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एमटीसीआर में प्रवेश कर सकता है भारत, अमेरिका से ड्रोन खरीदने में मिलेगी मदद

भारत इस सप्ताह मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) में प्रवेश कर सकता है।
Author वाशिंगटन | June 6, 2016 02:20 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

भारत इस सप्ताह मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) में प्रवेश कर सकता है। इस कदम से अमेरिका से ड्रोन विमान खरीदने और अपने उच्च प्रौद्योगिकी वाले प्रक्षेपास्त्रों का मित्र देशों को निर्यात करने के उसकी कोशिशों को बल मिलेगा। घटनाक्रम पर नजर रख रहे सूत्रों की माने तो इस संबंध में घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के आमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान किए जाने की उम्मीद है। यह बड़ी सफलता भारत को उसकी इस घोषणा के बाद मिली कि बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र प्रसार के खिलाफ वह ‘द हेग आचार संहिता’ को अपना रहा है। इस आचार संहिता को प्रक्षेपास्त्र प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का पूरक माना जाता है।

भारत ने इसकी सदस्यता के लिए पिछले साल अपील की थी, लेकिन एमटीसीआर के कुछ सदस्य देशों ने इसका कड़ा विरोध किया। ओबामा प्रशासन ने एमटीसीआर में भारत की सदस्यता और तीन अन्य निर्यात नियंत्रण व्यवस्था, आॅस्ट्रेलिया समूह, परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह और वासेनार अरेंजमेंट की सदस्यता का जोरदार समर्थन किया है।

अप्रैल 1987 में स्थापित स्वैच्छिक एमटीसीआर का मकसद बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र और अन्य मानव रहित आपूर्ति प्रणालियों के विस्तार को सीमित करना है जिनका रसायनिक, जैविक और परमाणु हमलों में उपयोग किया जा सकता है। एमटीसीआर व्यवस्था के 34 सदस्यों में दुनिया के ज्यादातर प्रमुख प्रक्षेपास्त्र निर्माता शामिल हैं। यह व्यवस्था अपने सदस्यों से अनुरोध करती है कि वह अपने प्रक्षेपास्त्र निर्यात और 500 किग्रा भार कम से कम 300 किमी तक ले जाने में सक्षम या सामूहिक विनाश के किसी भी प्रकार के हथियार की आपूर्ति करने में सक्षम संबंधित प्रौद्योगिकी को सीमित करें।

साल 2008 से भारत उन पांच देशों में से एक है जो एमटीसीआर का एकतरफा पालन कर रहे हैंं। एमटीसीआर की घोषणा के बाद समझा जाता है कि भारत और अमेरिका ड्रोन विमानों की भारतीय सेना को बिक्री के बारे में अपनी बातचीत तेज करेंगे।‘जनरल एटॉमिक्स’ के अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विकास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विवेक लाल ने पिछले साल कहा था ‘जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स इंक भारत की प्रीडेटर (आर) सीरिज के रिमोटली पायलटेड एयर क्रॉफ्ट (आरपीए) में दिलचस्पी से वाकिफ है। ‘जनरल एटॉमिक्स’ अमेरिका में निजी स्वामित्व वाली सबसे बड़ी कंपनी है जो ड्रोन विमान तैयार करती है। अफगानिस्तान में हाल ही में तालिबान नेता का सफाया करने वाले प्रीडेटर ड्रोन सीआइए का पसंदीदा औजार है। एमटीसीआर की सदस्यता से यह क्षमता हासिल करने की भारत की काबिलियत को बहुत बल मिलेगा।

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