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राजपक्षे का आरोप, देश में लिट्टे का खतरा बढ़ा रही है श्रीलंका की सिरिसेना सरकार

राजपक्षे ने एक उदारवादी तमिल नेता की हत्या की रची गई साजिश के लिए राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।
Author कोलंबो | February 1, 2017 21:38 pm
श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना। (फाइल फोटो)

श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने आरोप लगाया है कि सिरिसेना सरकार ने तमिल बहुल उत्तरी क्षेत्रों में कभी लिट्टे के गढ़ रहे इलाकों में खुफिया चौकसी को कम कर दिया था। दो बार श्रीलंका के राष्ट्रपति रह चुके राजपक्षे ने हाल ही में एक प्रमुख उदारवादी तमिल नेता की हत्या की रची गई साजिश के लिए राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। राजपक्षे ने देश में लिट्टे के साथ चली आ रही ढ़ाई दशक की लंबी लड़ाई का वर्ष 2009 में अंत करवाया था। तमिल नेशनल एलायंस (टीएनए) के सांसद एम ए सुमनथीरन की हत्या की कथित तौर पर साजिश रचने के मामले में श्रीलंका की पुलिस ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के चार पूर्व कैडरों को पिछले महीने गिरफ्तार किया था।

एम ए सुमनथीरन, तमिल अल्पसंख्यक के साथ सुलह करने के लिए सिरिसेना सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। राजपक्षे ने हत्या की साजिश मामले पर टिप्पणी करते हुये कहा, ‘उन्होंने (सिरिसेना सरकार) सैन्य शिविरों को हटा दिया है और खुफिया चौकसी को कम कर दिया है। अब वे उस विवेकरहित कार्रवाई का परिणाम देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने लिट्टे के करीब 12,000 सदस्यों का पुनर्वास किया था और उन्हें वापस समाज की धारा में शामिल कराया था लेकिन सुमनथीरन इस फैसले पर चुप क्यों रहे। राजपक्षे ने कहा, ‘अब वे उनकी रिहाई को लेकर मुझ पर आरोप लगा रहे हैं। ऐसे समय में सुमनथीरन ने कभी नहीं कहा कि उन लोगों को रिहा नहीं किया जाना चाहिए था।

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