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12 हजार किमी की दूरी तय कर लंदन से चीन पहुंची मालगाड़ी, 20 दिन में सात देशों से होकर गुजरी

इस ट्रेन के 30 डिब्‍बों में व्हिस्‍की, सॉफ्ट ड्रिंक, विटामिन और दवाइयां हैं। यह मालगाड़ी फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, पोलैंड, बेलारुस, रूस और कजाखस्‍तान से होकर गुजरी।
ब्रिटेन से सामान लेकर रवाना हुई पहली मालगाड़ी 12 हजार किलोमीटर से ज्‍यादा की दूरी तय कर चीन पहुंच गई है।

ब्रिटेन से सामान लेकर रवाना हुई पहली मालगाड़ी 12 हजार किलोमीटर से ज्‍यादा की दूरी तय कर चीन पहुंच गई है। यह मालगाड़ी शनिवार (29 अप्रैल) को चीन के पूर्वी हिस्‍से में स्थित यिवू शहर में पहुंची। इस सफर के साथ ही यह ट्रेन रूट दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रूट बन गया है। ट्रेन के जरिए ब्रिटेन से जुड़ना चीन का पश्चिमी यूरोप से संपर्क की दिशा में बड़ा कदम है। चीन इसके जरिए प्राचीन सिल्‍क रूट को पुनर्जीवित कर रहा है। इस ट्रेन के 30 डिब्‍बों में व्हिस्‍की, सॉफ्ट ड्रिंक, विटामिन और दवाइयां हैं। यह मालगाड़ी फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, पोलैंड, बेलारुस, रूस और कजाखस्‍तान से होकर गुजरी। यह यात्रा 20 दिन में पूरी हुई है। तीन महीने पहले चीन से ब्रिटेन मालगाड़ी गई थी। चीन से गई मालगाड़ी में घरेलू जरुरतों को सामान, कपड़े, सूटकेस और बैग्‍स थे।

दुनिया का सबसे लंबा ट्रेन रूट भी चीन से ही जुड़ा हुआ है। साल 2014 में चीन और स्‍पेन के बीच शुरू हुआ रूट दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेन रूट है। लंदन यूरोप का 15वां शहर है जिससे चीन का रेलमार्ग से संपर्क हुआ है। अभी दोनों देशों के बीच अगर समुद्री रास्‍ते से सामान भेजा जाता है तो इस मालगाड़ी तुलना में दुगुना समय लगता है। हालांकि मालगाड़ी में एक बार में 88 कंटेनर ही जाते हैं। वहीं जहाज के जरिए 10-20 हजार कंटेनर जाते हैं। अभी यह सामने नहीं आया है कि इस प्रोजेक्‍ट पर कितना खर्च आया है। कई जानकारों ने तो इस प्रोजेक्‍ट की आर्थिक व्‍यावहारिकता पर भी सवाल उठाए हैं।

बता दें कि 2000 साल पहले सिल्‍क रूट के जरिए पश्चिम और पूर्व के बीच कारोबार होता था। यूरोप और चीन के बीच साल 2016 में 40 हजार कंटेनर सामान का आयात और निर्यात हुआ था। 2020 तक इसे एक लाख कंटेनर करने का लक्ष्‍य रखा गया है। यूरोप के कई देशों को चीन रेलमार्ग से साल 2011 से ही सामान भेज रहा है। लेकिन इंग्‍लिश चैनल को उसने इसी साल पार करना शुरू किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन की यह रेललाइन सात देशों की अर्थव्यवस्था को आपस में जोड़ने का काम करेगी। इस पूरी परियोजना को कॉम्‍प्‍लेक्‍स फ्रोड और लॉ जिस्टिक सर्विस मुहैया कराने वाली बर्नेल प्रोजेक्‍ट कार्गो का कहना है कि हवाई रूट से सामान लाने के मुकाबले रेल रूट से सामान लाना करीब 50 फीसदी सस्‍ता पड़ेगा।

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