December 08, 2016

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ओबामा की तरह ट्रंप को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एकतरफावाद का रास्ता अपनाना होगा: हक्कानी

अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने यह भी भविष्यवाणी की कि ट्रंप प्रशासन ‘प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी’ के मौजूदा दर्जे से पाकिस्तान का दर्जा घटाएगा।

Author वॉशिंगटन | November 25, 2016 15:24 pm
अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (एजेंसी फाइल फोटो)

एक पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक ने कहा है जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को निशाना बनाने के लिए ‘एकतरफावाद’ की राह अपनाई थी, उसी तरह डोनाल्ड ट्रंप को भी यह रास्ता अपनाना होगा क्योंकि 33 अरब डॉलर का अमेरिकी वित्तपोषण आतंकवाद पर पाकिस्तान का रुख बदलवाने में नाकाम रहा है। अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने यह भी भविष्यवाणी की कि ट्रंप प्रशासन ‘प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी’ के मौजूदा दर्जे से पाकिस्तान का दर्जा घटाएगा। अमेरिकी अखबार ‘द वाल स्ट्रीट जर्नल’ में गुरुवार (24 नवंबर) को अपने ओप-एड में हक्कानी ने लिखा, ‘इस्लामाबाद में जनरलों और ढेर सारे असैन्य नेताओं के लिए पाकिस्तान की भारत के साथ प्रतिस्पर्धा उसके साथ बराबरी करने की योजना के हिस्से के तौर पर अमेरिका के साथ किए वादे तोड़ने और तालिबान से ले कर हक्कानी नेटवर्क तक जिहादी आतंकवाद को समर्थन जारी रखने को उचित ठहराती है।’

पाकिस्तानी राजनयिक ने लिखा, ‘इस तरह ओबामा प्रशासन के तहत 21 अरब डॉलर का वित्तपोषण, बुश प्रशासन के तहत पाकिस्तान को मिले 21.4 अरब डॉलर की ही तरह आतंकवाद के उसके प्रजननस्थलों को बंद करने में नाकाम रहा।’ हक्कानी ने कहा, ‘(लेकिन) राष्ट्रपति ओबामा के तहत, अमेरिका पाकिस्तान की इजाजत के बगैर ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में उसकी पनाहगाह में ठिकाने लगा सका। ट्रंप प्रशासन को जब भी जरूरत पड़े इसी तरह का एकतरफा रास्ता अपनाना होगा और साथ ही प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी के मौजूदा दर्जे से पाकिस्तान का दर्जा तकरीबन अपरिहार्य रूप से गिराना होगा।’

ओसामा को दो मई 2011 को ऐबटाबाद में पाकिस्तान की सैन्य अकादमी से एक मील से कम फासले पर अमेरिकी नेवी सील के नाटकीय हमले में मारा गया था। अमेरिका ने इस हमले के लिए पाकिस्तान सरकार को सूचित नहीं किया था और एकतरफा तौर पर अत्यंत खुफिया अभियान संचालित किया था। जब उनके ऑप-एड पर स्पष्टीकरण के लिए हक्कानी से संपर्क किया तो उन्होंने कहा, ‘मैं पेशनगोई (भविष्यवाणी) करता हूं कि ट्रंप प्रशासन संभवत: पाकिस्तान का दर्जा प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी के मौजूदा दर्जे से नीचे करे।’

वाशिंगटन के हडसन इंस्टीट्यूट में दक्षिण और मध्य एशिया के निदेशक हक्कानी ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में अमेरिकी जीत का दारोमदार पाकिस्तान की नीतियों को सही करने में है और इसमें उसके लिए किसी भी सहायता की समीक्षा शामिल है।? उन्होंने कहा, ‘इस बार अमेरिका को आईएसआईएस की बर्बरता और यूरोप से उसकी नजदीकी के चलते अफगानिस्तान-पाकिस्तान केन्द्र को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।’

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First Published on November 25, 2016 3:22 pm

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