December 08, 2016

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ब्रिटेन, कनाडा में फ्री इलाज करते हैं डॉक्‍टर, अमेरिका में प्रति व्‍यक्ति सबसे ज्‍यादा खर्च करती है सरकार, जानें और देशों की व्‍यवस्‍था

फ्रांस में निजी स्वास्थ्य बीमा की दर आमदनी के आधार पर तय होती है न कि बीमारियों के जोखिम के आधार पर।

प्रतीकात्मक तस्वीर

सार्वजनिक स्वास्थ्य विभिन्न देशों की सरकारों के लिए बड़ी चिंता का विषय रहा है। भारत सरकार ने 1983 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति बनाई थी जिसमें 2002 में संशोधन किया गया। इसमें 2017 में भी बदलाव किया जाना है। आम जनता प्रस्तावित नीति पर अपनी राय दे सकती है। भारत के विभिन्न राज्यों में सार्वजनिक स्वास्थ्य की नीति में काफी अंतर है। ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत में हर एक हजार नवजात शिशुओं में से 12 की मौत जन्म के समय ही हो जाती है। वहीं अभी भी डेंगी, हेपेटाइटिस, मलेरिया, निमोनिया जैसी बीमारियों से रमने वालों संख्या काफी अधिक है।  भारत की करीब 68 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। देश की आधी ग्रामीण आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीती है। ऐसे में उनके स्वास्थ्य का कोई अंदाजा भर लगाया जा सकता है। लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य की समस्या केवल भारत जैसे विकासशील देश को नहीं परेशान नहीं करती बल्कि दुनिया के विकसित माने जाने वाले देश भी इससे जूझ रहे हैं। आइए एक नजर डालें विकसित दुनिया के प्रमुख देशों के स्वास्थ्य क्षेत्र पर-

ब्रिटेन- ब्रिटेन की जन स्वास्थ्य प्रणाली को एनएचएस कहते हैं। एनएचएस टैक्स और आवश्यक राष्ट्रीय बीमा योगदान से संचालित होता है। पिछले कई सालों से इसे पैसे की तंगी का सामना करना पड़ रहा है। साल 2015 में एनएचएस का कुल घाटा 2.5 अरब पाउंड था। ब्रिटेन की वर्तमान प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने 2020 तक एनएचएस में 10 अरब पाउंड देने का वादा किया है। लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों के अनुसार वास्तविक खर्च को ध्यान में रखते हुए ये राशि पर्याप्त नहीं होगी। ब्रिटेन में प्राथमिक चिकित्सा मुफ्त है लेकिन इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। डॉक्टरों और अस्पतालों की उपलब्धता भी एक समस्या है। इसीलिए ब्रिटेन में करीब 11 प्रतिशत आबादी निजी स्वास्थ्य बीमा लेती है जो आम तौर पर उनके नियोक्ता उपलब्ध कराते हैं।

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जर्मनी- जर्मनी में कई स्तरों वाली चिकित्सा व्यवस्था है जिसे कई म्यूचुअल इंश्योरेंस फंड से पैसा मिलता है। हर कामगार को किसी एक म्यूचुअल फंड को चुनना होता है और उसमें अपनी आय के अनुसार योगदान देना होत है। इलाज में आने वाले खर्च को कामगार और नियोक्ता के बीच बांटा जाता है और ज्यादातर खर्च फंड द्वारा उठाया जाता है। मरीजों को केवल डॉक्टरों को मामूली शुल्क देना होता है। जिन लोगों की आय अधिक हो उनके पास सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के बजाय निजी स्वास्थ्य बीमा चुनने का अधिकार होता है। करीब 10 प्रतिशत जर्मन नागरिक निजी स्वास्थ्य बीमा का प्रयोग करते हैं।

