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किशनगंगा विवाद: पाकिस्तान ने अदालत की मध्यस्थता मांग की

इस्लामाबाद की नए सिरे से आपत्तियों के बावजूद भारत बिजली परियोजना पर अपना काम जारी रख सकता है जिसमें 360 मेगावाट बिजली का उत्पादन होने का अनुमान है।
Author नई दिल्ली | October 4, 2016 04:08 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के दौर में पाकिस्तान ने विश्व बैंक से अनुरोध किया है कि किशनगंगा पनबिजली परियोजना पर भारत के निर्माण पर उसकी आपत्तियों पर सुनवाई के लिए एक मध्यस्थता अदालत बनाई जाए। भारत ने विश्व बैंक से विवाद के निवारण के लिए एक तटस्थ विशेषज्ञ नियुक्त करने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में जलबिजली परियोजना की डिजाइन को लेकर आपत्तियां जताई हैं। उसका कहना है कि यह परियोजना दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि के तहत निर्धारित मानदंडों के अनुरूप नहीं हैं। हालांकि भारत ने परियोजना की डिजाइन को संधि के मानदंडों के अंतर्गत सही बताते हुए विश्व बैंक से अनुरोध किया है कि एक तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाए क्योंकि यह मुद्दा एक तकनीकी विषय है।

एक सूत्र ने कहा, ‘पाकिस्तान ने विश्व बैंक से मध्यस्थता अदालत गठित करने का अनुरोध किया है। भारत मांग करता है कि एक तटस्थ विशेषज्ञ मामले का अध्ययन करे क्योंकि यह एक तकनीकी विषय है। संधि भी यही कहती है।’ सूत्र के मुताबिक इंजीनियर जैसा कोई तकनीकी विशेषज्ञ इस मुद्दे को किसी कानूनी जानकार से बेहतर तरीके से समझ सकता है। सूत्रों के अनुसार भारत और पाकिस्तान दोनों ने वाशिंगटन में 27 सितंबर को विश्व बैंक के सामने अलग अलग परियोजना से जुड़े अपने संबंधित तथ्यों को रखा था। सूत्र ने कहा, ‘उन्होंने :पाकिस्तान ने: परियोजना की डिजाइन का विरोध किया है। संधि के तहत जो डिजाइन का मानदंड है वह कहता है कि परियोजना की डिजाइन इस तरह की होनी चाहिए।’

सूत्र के अनुसार, ‘हमारा पुरजोर विश्वास है कि हमारी डिजाइन संधि में निर्धारित मानदंडों के अनुरूप है। लेकिन वे उलटा सोचते हैं। उन्हें लगता है कि परियोजना की भारत की डिजाइन पाकिस्तान को नदी के प्रवाह को प्रभावित करेगी।’ पाकिस्तान ने पहले भी परियोजना से जुड़े विषय को उठाया था और 2010 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत का रुख किया था, जिसमें झेलम नदी घाटी में बिजली संयंत्र के लिए किशनगंगा नदी का पानी लिया जाएगा। उसने दावा किया था कि परियोजना किशनगंगा नदी के प्रवाह को प्रभावित करेगी जिसे पड़ोसी देश में नीलम के नाम से जाना जाता है। हालांकि 2013 में मामले का निर्णय भारत के पक्ष में लिया गया था।

सूत्रों के मुताबिक इस्लामाबाद की नए सिरे से आपत्तियों के बावजूद भारत बिजली परियोजना पर अपना काम जारी रख सकता है जिसमें 360 मेगावाट बिजली का उत्पादन होने का अनुमान है। सूत्र ने कहा, ‘आम धारणा के विपरीत संधि में कहीं भी यह नहीं लिखा कि जब विवाद का समाधान निकाला जा रहा हो, उस दौरान काम को रोकना होगा। काम जारी रह सकता है।’ हालांकि सूत्रों ने दावा किया कि वाशिंगटन की बैठक का नियंत्रण रेखा पर मौजूदा तनाव की स्थिति से कोई लेना-देना नहीं था और यह उरी आतंकी हमले तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना के लक्षित हमलों से काफी पहले से निर्धारित थी।

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