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‘अनसुलझे कश्मीर मुद्दा की वजह से भारत संराष्ट्र सुरक्षा परिषद-एनएसजी का सदस्य नहीं’

नवाज़ शरीफ के दूत ने कहा, 'अगर कश्मीर का मुद्दा हल हुआ होता तो शशि थरूर आज संयुक्त राष्ट्र के महासचिव होते।'
Author वॉशिंगटन | October 6, 2016 12:25 pm
21 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने के बाद चश्मा हटाते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ। (Photo- REUTERS/File)

कश्मीर मुद्दा हल करने में तथा पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने में भारत की नाकामी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और एनएसजी (परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह) में उसके स्थायी सदस्य बनने की राह में और खुद भारत के उदय में ‘बड़ी बाधा’ है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के दूतों ने बुधवार (5 अक्टूबर) को यह दावा किया। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के, विशेष कश्मीर दूत मुशाहिद हुसैन सईद ने कहा ‘(शांति वार्ता के लिए) लाभांश क्या है। कश्मीर मुद्दे के हल और पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने में असफलता दक्षिण एशिया में शांति सुरक्षा और स्थिरता की राह में बड़ा रोड़ा है। यह खुद भारत के उदय में बाधक है।’ सईद के साथ एक और कश्मीर दूत शजरा मनसब भी इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं। उनका यह दौरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कश्मीर में वर्तमान स्थिति के लिए और घाटी में मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बताने के पाकिस्तान के प्रयास का हिस्सा है।

एक शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल में संवाददताओं के सवालों का जवाब दे रहे सईद ने चेतावनी दी कि कश्मीर मुद्दे के हल और पड़ोसी देश से संबंध सुधारने में नयी दिल्ली की कथित निष्क्रियता के कारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य बनने से भारत को रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा ‘कश्मीर मुद्दे का हल ना होना भारत के आर्थिक विकास में बाधक है। अगर कश्मीर का मुद्दा हल हुआ होता तो शशि थरूर आज संयुक्त राष्ट्र के महासचिव होते। अगर कश्मीर मुद्दा हल हुआ होता तो भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में होता।’

सईद ने कहा ‘अगर कश्मीर मुद्दा हल हो गया होता तो भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होता। लेकिन जब तक आपका अपने पड़ोसी से विवाद रहेगा, संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र का आपने कार्यान्वयन करने का वादा किया और अपने फायदे को देखते हुए आपने उसका कार्यान्वयन नहीं किया तो ऐसे में आप वैश्विक राजनीति की दुनिया में अपने मन की नहीं कर सकते।’ एक अन्य सवाल के जवाब में सईद ने चेताया कि सिंधु जल संधि का कोई भी उल्लंघन ‘युद्ध की कार्रवाई’ और ‘अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन’ माना जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत चीन से निकलने वाली नदी ब्रह्मपुत्र में वैसी ही समस्या का सामना कर सकता है। उन्होंने कहा कि इसका नुकसान भारत को ही होगा।

सईद ने कहा ‘यह केवल भारत और पाकिस्तान के बीच का मुद्दा नहीं है। इसमें विश्व बैंक भी जुड़ा है। अगर आप यह करते हैं तो हमें मुश्किल होगी। लेकिन एक बात मत भूलिये कि ऐसी ही स्थिति में चीन से आपको मुश्किल होगी। ब्रह्मपुत्र नदी वहां से निकलती है। नुकसान आपको ही होगा। यह बहुत मुश्किल होगा।’ पूर्व में सईद और मनसब दोनों ने ही कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात दोहराई और मारे गए आतंकवादी बुरहान वानी को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ बताया। सईद ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में हाल ही में सकारात्मक घटनाक्रम हुए और दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने संपर्क बनाए।

बहरहाल, दूतों को पाकिस्तान में बलूचिस्तान, सिंध और कश्मीर के, पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर मीडिया के कड़े सवालों का सामना करना पड़ा। मीडिया ने पाकिस्तानी प्रतिष्ठान पर पाक सेना और आईएसआई द्वारा मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन, न्यायेत्तर हत्याओं, गिरफ्तारियों और प्रताड़ना के आरोप लगाए तथा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के संदर्भ में पाकिस्तान के ‘दोहरेपन’ पर सवाल उठाए।

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