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वतन छोड़ने की इच्‍छा रखने वालों में भारतीय नंबर 2 पर, चीन के लोगों को है अपने देश से बहुत प्‍यार

दूसरे देशों में बसने की योजना बनाने वाले ज्यादातर लोगों में पुरुष, युवा, अविवाहित, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले और कम से कम माध्यमिक शिक्षा हासिल करने वाले वयस्क हैं।
Author July 18, 2017 10:56 am
रिपोर्ट में 2010-2015 अवधि के लिए दुनियाभर में लोगों के प्रवास करने के इरादों का विश्लेषण किया गया है। (Photo: Reuters)

भारत के लिए खतरे की घंटी है। भारत उन देशों में दूसरे नंबर पर है जहां वयस्क दूसरे देशों में बसने की योजना बना रहे हैं और अमेरिका तथा ब्रिटेन उनके पसंदीदा देश हैं। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी अंतरराष्ट्रीय प्रवास संगठन (आईओएम) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि दुनियाभर में वयस्क आबादी के 1.3 फीसदी या छह करोड़ 60 लाख लोगों ने कहा कि वे अगले 12 महीनों में स्थायी तौर पर प्रवास करने की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट में 2010-2015 अवधि के लिए दुनियाभर में लोगों के प्रवास करने के इरादों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे देशों में बसने की योजना बनाने वाले लोगों में अमेरिका के बाद सबसे लोकप्रिय देश हैं ब्रिटेन, सऊदी अरब, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका।

प्रवास करने की योजना बनाने वालों में से आधे लोग सिर्फ 20 देशों में रहते हैं जिसमें पहले नबंर पर नाइजीरिया और दूसरे नंबर पर भारत है। इसके बाद कांगो, सूडान, बांग्लादेश और चीन का नंबर आता है। 48 लाख लोगों के साथ भारत में सबसे अधिक संख्या में वयस्क प्रवास करने की योजना बना रहे हैं और तैयारी कर रहे हैं। इनमें 35 लाख लोग प्रवास करने की योजना बना रहे हैं और 13 लाख लोग तैयारी कर रहे हैं।

नाइजीरिया में सबसे अधिक 51 लाख लोग अपने देश से बाहर बसने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद 41 लाख लोगों के साथ कांगो और 27-27 लाख लोगों के साथ चीन तथा बांग्लादेश का नंबर आता है। पश्चिम अफ्रीका, दक्षिण एशिया और उत्तर अफ्रीका ऐसे क्षेत्र हैं जहां सबसे अधिक लोगों के प्रवास करने की संभावना है।

यह अध्ययन गैलप वर्ल्ड पोल द्वारा एकत्रित किए गए अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों पर आधारित है। दूसरे देशों में बसने की योजना बनाने वाले ज्यादातर लोगों में पुरुष, युवा, अविवाहित, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले और कम से कम माध्यमिक शिक्षा हासिल करने वाले वयस्क हैं।

वहीं एक अनुमान के मुताबिक देश में हर साल लाखों लोग रोजी-रोटी के लिए तो कभी विस्थापित होने पर गांवों से शहरों का और दूसरे देशों का रुख करते हैं। अपना पुश्तैनी गांव-घर छोड़ते वक्त जहां उनके दिल में अपनों से बिछड़ने की गहरी टीस होती है, वहीं एक आस भी बंधी रहती है कि शायद दूसरी जगह उन्हें पेट भरने की कोई जुगत मिल जाए। ‘अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन’ की रिपोर्ट ‘मैनेजिंग द एक्सीड्स ग्राउंडिंग माग्रेशन इन इंडिया’ में बताया गया है कि पिछले एक दशक में भारत में एक राज्य से दूसरे राज्य या एक ही राज्य में एक जिले से दूसरे जिले में विस्थापित होने या ठिकाना बदलने वाालों की तादाद करीब दस करोड़ पहुंच गई है। इनमें छह करोड़ 90 लाख लोग अपने गांव से दूसरे गांवों में जाकर बसे हैं और तीन करोड़ 60 लाख लोगों ने गावों से शहरों में जाकर डेरा डाला है।

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