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कोलंबिया सरकार व गुरिल्ला समूह के बीच शांति वार्ता शुरू, बंधक पुलिस कर्मी रिहा

आधे दशक से जारी खूनी संघर्ष खत्म करने के लिए सरकार ने बुधवार को इएलएन के साथ शांति वार्ता शुरू की।
Author बोगोटा | April 3, 2016 23:55 pm
कोलंबिया के राष्ट्रपति जुआन मैनुअल सैंटोस (एपी फोटो)

कोलंबिया के दूसरे सबसे बड़े गुरिल्ला समूह नेशनल लिबरेशन आर्मी (इएलएन) ने शांति प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए 13 दिनों तक बंधक बनाकर रखे गए एक पुलिसकर्मी को रिहा कर दिया है। आधे दशक से जारी खूनी संघर्ष खत्म करने के लिए सरकार ने बुधवार को इएलएन के साथ शांति वार्ता शुरू की। आइसीआरसी ने बताया कि इएलएन ने 20 मार्च को पुलिस कर्मी हेक्टर जी पेरेस को अगवा कर लिया था लेकिन शनिवार को उसे उत्तरी कोलंबिया में बोलिवर के एक ग्रामीण इलाके में रेड क्रास की अंतरराष्ट्रीय समिति को सौंप दिया गया।

राष्ट्रपति जुआन मैनुअल सैंटोस ने एक ट्वीट से इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि पुलिसकर्मी जल्द ही अपने परिवार के पास पहुंच जाएगा। हजारों कोलंबिया वासियों ने समूचे देश के 20 से ज्यादा शहरों में राष्ट्रपति जुआन मैनुअल सैंटोस और एफएआरसी गुरिल्लाओं के साथ उनकी सरकार की शांति प्रक्रियाओं के खिलाफ प्रदर्शन किया। कोलंबिया में तकरीबन 50 साल से चल रहे हिंसक संघर्ष को खत्म करने के मकसद से देश के दूसरे सबसे बड़े गुरिल्ला समूह द नेशनल लिबरेशन आर्मी के साथ बोगोटा में शांति वार्ता शुरू किए जाने के कुछ ही दिन बाद यह प्रदर्शन हुआ।विरोध जताने के लिए प्रदर्शनकारियों ने कोलंबियाई झंडे में शामिल पीले, नीले और लाल रंग के कपड़ों में प्रदर्शन किया और कुछ शहरों में भारी बारिश के बावजूद कई लोगों ने वहां से हटने से इनकार कर दिया।

कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति अलवारो उरिबे की ‘डेमोक्रेटिक सेंटर’ पार्टी ने इस प्रदर्शन का आह्वान किया था। अलवारो लगातार मार्क्सवादी एफएआरसी के साथ वार्ता का विरोध करते रहे हैं। बहरहाल, वार्ता के तीन साल से ज्यादा समय के बाद यह सफल निष्कर्ष पर पहुंचता हुआ दिखाई दे रहा है। बड़ी तादाद में प्रदर्शनकारी ‘गद्दार इस्तीफा दो’ और ‘अब कोई छूट नहीं’ जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।पूर्व उप राष्ट्रपति फ्रैंसिस्को सैंटोस ने कहा, ‘यह प्रदर्शन राष्ट्रपति सैंटोस की सरकार के खिलाफ आम असंतोष है। शांति प्रक्रियाओं में हम कोई छूट नहीं चाहते। हम झूठ और खराब अर्थव्यवस्था प्रबंधन, कर और मुद्रास्फीति से तंग आ चुके हैं।’

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