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अफगानिस्तान के CEO बोले, भारत ‘पूरी तरह तस्वीर में है’

तालिबान के साथ रुकी हुई शांति प्रक्रिया को बहाल करने के प्रयासों के बीच अफगानिस्तान ने गुरुवार को कहा कि भारत ‘पूरी तरह तस्वीर में’ है और युद्धग्रस्त देश में स्थायित्व लाने के लिए उसे हर गतिविधि के बारे में बताया जा रहा है।
Author नई दिल्लr | February 5, 2016 03:42 am
अफगानिस्तान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला

तालिबान के साथ रुकी हुई शांति प्रक्रिया को बहाल करने के प्रयासों के बीच अफगानिस्तान ने गुरुवार को कहा कि भारत ‘पूरी तरह तस्वीर में’ है और युद्धग्रस्त देश में स्थायित्व लाने के लिए उसे हर गतिविधि के बारे में बताया जा रहा है। अफगानिस्तान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पर संतोष जताया और कहा कि उनकी सरकार भारत से सैन्य साजो सामान की आपूर्ति को लेकर खुश है और इस पर ‘कोई रोक’ नहीं है।

यह पूछने पर कि क्या मजार-ए-शरीफ में भारतीय दूतावास के बाहर आतंकवादी हमला और पठानकोट वायुसेना अड्डे पर आतंकवादी हमले के बीच कोई संबंध है तो उन्होंने कहा कि अगर कोई संबंध होगा तो इसे साझा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत के कूटनीतिक मिशन और अन्य के बीच सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं।

मजार-ए-शरीफ हमले में पाकिस्तानी सेना के संलिप्त होने के अफगान पुलिस अधिकारी के बयान पर उन्होंने कहा कि वह विशिष्ट जानकारी नहीं दे सकते लेकिन कहा कि ‘हमारे सुरक्षा बलों के बीच सहयोग की पूरी भावना है।’ आतंकवाद को क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान का तालिबान पर प्रभाव है और आतंकवादी संगठन को काबुल के साथ वार्ता करने में वह बड़ी भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए काफी सबक हैं कि आतंकवादी संगठन का चाहे किसी ने गठन किया हो या कोई समर्थन कर रहा हो लेकिन अंतत: वह उसी देश के लिए विनाशकारी हो जाता है।’ भारत की तरफ से अफगानिस्तान को सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति पर अब्दुल्ला ने कहा, ‘हम भारत से सहयोग को लेकर खुश हैं जिसमें सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति भी शामिल है। यह हमारी प्राथमिकता पर आधारित है। कोई सीमा नहीं है और कोई कमी नहीं की जा रही है।’

भारत ने काबुल को दिसंबर में तीन एमआइ-35 बहुद्देशीय हेलीकॉप्टर की आपूर्ति की थी। यह पूछने पर कि क्या पाकिस्तान, चीन और अमेरिका जब प्रयास कर रहे हैं कि काबुल और तालिबान के बीच वार्ता हो तो भारत को शांति प्रक्रिया से अलग रखा गया है, इस पर उन्होंने कहा कि यह ‘समझौता कराने का प्रारंभिक चरण है और भारत पूरी तरह तस्वीर में’ है और उसे ‘हर गतिविधि से अवगत कराया जाता है।’
अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन और अमेरिका के प्रतिनिधि शनिवार को बैठक करेंगे जिसमें अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया का रोडमैप तैयार करने का प्रयास करेंगे।

अब्दुल्ला ने कहा कि वर्तमान में शांति प्रक्रिया में शामिल देशों का तालिबान या स्थिति पर प्रभाव है। उन्होंने कहा कि वार्ता में भाग लेने वाले समूहों को हिंसा छोड़ने के लिए कोई रेखा तय नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि तालिबान के नेता पाकिस्तान में रहते हैं जो उन्हें हिंसा छोड़ने के लिए मना सकता है।

उन्होंने कहा, ‘भारत समग्र स्थायी लोकतांत्रिक अफगानिस्तान चाहता है। भारत का रुख वही है जो हम चाहते हैं। देश के स्थायित्व में भारत का बड़ा हाथ है और वह उस प्रक्रिया का हिस्सा है।’
यह पूछने पर कि क्या किसी तीसरे पक्ष के दबाव में भारत को शांति प्रक्रिया से अलग रखा गया है तो उन्होंने इतना ही कहा, ‘वार्ता पर भारत का रुख स्पष्ट है। वार्ता अफगानिस्तान के नेतृत्व में होनी है और अफगानिस्तान के लिए होनी है और हमने यही बात कही है।’
अफगानिस्तान के सीईओ शनिवार को पांच दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे थे और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से बात की।
अब्दुल्ला ने कहा कि हेलिकॉप्टर की आपूर्ति के लिए अफगानिस्तान रूस से भी बातचीत कर रहा है। शांति प्रक्रिया को बहाल करने में चीन की भागीदारी पर अब्दुल्ला ने कहा कि चीन का अफगानिस्तान के साथ ही पाकिस्तान से भी अच्छा संबंध है जबकि उन्होंने भारत को कूटनीतिक साझीदार बताया जो अफगानिस्तान में शांति सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अफगानिस्तान के सीईओ ने कहा कि अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों ने जिस तरीके से मजार-ए-शरीफ में हमले को नाकाम किया उस पर भारत की सरकार ने संतोष जाहिर किया। भारतीय कंपनियों को अफगानिस्तान में निवेश करने के लिए आमंत्रित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें हरसंभव सहायता दी जाएगी और उनके व्यवसाय को आसान करना सुनिश्चित किया जाएगा। भारत ने अफगानिस्तान के सहयोग और पुनर्निर्माण में दो अरब डॉलर का निवेश किया है और अफगानिस्तान के दर्जनों अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है।

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