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‘भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में अहम भूमिका निभा रहा है अमेरिका’

नवाज़ शरीफ के विशेष दूत मुशाहिद हुसैन ने आगाह किया कि पाकिस्तान के साथ युद्ध भारत की अर्थव्यवस्था को 10 साल पीछे धकेल देगा, जो मोदी नहीं चाहते हैं।
Author वॉशिंगटन | October 8, 2016 16:05 pm
सीमा पर तैनात सुरक्षाबल का एक जवान। (Photo:AP)

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दूतों ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ वार्ता शुरू करने और तनाव कम करने के लिए अमेरिका ‘भारत पर दबाव बनाने में सकारात्मक भूमिका’ निभा रहा है। कश्मीर मामलों पर शरीफ के विशेष दूत मुशाहिद हुसैन सैयद ने अमेरिका की अपनी पांच दिवसीय यात्रा की समाप्ति पर कहा, ‘हमें लगता है कि तनाव कम करने और पाकिस्तान पर बात करने के बजाय उसके साथ बातचीत शुरू करने के लिए भारत पर दबाव बनाने में अमेरिका की एक सकारात्मक भूमिका है।’

कश्मीर मामले पर एक अन्य दूत शजरा मंसब के साथ यहां आये सैयद ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का फोन करना इस बात का एक प्रतीक है और बाद में भी फोन पर बात हुई। इस प्रकार से फोन करने का उद्देश्य तनाव कम करना था।’ उन्होंने कहा कि मोदी ‘उस भारतीय दिल्ली प्रतिष्ठान से नहीं है, जहां आपको हमेशा नाराज रहने वाले और शीत युद्ध वाली पुरानी मानसिकता वाले ऐसे वृद्धजन मिलते हैं जिनके चेहरे पर कोई मुस्कुराहट नहीं होती, मोदी इस लिहाज से बाहर के व्यक्ति हैं।’

सैयद ने कहा, ‘मुझे लगता है कि दक्षेस सम्मेलन इस्लामाबाद में होगा। मोदी वहां जाएंगे और नवाज शरीफ से गले मिलेंगे। मुझे लगता है कि, कि मोदी को एहसास होगा कि यही आगे जाने का ठीक रास्ता है।’ सैयद ने कहा, ‘मोदी में अचंभित करने की क्षमता है। उनके बारे में एक अच्छी बात यह है कि वह यू-टर्न लेने के मामले में बहुत लचीले हैं। इसलिए मुझे हमारे संबंधों में शायद आने वाले महीनों में एक अच्छे यू-टर्न की उम्मीद है और हम दक्षिण एशिया के साथ संबंधों में सुखद आश्चर्य देख सकते हैं, क्योंकि मोदी और शरीफ के बीच अच्छे संबंध हैं तथा मुझे लगता है कि मोदी अपने लोगों को इस यू-टर्न के लिए तैयार कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘मोदी महसूस करते हैं कि इससे दो महत्वपूर्ण बुनियादी हित जुड़े हैं। पहला यह है कि पाकिस्तान के साथ संबंध और कश्मीर विवाद भारत की प्रगति में सबसे बड़ी रुकावट हैं। भारत आगे बढ़ना चाहता है, परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शामिल होना चाहता है। आप तब तक शामिल नहीं हो सकते, जब तक पाकिस्तान के साथ आपके संबंध बेहतर नहीं हो जाते।’ सैयद ने आगाह किया कि पाकिस्तान के साथ युद्ध भारत की अर्थव्यवस्था को 10 साल पीछे धकेल देगा, जो मोदी नहीं चाहते हैं।

मंसब ने कहा, ‘मोदी यह नहीं चाहेंगे। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ना भारत के लिए विनाशकारी, उसे कमजोर बनाने वाला और हानिकारक होगा। हम भारत की युद्ध संबंधी बयानबाजी का जवाब युद्ध संबंधी बयानबाजी से नहीं देना चाहते। हम भारत को उसके लहजे में जवाब नहीं दे रहे। हम अब भी शांति चाहते हैं।’ सैयद ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमने अमेरिका को झकझोर दिया है। मुझे लगता है कि यही बताना मकसद था कि देखो, (कश्मीर में) लोकप्रिय, देशज और व्यापक विद्रोह है। इसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं है। भारत दबाव बनाने और माहौल गरम करने का प्रयास कर रहा है, जो दक्षिण एशिया की शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए हानिकारक है, क्योंकि यह परमाणु युद्ध को हवा दे सकता है। हम यह नहीं चाहते। कोई लक्ष्मण रेखा पार नहीं होनी चाहिए।’

उन्होंने कहा ‘तीसरी बात यह कि हमने कहा है कि शांति का वर्गीकरण नहीं किया जा सकता। शांति अविभाजित होती है, चाहे वह कश्मीर हो या काबुल हो। मैं सोचता हूं कि अंतत: यह संदेश स्पष्ट रूप से सुना गया है।’ उन्होंने कहा कि उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के लहजे में बदलाव देखा है। सैयद ने कहा, ‘वे जान गए हैं कि सिन्धु जल समझौते और बलूचिस्तान एवं ‘गिलगिस्तान’ जैसे मुद्दों पर दुर्भाग्य से की गयी कुछ गैरजिम्मेदाराना टिप्पणियों पर पाकिस्तान की शिकायतें वैध हैं।’

उल्लेखनीय है कि दोनों दूतों ने राष्ट्रपति बराक ओबामा के विशेष सहायक पीटर लावोय से मुलाकात की थी। व्हाइट हाउस ने बैठक का कोई ‘रीडआउट’ जारी करने से इंकार कर दिया था। सैयद ने बताया कि उन्होंने अपनी पांच दिवसीय वाशिंगटन यात्रा में थिंक-टैंकों, सरकारी अधिकारियों, मीडिया के कार्यक्रमों और कश्मीरी मूल के अमेरिकियों के साथ वार्ता समेत 12 बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम किए। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध परिवर्तनकाल से गुजर रहे हैं।

सैयद ने कहा, ‘हमें लगता है कि ओबामा प्रशासन हमारे क्षेत्र को समझने में असफल रहा है। उन्हें पाकिस्तान और अफगानिस्तान की नीतियों का बिल्कुल पता नहीं था। वह भ्रमित भी हैं।’ पूर्व पत्रकार सैयद ने कहा, ‘अमेरिका को क्षेत्र में, जिसे हम ‘ग्रेटर साउथ एशिया’ कहते हैं, वहां शांति स्थापित करने, आतंकवाद का मुकाबला करने, परमाणु अप्रसार और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग के लिए पाकिस्तान की जरूरत है।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका का नया प्रशासन ओबामा प्रशासन से अलग होगा। ‘उम्मीद है कि उसकी अधिक संतुलित, रणनीतिक, स्थायी और सुसंगत नीति होगी।’

दोनों दूतों ने कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर एक डोजियर भी सौंपा। सैयद ने कहा, ‘अमेरिकी प्रशासन ने हमें भरोसा दिया है कि भारत में मानवाधिकारों से संबंधित अगली रिपोर्ट में इस डोजियर पर ध्यान दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को भरोसा दिलाया है कि वह कश्मीर मामले पर मोदी पर दबाव बनाएगा। सैयद ने कहा, ‘हम मोदी की ओर से इस मुद्दे पर यू-टर्न का इंतजार कर रहे हैं। मुझे लगता है कि यह एक सकारात्मक यू-टर्न होगा। संबंधों को सामान्य करने की पहल करना और दोनों देशों के बीच तनाव कम करना इसका पहला संकेत होगा।’

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