ताज़ा खबर
 

जलवायु समझौते पर भारत को करना चाहिए अमेरिका और चीन का अनुसरण : चीनी मीडिया

भारत पर दबाव बनाने वाले अमेरिका और चीन विश्व भर में होने वाले लगभग 40 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं।
Author हांगझोउ | September 5, 2016 23:26 pm
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत जहां पेरिस जलवायु समझौते का अनुमोदन इसी साल करवाने के लिए अमेरिका और चीन की ओर से बनाए जा रहे दबाव का विरोध कर रहा है, वहीं चीनी आधिकारिक मीडिया ने कहा है कि अब समय आ गया है कि भारत यह दिखा दे कि वह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सीमित करने के लिए वाकई गंभीर है। भारत पर दबाव बनाने वाले अमेरिका और चीन विश्व भर में होने वाले लगभग 40 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में सोमवार (5 सितंबर) को कहा गया, अमेरिका और चीन द्वारा पेरिस जलवायु समझौते का अनुमोदन किए जाने से ‘दूसरी उभरती एवं औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं’ के लिए एक मिसाल कायम हुई है। उन्होंने कहा, ‘अब समय आ गया है कि क्रमश: तीसरे और चौथे सबसे बड़े उत्सर्जक यानी यूरोपीय संघ और भारत भी यह दिखा दें कि वे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सीमित करने के लिए गंभीर हैं।’

जी20 सम्मेलन में जब चीन और अमेरिका ने जलवायु परिवर्तन समझौते के अनुमोदन के लिए 2016 को एक समय सीमा के रूप में स्थापित करने की कोशिश की तो भारत ने उनकी ओर से डाले जाने वाले दबाव का विरोध किया। ये दोनों देश खुद इस समझौते का अनुमोदन करके संयुक्त राष्ट्र को सूचित कर चुके हैं। लेख में कहा गया, ‘संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून जहां इस बात को लेकर ‘आशान्वित और सकारात्मक’ हैं कि इस समझौते को साल के अंत तक लागू किया जा सकता है, वहीं भारतीय अधिकारी ऐसा नहीं मानते। अंतत: नयी दिल्ली को एक अंर्तद्वंद्व से निकलना है।’

लेख में कहा गया, ‘चीन भी विकास के उसी चरण से होकर गुजरा है और तब भी उसने ग्लोबल वॉर्मिंग को रोकने की दिशा में अहम प्रतिबद्धता दिखाई है। भारत एक वैश्विक शक्ति बनने और अंतरराष्ट्रीय मामलों में बड़ी भूमिका निभाने के लिए प्रयासरत है। इसलिए उसे धरती को बचाने के लिए मुश्किलों की चिंता किए बिना अपनी जिम्मेदारियों को उठाना चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए।’ इसमें कहा गया, ‘इस प्रक्रिया में चीन एक विश्वसनीय सहयोगी हो सकता है। भारत ने अपने प्रस्ताव में पिछले साल संकल्प लिया था कि वह सौर बिजली, पन बिजली और पवन ऊर्जा जैसी स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को तेजी से बढ़ाएगा। इसके लिए अन्य देशों से उपयुक्त प्रौद्योगिकियों का स्थानांतरण होना है और चीन बहुत सी उपयोगी प्रौद्योगिकियां एवं अनुभव उपलब्ध करवा सकता है।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.