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नेपाल के संविधान संशोधन की प्रक्रिया को मिला भारत का समर्थन

पिछले साल बनाये गये संविधान को मधेसी समुदाय के आंदोलन के कारण लागू नहीं किया जा सका था।
Author काठमांडो | December 4, 2016 14:43 pm
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल। (फाइल फोटो)

नेपाल सरकार के संविधान संशोधन के कदम का स्वागत करते हुए भारत ने नेपाली जनता के सभी वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा करने के प्रयासों के लिए रविवार (4 दिसंबर) को अपना समर्थन जताया। भारतीय दूतावास ने यहां एक बयान में कहा, ‘नेपाल में शांति, प्रगति और इस देश की स्थिरता भारत और नेपाल दोनों के हित में है। हम संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाज के सभी वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा करने की नेपाल सरकार की पहल के समर्थक रहे हैं।’ इसमें कहा गया, ‘नेपाल की जनता और सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप नेपाल की शांति, स्थिरता और त्वरित आर्थिक विकास को भारत समर्थन देता रहेगा।’

पिछले साल बनाये गये संविधान को मधेसी समुदाय के आंदोलन के कारण लागू नहीं किया जा सका था। देश की प्रांतीय सीमा को फिर से निर्धारित करने के लिए संविधान में संशोधन की मांग मधेसी दलों की प्रमुख मांग है। मधेसी फ्रंट ने पिछले सप्ताह संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करने से इनकार करते हुए कहा था कि भेदभाव करने वाले मौजूदा स्वरूप में यह स्वीकार्य नहीं है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक मधेसी फ्रंट (यूडीएफएम) और फेडरल सोशलिस्ट फोरम-नेपाल (एफएसएफ-एन) ने कहा कि वे संविधान संशोधन विधेयक को स्वीकार नहीं कर सकते जिसे नेपाल सरकार ने सीपीएन-यूएमएल के विरोध के बावजूद संसद में रखा है।

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