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नरेंद्र मोदी: स्थायी सदस्यता हमारा हक

प्रमुख फ्रांसीसी कंपनी एअरबस ने शनिवार को कहा कि वह अपनी भारतीय आउटसोर्सिंग को बढ़ाकर दो अरब डालर करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कंपनी के कारखाने का दौरा करने के मौके पर कंपनी ने भारत में अपनी विनिर्माण गतिविधियां बढ़ाने में दिलचस्पी दिखाई। प्रधानमंत्री ने पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए सुरक्षा परिषद […]
Author April 12, 2015 08:45 am
जर्मनी में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे नेताजी के पौत्र

प्रमुख फ्रांसीसी कंपनी एअरबस ने शनिवार को कहा कि वह अपनी भारतीय आउटसोर्सिंग को बढ़ाकर दो अरब डालर करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कंपनी के कारखाने का दौरा करने के मौके पर कंपनी ने भारत में अपनी विनिर्माण गतिविधियां बढ़ाने में दिलचस्पी दिखाई। प्रधानमंत्री ने पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग की। उन्होंने कहा कि यह भारत का हक है।

मोदी ने तुलुज में कंपनी के कारखाने का दौरा किया जहां विमान बनते हैं। कंपनी के अधिकारियों ने उन्हें परिचालन व अन्य गतिविधियों की जानकारी दी। एअरबस के ग्रुप सीईओ टाम एंडर्स ने उनकी अगवानी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी कर हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं और भारत के साथ मजबूत आर्थिक संबंध बनाने की अपनी इच्छा से हमने उन्हें अवगत कराया।

भारत हमारी अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में पहले से ही केंद्रबिंदु है और हम अपने उत्पादों में इसके योगदान को और बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ पहल का समर्थन करते हैं, हम भारत और दुनिया के लिए भारत में विनिर्माण को तैयार हैं।

इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने ट्वीट किया, ‘पांच साल में 500 फीसद बढ़ोतरी। एअरबस ने प्रधानमंत्री से कहा : भारत से आउटसोर्सिंग 40 करोड़ डालर से बढ़ाकर दो अरब डालर की जाएगी।’

मालूम हो कि एअरबस भारत में दो अभियांत्रिकी केंद्र पहले ही चला रही है। इनमें से एक नागर विमानन और दूसरा रक्षा क्षेत्र पर केंद्रित है। इसके अलावा उसका एक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी केंद्र भी है। इन केंद्रों में कुल मिलाकर 400 कुशल लोग कार्यरत हैं।

प्रधानमंत्री ने पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए स्थायी सदस्यस्ता की जोरदार पैरवी की और कहा कि भारत को वैश्विक शांति में अपार योगदान के लिए उसका ‘हक’ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वो दिन बीत गए जब भारत को हाथ फैलाना पड़ता था। अब हम हमारा अधिकार चाहते हैं। किसी दूसरे के पास ऐसा नैतिक बल नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जब अपनी 70वीं वर्षगांठ मनाए तो वह इस मुद्दे पर अपने रुख पर पुनर्विचार करे। उन्होंने भारत की स्थायी सदस्यता के दावे पर इस विश्व निकाय से विचार करने की अपील करते हुए कहा कि यह भारत जैसे शांति प्रिय देश को मान्यता देने का एक अवसर है।

समारोह में मौजूद करीब 2000 लोगों के ‘मोदी-मोदी’ के उद्गारों के बीच उन्होंने हिंदी में अपनी बात रखते हुए कहा कि दुनिया को यह समझना चाहिए और भारत के प्रति दृष्टिकोण बदलने की जरूरत है। भारत कभी भी किसी देश के खिलाफ आक्रमणकारी नहीं रहा और उसका दृढ़ विश्वास है कि दुनिया को युद्ध के साये से मुक्ति पानी चाहिए। उन्होंने कहा- कभी-कभार इतिहास को भुला दिया जाता है। जो लोग इतिहास भूल जाते हैं, वे इसे लिखने का अपना अधिकार खो देंगे।

प्रधानमंत्री लिली स्थित युद्ध स्मारक भी गए भी गए जहां उन्होंने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान फ्रांस के पक्ष में लड़ते हुए अपनी जान न्योछावर करने वाले लगभग 10 हजार भारतीय जवानों को श्रद्धांजलि दी। मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं जो शहीदों को श्रद्धांजलि देने फ्रांस स्थित इस युद्ध स्मारक आए। न्यूवी शापेल स्थित शहीद स्मारक के अधिकारियों ने उन्हें इसके इतिहास के बारे में जानकारी दी।

प्रधानमंत्री ने यहां आगंतुक पुस्तिका में लिखा, ‘शहीद होने पर स्वर्ग मिलेगा। विजयी होने पर संसार का आनंद मिलेगा। मैं यहां न्यूवी शापेल में भारतीय स्मारक में भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करके सम्मानित महसूस कर रहा हूं।’ उन्होंने कहा, ‘हमारे सैनिक इस महान युद्ध में विदेशी जमीन पर लड़े और अपने समर्पण, वफादारी, साहस और बलिदान के लिए दुनियाभर में सराहना प्राप्त की। मैं उनका नमन करता हूं।’

मोदी ने ‘शहीद अमर रहें’ जैसे नारे लगाने वालों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने खुद भी कुछ समय तक नारे लगाए। यहां युद्ध स्मारक पर प्रधानमंत्री ने भारत और महान युद्ध पर इंडियन डिप्लोमेसी का एक प्रकाशन भेंट किया। मोदी ने भारी बारिश के बीच स्मारक का दौरा किया और फिर पेरिस लौट आए।

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