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दुनिया की सबसे लम्‍बी रेल टनल पर पहली बार दौड़ी यात्रियों से भरी ट्रेन, बनाने में लगे हैं 17 साल

सुरंग की आधिकारिक ओपनिंग के मौके पर सफर करने के लिए बाकायदा लॉटरी निकाली गई है। 1,30,000 लोगों के बीच में से सिर्फ 500 लकी विनर्स को यह मौका मिला।
Author ज्‍यूरिख | June 1, 2016 18:41 pm
नए सीधे रूट का मतलब होगा कि भारी ट्रेनों को दो या तीन की बजाय सिर्फ एक लोकोमोटिव की जरूरत होगी। (Image by AlpTransit Gotthard AG)

स्विट्जरलैंड में दुनिया की सबसे लम्‍बी और गहरी रेल सुरंग, Gotthard Base Tunnel शुरू हो गई है। आल्‍प्‍स की पहाड़‍ियों के बीच बनी यह सुरंग इंजीनियरिंग का करिश्‍मा है। 57 किलोमीटर लम्‍बी इस सुरंग के जरिए पैसेंजर्स सिर्फ 17 मिनट में वह रास्‍ता तय कर पाएंगे जिसे तय करने में उन्‍हें 1882 से पहने कई दिन लग जाते थे। 1882 में ही पहली अल्‍पाइन रेल टनल खोली गई थी। इस साल फाइनल टेस्टिंग के बाद करीब 260 फ्राइट ट्रेंस और 65 पैसेंजर ट्रेंस इस दो ट्यूब वाली सुरंग से रोज गुजरेंगी।

57.1 किलोमीटर लम्‍बी सुरंग को बनाने में 17 साल लगे। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह 100 साल तक चल जाए। यह यूरोप के उत्‍तरी और दक्षिणी हिस्‍से को विभाजित करने वाली पहाड़‍ियों के नीचे रेल के जरिए यात्रियों और माल की ढुलाई तेज करने के 23 बिलियन स्विस फ्रैंक की लागत वाले इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट का हिस्‍सा है।

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उत्‍तर के रोटरडैम तटों को दक्षिण के जेनेवा से जोड़ने वाली यूरोप की मेन रेल लाइन के साथ यह सुरंग पहाड़ों के 2.3 किलोमीटर नीचे से होकर गुजरती है, पहाड़ों का तापमान करीब 46 डिग्री सेल्सियस रहता है। इस पास से गुजरने वाला रेल रूट छोरों और सुरंगों की एक सीरीज है। नए सीधे रूट का मतलब होगा कि भारी ट्रेनों को दो या तीन की बजाय सिर्फ एक लोकोमोटिव की जरूरत होगी।

क्लिक कर देखिए सुरंग की अनदेखी तस्‍वीरें

इंजीनियर्स को 73 तरह के पहाड़ों जो ग्रेनाइट जितने सख्त और चीनी जितने मुलायम थे, को खोदना या ब्‍लास्‍ट करके हटाना पडा। नौ मजदूर मारे गए। सरकार और संसद से विरोध के बावजूद स्विस वोटर्स ने इस भीमकाय रेल प्रोजेक्‍ट का समर्थन किया, इसके लिए वहां जनमत संग्रहों की बाकायदा एक सीरीज चली थी।

पूरे प्रोजेक्‍ट में लॉशबर्ग रेल टनल भी शामिल है, जो पहले ही खुल चुकी है। सेरेती सुरंग का निर्माण अभी चल रहा है और रेनोवेशंस के जरिए किनारों में 4 मीटर ऊंचाई छोड़ी जा रही है ताकि बड़े फ्राइट कंटेनर्स आराम से निकल सकें। इसका काम 2020 तक पूरा होने की उम्‍मीद है।

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इस भीमकाय रेल परियोजना के लिए धन जुटाने हेतु कई वैल्‍यू एडेड, ईंधन टैक्‍स, भारी वाहनों पर रोड चार्ज, और पिछले एक दशक में राज्‍य द्वारा दिए गए बकाया लोन का इस्‍तेमाल किया है।

नवंबर और दिसंबर 2015 में, तेजी से बढ़ती स्‍पीड के टेस्‍ट किए गए थे। इस दौरान, दुनिया की सबसे लम्‍बी रेल टनल में अधिकतम स्‍पीड 275 किलोमीटर प्रतिघंटा रही। मई 2016 के अंत तक करीब 5,000 टेस्‍ट रन किए गए हैं।

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