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आतंकवाद के ख़िलाफ़ मोदी ने किया आसियान संग सहयोग बढ़ाने का आह्वान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक आतंकवाद की चुनौतियों से निपटने के लिए आसियान के साथ सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया, साथ ही क्षेत्रीय विवादों का निपटारा..
Author कुआलालंपुर | November 21, 2015 19:22 pm
आसियान सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फोटो)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक आतंकवाद की चुनौतियों से निपटने के लिए आसियान के साथ सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया, साथ ही क्षेत्रीय विवादों का निपटारा शांतिपूर्ण तरीके से करने की जरूरत को भी रेखांकित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने 10 सदस्यीय समूह के साथ समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती निरोधक एवं मानवीय और प्राकृतिक आपदा राहत जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग के लिए विशिष्ठ योजना बनाने का भी सुझाव दिया।

आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में अपनी शुरुआती टिप्पणी में मोदी ने कहा, ‘आतंकवाद एक बड़ी वैश्विक चुनौती बनकर उभरा है जो हम सभी को प्रभावित कर रहा है। हमारा आसियान के सदस्यों के साथ शानदार द्विपक्षीय सहयोग है। और हमें यह देखना चाहिए कि हम अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र संधि को मंजूर करने की दिशा में सहयोग प्रदान करने समेत क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना सहयोग किस तरह से बढ़ा सकते हैं।’

आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने यहां आए तीन दिवसीय यात्रा के दौरान शनिवार को मोदी ने कहा, ‘तेजी से बदलता हमारा क्षेत्र अनिश्चय के समय से निकलकर एक शांतिपूर्ण और खुशहाल भविष्य की ओर जा रहा है। हम अपने क्षेत्र को एक शक्ल के रूप में परिभाषित करने के लिए आसियान के नेतृत्व की ओर देख रहे हैं।’

दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय विवादों के संदर्भ में मोदी ने कहा, ‘भारत 1982 के संयुक्त राष्ट्र संधि पर समु्रदी कानून समेत सभी स्वीकार्य अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप आसियान के साथ नौवहन, उड़ान भरने, निर्बाध वाणिज्य की स्वतंत्रता को प्रतिबद्ध है। क्षेत्रीय विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से ही सुलझाना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि दक्षिण चीन सागर के विवाद से जुड़े सभी पक्ष दक्षिण चीन सागर में पक्षों के आचार व्यवहार संबंधी घोषणा को लागू करने के दिशानिर्देशों का पालन करेंगे और सर्वानुमति के आधार पर जल्द से जल्द एक आचार संहिता को अपनाने के प्रयासों को दोगुणा करेंगे।

कनेक्टिीविटी को खुशहाली का साझा रास्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत-म्यामां-थाईलैंड त्रिपक्षीय हाईवे परियोजना की अच्छी प्रगति हो रही है और इसे 2018 तक पूरा हो जाना चाहिए। मोदी ने कहा कि भारत शीघ्र ही सभी आसियान देशों को इलेक्ट्रॉनिक वीजा की सुविधा प्रदान करेगा।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवोन्मेष को भारत-आसियान सहयोग और आर्थिक साझेदारी का प्रमुख स्तम्भ बताते हुए उन्होंने कहा, ‘हम आसियान भारत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास कोष को वर्तमान 10 लाख डालर से बढाकर 50 लाख डालर करेंगे।’

उन्होंने कहा कि भारत का इरादा एक आसियान-भारत नवोन्मेष प्लेटफार्म बनाना है जिससे की कम लागत वाली प्रौद्योगिकियों के वाणिज्यिकीकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को सुगम बनाया जा सकेगा।

उल्लेखनीय है कि आसियान में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यामां, फिलिपीन, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम भारत और आसियान के बीच भौतिक एवं डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक अरब डॉलर की ऋण सुविधा उपलब्धता का प्रस्ताव करते हैं।’

उन्होंने कहा, ‘आर्थिक साझेदारी की क्षमताओं का अभी पूरा दोहन नहीं किया गया है और मुझे विश्वास है कि जैसे जैसे हमारी अर्थव्यवस्थाएं बढ़ेंगी, हमारा व्यापार और निवेश बढ़ेगा।’

