरू हो गया और नेपाल सरकार ने इसपर चुप्पी साध ली है। आगे का काम रोक दिया गया है।
Author नई दिल्ली | August 14, 2017 01:48 am
माउंट एवरेस्ट या माउंट कोमोलांगमा (एवरेस्ट का तिब्बती नाम)। (AP Photo/Tashi Sherpa)

डोकलाम विवाद के कारण माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई मापने का महत्त्वाकांक्षा अभियान अटक गया है। भारत और नेपाल के इस साझा मिशन पर भारत सरकार की एजंसी सर्वे आॅफ इंडिया काम कर रही थी। नेपाल सरकार की अपील पर भारतीय एजंसी इस काम के लिए तैयार हुई थी। इसके लिए विदेश मंत्रालय के जरिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया और जमीनी स्तर का काम शुरू किया गया। इस बीच, डोकलाम विवाद शुरू हो गया और नेपाल सरकार ने इसपर चुप्पी साध ली है। आगे का काम रोक दिया गया है। भारत और नेपाल के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम को दोनों देशों की सरकारों से आगामी निर्देश का इंतजार है। सर्वे आॅफ इंडिया की इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना के तहत माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई को फिर से मापने की योजना है। सर्वे आॅफ इंडिया के वैज्ञानिक नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर यह काम करने में जुटे थे। इस मिशन का मकसद अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय द्वारा जाहिर किए गए एक संदेह को दूर करना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह आशंका जताई गई है कि नेपाल में 25 अप्रैल, 2015 को आए भूकम्प के कारण माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई में बदलाव आ गया होगा।

नेपाल सरकार की पहल पर सर्वे आॅफ इंडिया ने विदेश मंत्रालय के जरिए इस मिशन को लेकर विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया था। आधिकारिक रूप से माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848 मीटर है। 1955 में सर्वे आॅफ इंडिया ने माउंट एवरेस्ट की यह ऊंचाई मापी थी और नेपाल सरकार ने इस शोध को मान्यता प्रदान की थी। सर्वे आॅफ इंडिया दुनिया की सबसे ऊंची चोटी की लंबाई मापने की यह परियोजना नेपाल के साथ मिलकर पूरा करना चाहता है। लेकिन भारत-चीन के बीच तनाव के मौजूदा माहौल में नेपाल ने चुप्पी साध ली है। भारतीय अधिकारी इस चुप्पी को नेपाल की बाकी पेज 8 पर भारत से बढ़ती दूरी और चीन से बढ़ती नजदीकी से जोड़कर देख रहे हैं। माउंट एवरेस्ट नेपाल और चीन की सीमा पर है। 1767 में स्थापित हुआ सर्वे आॅफ इंडिया अपनी 250वीं वर्षगांठ के मौके पर इस परियोजना पर काम कर इस मौके को यादगार बनाना चाहता था। इसी कारण एवरेस्ट की ऊंचाई में फर्क आने को लेकर जब संदेह जताए गए तो एवरेस्ट की ऊंचाई मापने के नेपाल के प्रस्ताव पर सर्वे आॅफ इंडिया सहमत हो गई। इस काम में नेपाल के वैज्ञानिक भी शामिल किए गए हैं। अब जबकि, पिछले तीन महीने से इस काम के बारे में नेपाल का रवैया ठंडा दिखा तो सर्वे आॅफ इंडिया ने भारतीय विदेश मंत्रालय के जरिए नेपाल के विदेश मंत्रालय से उनकी सरकार का रुख पूछा है। सर्वेयर जनरल आॅफ इंडिया मेजर जनरल वीपी श्रीवास्तव ने कहा, ‘विदेश मंत्रालय के जरिए नेपाल को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अभी तक हमें कोई जवाब नहीं मिला है। इस मिशन में फिलहाल कोई प्रगति नहीं हो पाई है।’

श्रीवास्तव से पहले इस पद पर रहे स्वर्ण सुब्बा राव ने यह प्रस्ताव तैयार किया था। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच तनाव के कारण ही नेपाल जवाब देने में काफी वक्त ले रहा है। भारत और चीन जैसे उसके दो बड़े पड़ोसी देशों के बीच तनाव चरम पर है। ऐसे में नेपाल नहीं चाहता कि वह किसी भी परियोजना में भारत के साथ खड़ा नजर आए। जनरल श्रीवास्तव के अनुसार, अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नेपाल की ओर से नहीं दी गई है। यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि नेपाल की चिंताएं क्या हैं। चीन हिमालय क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। नेपाल पर उसका प्रभाव स्पष्ट है।

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