December 08, 2016

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विश्व को जल के सहयोग का वाहक बनाने का लक्ष्य बनाना चाहिए: भारत

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Author संयुक्त राष्ट्र | November 23, 2016 13:31 pm
Wikipedia

भारत ने जल संबंधी संघर्षों की संभावना को नकारे नहीं जा सकने की बात रेखांकित करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जल मामलों को ‘‘सुरक्षा के मामले से जोड़ने’’ का रुख अपनाने पर विचार करने के बजाए इसे ‘‘सहयोग का वाहक’’ बनाने का लक्ष्य तय करना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने जल, शांति एवं सुरक्षा पर खुली बहस के दौरान कल यूएनएससी में कहा, ‘‘आधुनिक दुनिया में और अंदरूनी संयोजकता की हमारी मौजूदा समझ एवं हमारी साझी पर्यावरणीय चुनौतियों के मद्देनजर हमें जल मामलों को सुरक्षा के विषय से जोड़ने का रुख अपनाने पर विचार करने के बजाए जल को अंतरराष्ट्रीय संवाद के अहम शब्द के रूप में सहयोग का वाहक बनाने का लक्ष्य तय करना चाहिए।’’
भारतीय राजनयिक ने कहा, ‘‘(सहयोग का रुख अपनाने से वास्तविक अंतरराष्ट्रीय सहयोग विकसित होगा। पानी जैसे जटिल एवं जीवन के लिए अहम मामले पर दूसरा (पानी को सुरक्षा का मामले से जोड़ने का) मार्ग अपनाने से पूरी मानवता के साथ अन्याय होगा।’’
अकबरूद्दीन ने पिछले सात दशक में 60 अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर हुईं 200 संधियों का जिक्र करते हुए कहा कि अनुभव दर्शाता है कि जल निकायों के एक से अधिक देशों की सीमा से गुजरने की प्रकृति के मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है और प्रत्येक विशिष्ट उदाहरण की अपनी अलग विशेषताएं हैं।

उन्होंने कहा कि संबंधित देशों ने अपने सामूहिक हित के विशेष संदर्भों में सहयोग के मार्ग तलाशे हैं। अकबरूद्दीन ने कहा कि भारत कई विभिन्न नदियों के प्रवाह की दिशा में नीचे की ओर और कई में उच्च स्तर की ओर स्थित है और वह एक से अधिक देशों की सीमाएं पार करने वाली नदियों के जल के सहयोगात्मक प्रबंधन संबंधी विषयों से परिचित है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत के 1947 में विभाजन के साथ ही पश्चिम और पूर्व में नदियों का भी विभाजन हो गया था। हमने हमारे पड़ोसियों के साथ साझी नदियों का जल प्रबंधन किया है। एक से अधिक देशों की सीमाओं से गुजरने वाली नदियों के जल आवंटन संबंधी 1966 हेलसिंकी सिद्धांतों के कई साल पहले वर्ष 1960 में ऐतिहासिक सिंधु जल संधि को अंतिम रूप दिया गया।’

अकबरूद्दीन ने कहा, ‘‘इसके अलावा भी जल साझा करने को लेकर हम हमारे पड़ोसियों के साथ सहयोगात्मक प्रयास कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि जल मनुष्य की सुरक्षा समेत मानव अस्तित्व के हर पहलू पर प्रभाव डालता है। जल संबंधी संघर्षों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, ऐसे में यह रेखांकित करना प्रोत्साहित करता है कि कई देशों की सीमाओं से जुड़े मामलों में विशेष नवोन्मेषी सहयोगात्मक दृष्टिकोण विकसित करने को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समग्र अनुभव सकारात्मक रहा है।

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First Published on November 23, 2016 1:30 pm

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