मौजूदा व्यवस्था के तहत जर्मन अपनी मर्जी से डॉक्टरों का चुनाव कर सकते हैं। इस व्यवस्था के कारण जर्मन कुछ ज्यादा ही डॉक्टरों को पास जाते हैं और दवाएं लेते हैं। जर्मनी में अस्पताल में भर्ती होने और वहां रहने की समय अन्य विकसित देशों से अधिक है। इसकी वजह से जर्मनी की स्वास्थ्य कम असरदार हो जाती है।

फ्रांस- फ्रांस की चिकित्सा व्यवस्था का विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूरो हेल्थ कंज्यूमर इंडेक्स काफी ऊंचा स्थान है। फ्रांस में हर कोई आवश्यक स्वास्थ्य बीमा के तहत आता है। इस बीमा के लिए पैसा नागरिकों से मिले टैक्स से दिया जाता है। फ्रांस में कुल इलाज का करीब 20 प्रतिशत मरीज को देना होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ताजा रिपोर्ट में फ्रांस की चिकित्सा व्यवस्था को दुनिया में सबसे बेहतर बताया। इसके बावजूद 90 प्रतिशत फ्रांसीसी निजी स्वास्थ्य बीमा सुविधा का भी इस्तेमाल करते हैं जिसका खर्च आम तौर पर उनके नियोक्ता उठाते हैं। फ्रांस में निजी स्वास्थ्य बीमा की दर आमदनी के आधार पर तय होती है न कि बीमारियों के जोखिम के आधार पर।

फ्रांसीसी स्वास्थ्य क्षेत्र गहरे संकट में है। वैश्विक आर्थिक संकट से भी इस पर बुरा प्रभाव पड़ा है। चूंकि ये फंड कामगारों के योगदान पर निर्भर है इसलिए बढ़ती बेरोजगारी का भी इससे पर काफी असर होता है। इस संकट से बचने के लिए फ्रांसीसी सरकार जेनेरिक दवाओं के प्रयोग को बढ़ावा दे रही है। इस साल सरकार ने अपना स्वास्थ्य क्षेत्र का घाटा आधा कर लिया है। 2019 तक वो लाभ की स्थिति में होगी।

कनाडा- कनाडा में सरकार द्वारा वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा नीति चलती है जिसके लिए पैसा आम नागरिकों के टैक्स से आता है। कनाडा में स्वास्थ्य बीमा अलग-अलग प्रांतों में भिन्न-भिन्न है। कनाडा की स्वास्थ्य सेवा काफी उत्कृष्ट मानी जाती है। यहां पर दिल की बीमारी और हार्ट अटैक से काफी कम मौत होती है। कैंसर का भी यहां अत्याधुनिक इलाज होता है। नवजात मृत्यु दर भी काफी कम है।

कनाडा में कुछ क्षेत्रों में सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। मसलन, नितंब या घुटने की सर्जरी कराना काफी मुश्किल साबित होता है। 2015 के एक अध्ययन के अनुसार कनाडा में स्पेशलिस्ट से इलाज कराने के लिए औसतन 18 हफ्ते इंतजार करना पड़ता है। विकसित देशों में ये समय सर्वाधिक में एक है।

विकसित देशों के सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े कुछ आंकड़े-

स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति खर्च– अमेरिका (9451 डॉलर), ब्रिटेन (4003 डॉलर), जर्मनी (5267), फ्रांस (4407) कनाडा (4609)

प्रति 1000 व्यक्ति पर उपलब्ध डॉक्टरों की संख्या– जर्मनी (4.1), फ्रांस (3.1), ब्रिटेन (2.8), अमेरिका (2.6) और कनाडा (2.5)

प्रति एक हजार लोगों पर बेड की संख्या– जर्मनी (8.2), फ्रांस (6.2), अमेरिका (2.9), ब्रिटेन (2.7), कनाडा (2.7)

जिन लोगों को पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है– अमेरिका (9.1 प्रतिशत), जर्मनी (0.2 प्रतिशत), फ्रांस (0.1 प्रतिशत), ब्रिटेन (0 प्रतिशत), कनाडा (0 प्रतिशत)

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First Published on November 9, 2016 6:59 am

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