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कश्मीर में महिलाओं की स्थिति पर पाकिस्तान के आरोपों को भारत ने नकारा

भारत ने कहा, ‘पाकिस्तान के गुर्गों की तरफ से लगातार की जा रही आतंकवादी कार्रवाइयों के चलते कश्मीर की महिलाओं ने लंबे समय तक तकलीफ झेली है।’
Author संयुक्त राष्ट्र | October 13, 2016 14:15 pm
श्रीनगर में 12 साल के जुनैद अहमद के अंतिम संस्कार के दौरान एक कश्मीरी महिला आज़ादी के समर्थन में नारे लगाती हुई। कश्मीर के एक हिंसक झड़प जुनैद पैलेट गन से घायल हो गया था और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। (AP Photo/Dar Yasin/8 Oct, 2016)

भारत ने कश्मीर में महिलाओं की स्थिति के बारे में पाकिस्तान की चर्चा को दृढ़ता से खारिज करते हुए कहा है कि ‘पाकिस्तान के गुर्गों’ की तरफ से लगातार की गई आतंकवादी गतिविधियों के चलते निर्दोष भारतीय महिलाओं को लंबे समय तक झेलना पड़ा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन में काउंसेलर मयंक जोशी ने यह कहते हुए जम्मू-कश्मीर में महिलाओं के बारे में पाकिस्तान के ‘निराधार आरोपों’ को ‘पूरी तरह’ खारिज कर दिया कि ‘असल में’ यह निर्दोष भारतीय महिलाएं हैं जिन्होंने ‘पाकिस्तान के गुर्गों की तरफ से लगातार की जा रही आतंकवादी कार्रवाइयों के चलते लंबे समय तक झेला है।’

कश्मीर पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की विशेष दूत शज्रा मंसब अली खां ने 11 अक्तूबर को सामाजिक और मानवीय मुद्दों पर चर्चा करने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की ‘तृतीय समिति’ के ‘महिलाओं के उत्थान’ सत्र के दौरान कश्मीर में महिलाओं की स्थिति की चर्चा की थी। इसपर जोशी ने जवाब देने के भारत के अधिकार का उपयोग किया। शज्रा ने कहा था कि सशस्त्र झड़पें और अवैध कब्जे महिलाओं की दुर्दशा बिगाड़ते है। पाकिस्तानी राजनयिक ने कश्मीर के हालात का जिक्र करते हुए कहा था, ‘हजारों महिलाएं निर्मम उत्पीड़न और कब्जे का शिकार बनी हैं। अनगिनत अन्य हिंसा के बदतरीन और सर्वाधिक आघाती रूप, बलात्कार एवं यौन उत्पीड़न से गुजरी हैं।’

जोशी ने कहा कि यह ‘विडंबना’ है कि एक ऐसा देश ‘भारत जैसे बहुलवादी लोकतंत्र में महिलाओं के अधिकार के बारे में दावा कर रहा है जिसने मध्ययुगीन काले कानूनों’ के मार्फत अपने समाज में महिलाओं के ‘उत्पीड़न को संस्थाबद्ध किया है।’ भारतीय राजनयिक ने कहा कि पाकिस्तान को ‘गंभीरता से जांच करनी चाहिए’ कि कौन सी चीज उनकी महिलाओं के लिए दिक्कत पैदा कर रही है और उनके आगे बढ़ने में बाधा बन रही है। पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर लगातार कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है। जोशी ने कहा कि पाकिस्तान ‘नफरत’ की कूटनीति’ आगे बढ़ाने के लिए विश्व निकाय में ‘झूठ और छल’ का रास्ता अपना रहा है और भारत उसपर प्रतिक्रिया नहीं करेगा।

उन्होंने कहा, ‘हमें झूठ और छल के मार्फत नफरत की कूटनीति चलाने की पाकिस्तान की कुटिल कोशिश की जानकारी है। हम ऐसे भ्रामक और बेकार कोशिशों का और जवाब देना नहीं चाहते।’ बहरहाल, एक पाकिस्तानी अधिकारी ने जोशी की टिप्पणियों पर जवाब देने के अधिकार का उपयोग किया और कहा कि ‘भ्रम बनाने’ की कितनी ही कोशिशों के बावजूद कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाया नहीं जा सकता। पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक ‘अंतरराष्ट्रीय मान्यताप्राप्त’ विवाद है और पाकिस्तान ‘कश्मीरी जनता के वैध संघर्षों की तुलना आतंकवाद के कृत्यों से करने की’ किसी भी कोशिश को खारिज करता है।

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First Published on October 13, 2016 2:15 pm

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