उन्होंने कहा, ‘हम अपने दायरे में सहयोग की प्रगति से विश्वास प्राप्त कर सकते हैं। जुलाई 2015 में सेवा एवं निवेश समझौतों के लागू हो जाना इस दिशा में एक बड़ा कदम है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आसियान-भारत वस्तुओं और सेवाओं सहित निवेशों के क्षेत्र में संतुलित एवं महत्वाकांक्षी क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक समझौते की वार्ताओं की प्रगति को लेकर आशान्वित है। आसियान का भारत छठा सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार है। भारत और आसियान के बीच 2014-15 में 76.52 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। आसियान देशों को भारत का निर्यात 31.81 अरब डॉलर और इस समूह से आयात 44.71 अरब डॉलर का हुआ।

आसियान अर्थव्यवथा के गतिशीलता और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने को रेखांकित करते हुए मोदी ने कहा, ‘मुझे कोई संदेह नहीं कि हम अपने 1.9 अरब लोगों की खुशहाली को पुन: बहाल करेंगे।’

उन्होंने कहा, ‘मुझे इस बात की खुशी है कि अस्थायी गिरावट के बाद हमारा व्यापार 2014-15 में 76.5 अरब डॉलर तक बढ़ गया है और दोनों दिशाओं में निवेश भी बढ़ा है।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर पहुंचने के साथ भारत विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने कहा, ‘हमारी मु्द्रास्फीति घटी है और हमारा राजकोषीय और बाह्य घाटा भी कम हुआ है। और व्यापार एवं अंतरराष्ट्रीय विश्वास में जबर्दस्त वृद्धि आई है। भारत में बदलाव का पैमाना बहुत ही विशाल है और साथ ही इसके आर्थिक अवसरों का आकार भी बहुत विशाल है।’

मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत साहस के साथ आर्थिक सुधारों को गति देता रहेगा। उन्होंने कहा, ‘अब हमारे यहां एक ऐसा वातावरण है जो खुला और स्वागतयोग्य है। इसकी झलक विश्व बैंक के कारोबार सुगम बनाने से संबंधित रिपोर्ट में भारत की रैकिंग में जबर्दस्त उछाल आने से मिलती है।’

उन्होंने कहा कि आसियान क्षेत्रीय सहयोग और एकजुटता को बढ़ाने में प्रेरणादायक नेतृत्व प्रदान कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘मैं भारत और आसियान को उम्मीदों के दो चमकते प्रकाशपुंज के रूप में देखता हूं।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत आसियान सहयोगात्मक परियोजना को वियतनाम में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की प्रगति साकार रूप ले रही है और मैं आपको इसे शीघ्र पूरा होने का विश्वास दिलाता हूं।

उन्होंने कहा, ‘भारत आसियान को अपने स्वदेशी विकसित जीपीएस से लैस भू दिशा सूचक यानी गगन सेवाओं को उपलब्ध कराने की पेशकश करता है।’

आसियान के साथ उन्होंने वहनीय समु्द्री विकास या ब्लू इकोनामी के क्षेत्र में सहयोग का प्रस्ताव भी रखा।
प्रधानमंत्री ने समु्द्र को भविष्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि यह खाद्य सुरक्षा, दवा और स्वच्छ ऊर्जा का भी स्रोत होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने कई समु्द्री देशों के साथ अपने सहयोग को बढ़ाया है।

अनुसंधान एवं नवोन्मेष के क्षेत्र में अपने प्रयासों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि इस दिशा में वृहद शहरीकरण, बड़े शहरों, भविष्य के लिए कौशल, खाद्य सुरक्षा और जल और वहनीय स्वास्थ्य सेवाओं जैसी साझा चुनौतियों को लेकर हमें मिलकर प्रयास करने चाहिए।

जलवायु परिवर्तन को वैश्विक चिंता का विषय बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 2022 तक 175 गिगावाट अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता हासिल करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। इसके अलावा 2030 तक 40 प्रतिशत गैर जीवाश्म स्रोतों से ऊर्जा प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।

मोदी ने कहा कि उन्होंने 122 सौर ऊर्जा सम्पन्न देशों का अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन बनाने का प्रस्ताव रखा है। फ्रांस के राष्ट्रपति और मैं पेरिस में 30 नवंबर को इसकी शुरुआत करेंगे। प्रधानमंत्री ने शिलांग में पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय में आसियान अध्ययन केंद्र खोलने का प्रस्ताव किया।

इससे पहले रेनिसेंस होटल पर भारतीय समुदाय के लोगों ने मोदी का जबर्दस्त स्वागत किया। मलेशिया में भारतीय मूल के लगभग 24 लाख लोग रहते हैं जो उस देश की कुल आबादी का 8 प्रतिशत है।

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