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पाक‍िस्‍तान में पांव जमाने का चीन का मास्‍टर प्‍लान लीक: लीज पर लेगा हजारों एकड़ जमीन, पेशावर से कराची तक सड़कों पर चौबीसों घंटे वीड‍ियो र‍िकॉर्डिंग

चीन की योजना है कि वो चीनी संस्कृति और चीनी इन्टरप्राइजेज के जरिए पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था के हर मोड़ तक अपनी पहुंच बनाए।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (दाएं) और पाकिस्तान के प्रधानंमत्री नवाज शरीफ। (फाइल फोटो)

पाकिस्तान और चीन की दोस्ती दुनिया के लिए नई नहीं है लेकिन पाकिस्तान में बन रहे चीन-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) को लेकर पाकिस्तानी सरकार कुछ ज्यादा ही उतावलेपन में है। इस बीच, चीन में चल रहे वन बेल्ट, वन रोड समिट में पाकिस्तान और चीन के बीच सबसे हॉट एजेंडा सीपीईसी के लॉन्ग टर्म प्लान को मंजूरी देना है। पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की वेबसाइट पर छपी खबर के मुताबिक चीन ने पाकिस्तान में अपने पांव पसारने का पुख्ता इंतजाम इस कॉरिडोर के सहारे किया है। इस पाकिस्तानी मीडिया को जो पेपर डॉक्यूमेंट हाथ लगे हैं उसके मुताबिक चीन का मास्टर प्लान है कि वो पाकिस्तान में हजारों एकड़ जमीन लीज पर लेगा और उसमें सिंचाई के अलग-अलग तकनीक का इस्तेमाल कर खेती करेगा।

इतना ही नहीं वहां निगरानी का पूरा बंदोबस्त करने की भी चीन की योजना है। इसके तहत पेशावर से लेकर कराची तक शहरों में चौबीसों घंटे वीडियो रिकॉर्डिंग होने वाला सर्विलांस सिस्टम लगाया जाएगा। इसके तहत सड़कों और प्रमुख बाजारों की निगरानी की जा सकेगी। इस इलाके में नेशनल फाइबर केवल बिछाकर न केवल इंटरनेट बल्कि चीनी टीवी ब्रॉडकास्टिंग को भी पाकिस्तान के घर-घर तक पहुंचाने की चीन सरकार की योजना है ताकि चीनी संस्कृति का प्रसार पाकिस्तान के हरेक हिस्से में हो सके।

चीन की योजना है कि वो चीनी संस्कृति और चीनी इन्टरप्राइजेज के जरिए पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था के हर मोड़ तक अपनी पहुंच बनाए। हालांकि, पाकिस्तान के इतिहास में इस तरह के विदेशी निवेश और विदेशी हस्तक्षेप का कोई मिसाल सामने नहीं आया है। पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में चीनी कारोबारी मध्यम और छोटे इन्टरप्राइजेज भी स्थापित करेंगे। इनमें घरेलू उपकरण बनाने की यूनिट के अलावा, चीनी मोबाइल का निर्माण भी शामिल है। इसके अलावा टेलीकम्यूनिकेशन और मेटालर्जिकल सेक्टर में भी चीनी उद्योग लगाएगे जाएंगे ताकि वहां के खनिज संसाधन का दोहन किया जा सके।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का मानचित्र प्रारूप।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे में टेक्सटाइल्स एंड गार्मेंन्ट्स, सीमेंट एंड बिल्डिंग मैटेरियल्स, फर्टिलाइजर एंड एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी से संबंधित प्लांट भी लगाए जाएंगे। इसके लिए वहां नई नीति भी बनाई जा रही है। इसके अलावा वहां इंडस्ट्रियल पार्क, स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाने की भी चर्चा है। इन सबसे अहम है वहां कृषि, वानिकी के साथ-साथ औद्योगिक विकास को रफ्तार देने की। चीन की योजना है कि इस इलाके में रेलवे और हाई स्पीड हाईवे का निर्माण कराया जाय।

चीन की प्रमुख योजनाओं में पाकिस्तानी समुद्री तट का विकास करना शामिल है। इसके तहत वहां नौकायन के लिए मार्ग विकसित करना, रात में मनोरंजन के साधन मुहैया कराना, क्रूज होमपोर्ट्स विकसित करना, सिटी पार्क्स बनाना, पब्लिक स्क्वेयर बनाना, थियेटर और गोल्फकोर्स, स्पा, थियेटर और वाटर स्पोर्ट्स डेवलप करने की भी योजना है। इसके अलावा उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान के पेशावर में पायलट सेफ सिटी बनाने की भी चीन की योजना है।

इसके अलावा उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान के पेशावर में पायलट सेफ सिटी बनाने की भी चीन की योजना है। दोनों देशों के बीच आधिकारिक बातचीत के कागजात से पता चलता है कि पाकिस्तानी जहां ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जल्द से जल्द बनवाने के लिए चीन पर दबाव डाल रहा है  वहीं चीन पूर्वी एक्सप्रेसवे को जल्द से जल्द पूरा कराने का दवाब पाकिसतान पर दे रहा है।

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