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रक्षा-विनिर्माण क्षेत्र में भारत और दक्षिण अफ्रीका संबंधों को और गहरा बनाएंगे

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच करीबी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि हालांकि यह मेरी पहली यात्रा है, ‘मैं इस इंद्रधनुष राष्ट्र को अपने घर के रूप में महसूस कर रहा हूं।’
Author प्रिटोरिया | July 8, 2016 19:48 pm
दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में शुक्रवार (8 जुलाई) को वहां के राष्ट्रपति जैकब जुमा से हाथ मिलाते भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (PTI Photo by Kamal Singh)

भारत और दक्षिण अफ्रीका ने अपने पारंपरिक संबंधों को रेखांकित करते हुए रक्षा उत्पादन, विनिर्माण, खनन और खनिज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को गहरा बनाने पर सहमति व्यक्त की है, साथ ही आतंकवाद से ‘सक्रियता’ से निपटने में सहयोग करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे में सहयोग करने का संकल्प व्यक्त किया। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा के साथ विस्तृत चर्चा के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को रक्षा उपकरण एवं प्लेटफार्म विनिर्माण के लिए एक आकर्षक स्थल के रूप में पेश किया । मोदी ने कहा कि दोनों देश न केवल एक दूसरे की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक जरूरतों को भी पूरा कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि दक्षिण अफ्रीका वैश्विक स्तर पर प्रमुख रक्षा उत्पादक देश है।

बैठक के दौरान मोदी ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करने के लिए राष्ट्रपति जैकब जुमा को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ‘हम जानते हैं कि हम दक्षिण अफ्रीका जैसे हमारे मित्र के सक्रिय समर्थन पर भरोसा कर सकते हैं।’ ऐसी खबरें थी कि 48 सदस्यों वाले परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में शामिल होने के भारत के प्रयास पर आपत्ति करने वाले कुछ देशों में दक्षिण अफ्रीका भी शामिल था। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच संबंध मजबूत और ठोस उपलब्धियों की कहानी है। उन्होंने कहा कि कारोबार और निवेश विशेष तौर पर खनिज और खनन, रसायन और फार्मास्यूटिकल्स , विनिर्माण और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को और आगे बढ़ाने की क्षमता है।

राष्ट्रपति जुमा के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने महात्मा गांधी का जिक्र किया और कहा कि वे भारत के उतने ही हैं जितने दक्षिण अफ्रीका के। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘व्यक्तिगत रूप से मेरी यह यात्रा उन दो महान विभूतियों, महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला को श्रद्धांजलि देने का अवसर है जो इस पृथ्वी पर आए।’ आतंकवाद से निपटने के बारे में चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि यह हमारे समाज की बुनियाद पर हमला करता है और दोनों देशों ने इससे सक्रियता से निपटने में सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा, ‘आतंकवाद एक अन्य साझा खतरा है जो हमारे लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालता है। यह हमारे समाज की बुनियाद पर हमला करता है । राष्ट्रपति और मैंने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि हमारे दोनों देशों को सजग रहने और आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए सक्रियता से सहयोग करने की जरूरत है।’

रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में अवसरों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि दोनों देशों की कंपनियां अपनी क्षमताओं का उपयोग संयुक्त रूप से रक्षा उपकरण एवं प्लेटफॉर्म का विकास या निर्माण करने के लिए कर सकती हैं। मोदी ने कहा, ‘आर्थिक और व्यापार संबंधों से आगे कारोबार एवं निवेश के साथ हम रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में सहयोगी बन सकते हैं, उद्योग के स्तर पर और हमारी सामरिक एवं सुरक्षा जरूरतों और उद्योग के स्तर पर।’ उन्होंने कहा कि भारत में रक्षा क्षेत्र पूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है और यह आकर्षक अवसर पैदा करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमारी कंपनियां अपनी क्षमताओं का उपयोग करके रक्षा उपकरणों और प्लेटफार्मो का संयुक्त रूप से विकास और विनिर्माण कर सकती हैं। और न केवल रक्षा जरूरतों को पूरा करने बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक मांग को पूरा भी कर सकती हैं।’ मोदी ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका आईबीएसए (भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका) और ब्रिक्स के जरिये अंतरराष्ट्रीय एजेंडे को आकार प्रदान करने के लिए काम कर सकते हैं । उन्होंने कहा, ‘मैं इस वर्ष के अंत में गोवा में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति जुमा का स्वागत करने को उत्सुक हूं।’

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच करीबी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि हालांकि यह मेरी पहली यात्रा है, ‘मैं इस इंद्रधनुष राष्ट्र को अपने घर के रूप में महसूस कर रहा हूं।’ लोगों से लोगों के स्तर पर संबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘हम नस्लवाद और उपनिवेशवाद के खिलाफ हमारी साझी लड़ाई में साथ खडे हैं।’ बातचीत के दौरान मोदी और जुमा ने द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण आयामों की समीक्षा की। मोदी ने कहा, ‘हमने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि हमारे संबंध मजबूत और ठोस उपलब्धियों की कहानी बयां करते हैं। पिछले दस वर्षो में हमारा दोतरफा कारोबार 300 प्रतिशत बढ़ा है। भारतीय कंपनियों के दक्षिण अफ्रीका में मजबूत कारोबारी हित हैं । अफ्रीका में हमारे निवेश का एक चौथाई इस देश को जाता है।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इस बात से आश्वस्त हैं कि उद्योग से उद्योग के बीच गठजोड़ न केवल हमारे समाज को आर्थिक रूप से समृद्ध बना सकता है बल्कि हमारे गठजोड़ को नया आकार प्रदान कर सकता है और उसे नये स्तर तक ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत दक्षिण अफ्रीका में छोटे एवं मझोले कारोबारों के विकास एवं क्षमता एवं विशेषज्ञता को साझा करने को तैयार है। मोदी ने कहा कि वे और जुमा इस बात पर सहमत हुए हैं कि अंतरराष्ट्रीय एवं उभरती वैश्विक चुनौतियों पर करीबी से काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘जलवायु परिवर्तन और दुनिया पर इसका प्रभार हमारी साझी चिंता है। हम इस चुनौती से निपटने के लिए नवीकरणीय उर्च्च्जा पर ध्यान देने की जरूरत पर सहमत हुए हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारत ने पेरिस में सीओपी 21 में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन बनाने की पहल की।

प्रधानमंत्री ने इस गठबंधन में सहयोगी बनने के लिए दक्षिण अफ्रीका का आभार जताया। नौवहन सुरक्षा का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि हिंद महासागर का जल हम दोनों देशों का साझा समुद्री मोर्चा है। इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन हिंद महासागर से जुड़े नौवहन पड़ोसियों के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफार्म है और 2017-19 तक इसकी अध्यक्षता के लिए दक्षिण अफ्रीका का स्वागत करता हूं। राष्ट्रपति जुमा ने मोदी का में स्वागत किया और कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग करने पर चर्चा की जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा शामिल है।

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